
शहर में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच युवा डॉक्टर की मौत से चिकित्सा जगत स्तब्ध है। इंदौर से चिकित्सा शिक्षा लेकर महू के शासकीय अस्पताल में सेवाएं देने के साथ कई अस्पतालों में बतौर एनेस्थिसिया विशेषज्ञ डॉ. राधेश्याम जाट (38) की बुधवार सुबह हार्ट अटैक से मौत हो गई। चंदननगर से फूटी कोठी के बीच उनका चिरायू अस्पताल भी था। शहर के कई चिकित्सकों से उनका जीवंत संपर्क रहा। कई वरिष्ठ चिकित्सक उन्हें अच्छा छात्र मानते थे।
उनके निधन से प्रदेश के चिकित्सा जगत में शोक छा गया। उनके निधन से एक बार फिर कार्यशैली और सेहत को लेकर चर्चा छिड़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि डॉ. जाट युवा होने के साथ काफी फुर्तीले थे। घंटों तक ओटी व अस्पताल में काम करना उनका शौक था। संभवत: इसी कारण वे सेहत पर ध्यान नहीं दे पाए। उन्हें बीपी, डायबिटीज या कोई अन्य बीमारी नहीं थी। स्वस्थ होने के बावजूद दिल के दौरे ने उनकी जीवन की डोर तोड़ दी।
पत्नी लेकर पहुंचीं अस्पताल
रिश्तेदार (साले) कुमार संभव ने बताया कि डॉ. जाट मंगलवार को अपने अस्पताल में ऑपरेशन कर रात एक बजे घर लौटे थे। सुबह करीब 5 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा। पत्नी मयूरी जाट उन्हें घर से 200 मीटर दूर उनके ही अस्पताल लेकर पहुंची। यहां उन्हें पंप, इंजेक्शन आदि लगाए गए। स्थिति बिगड़ती देख उन्हें विशेष जूपिटर अस्पताल लेकर निकले, लेकिन रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। बुधवार को उनकी अंत्येष्टि रतनपुरा स्थित पैतृक ग्राम में की गई।
धार के गांव से आकर पूरा किया सपना
मूलत: धार जिले के ग्राम रतनपुरा के रहने वाले डॉ. जाट ने वर्ष 2008 में एमबीबीएस की पढ़ाई गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल से पूरी की। पीजी की पढ़ाई 2019 में एमजीएम मेडिकल कॉलेज से की। इसी बीच 2008 से 2017 तक बदनावर के शासकीय अस्पताल में सेवाएं दी। वर्ष 2019 से वे महू के मध्यभारत अस्पताल में पदस्थ थे। कुमार संभव, रिश्तेदार का कहना है कि जीजाजी फिट थे और लगातार काम करते थे। संभवत: मेंटल प्रेशर और लगातार काम करने से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। उन्हें सीपीआर सहित अन्य प्राथमिक उपचार देकर बचाने की कोशिश भी की, लेकिन वे हमें छोड़ गए।
कोरोना की दूसरी लहर में बचाई कई जिंदगियां
जनवरी 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के पहले डॉ. जाट ने खुद का 50 बिस्तर का अस्पताल शुरू किया। दूसरी लहर में उन्होंने कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनकी जान बचाई।