भद्राव्यापिनी प्रदोषकाल में 6 मार्च को होगा होलिका दहन , 7 को खेलेंगे रंग साथ दुर्लभ संयोग 30 वर्ष पश्चात् शनि और 12 वर्ष पश्चात् गुरु के स्वराशि मे मनेगा यह पर्व । ( डाॅ. अशोक शास्त्री )

भद्राव्यापिनी प्रदोषकाल में 6 मार्च को होगा होलिका दहन , 7 को खेलेंगे रंग साथ दुर्लभ संयोग 30 वर्ष पश्चात् शनि और 12 वर्ष पश्चात् गुरु के स्वराशि मे मनेगा यह पर्व
संशय : दो दिन रहेगी फाल्गुन पूर्णिमा , पहले दिन मिलेगी पर्व के लिए आवश्यक प्रदोष व्यापिनी तिथि और दूसरे दिन स्नान – दान । ( डाॅ. अशोक शास्त्री )

इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा । इसके चलते संशय की स्थिति बनी हुई है । हालांकि इस संदर्भ मे मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री का कहना है कि धार – इंदौर सहित प्रदेशभर में भद्राव्यापिनी प्रदोषकाल में होलिका पूजन 6 मार्च को ही करना शास्त्र सम्मत है ।
डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक धर्म ग्रंथों में होलिका दहन भद्रा मे निषेध है पर वहीं भद्रा मध्य रात्रि के बाद समाप्त होती है तो भद्राकाल के अंतर्गत प्रदोषकाल अथवा भद्रा पुंछ मे होलिका दहन की शास्त्राज्ञा है , यदि दूसरे दिन पूर्णिमा साढे तीन प्रहर से अधिक हो साथ मे प्रतिपदा वृद्धिगामिनी ( पूर्णिमा से अधिक मान हो ) तो होलिका दहन दूसरे दिन पूर्णिमा मे किया जाता है । पर दिनांक 6 मार्च को प्रदोषकाल मे व रात्रि में पूर्णिमा है । भद्रा भी सायं 4:19 से दिनांक 7 मार्च को सूर्योदय पूर्व प्रातःकाल 05:14 बजे तक रहेगी । दुसरे दिन पूर्णिमा साढे तीन प्रहर से अधिक सायंकाल 6:10 बजे तक रहेगी , किंतु प्रतिपदा ह्रासगामिनी ( प्रतिपदा का मान पूर्णिमा से कम है – पूर्णिमा का मान 25 घंटा 51 मिनिट एवं प्रतिपदा मान 25 घंटा 42 मिनिट है ) होने से पूर्णिमा तिथि मे भद्रान्तंर्गत प्रदोषकाल अथवा भद्रापुंछ मे होलिका दहन किया जा सकेगा ” निशीयोत्तर भद्रा समाप्तौ मुखत्वकत्वाभद्राया – मेव ” – धर्म सिंधू ।। प्रदोषव्यापिनी ग्रह्या पौर्णिमा फाल्गुने तथा तस्यां भद्रामुखे त्यक्तत्वा पूजा होला निशामुखे ” ।। एवं प्रदोषकाल का समय सायंकाल सूर्यास्त 6:29 से रात्रि 9:10 बजे तक होलिका दहन शुभ समय है । भद्रा पुच्छे मध्य रात्रि मे है जो समीचीन नही है । इसके अलावा भद्रा का समापन 7 मार्च को सूर्योदय पूर्व प्रातःकाल 5:56 पर होने से प्रातः सूर्योदय पूर्व होलिका दहन करें । तत्पश्चात् दिनांक 7 मार्च को ही रंग खेले ।
इस बार होली पर ग्रहों के कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं , जिसके चलते ये पर्व और भी खास हो गया है । ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक , इस बार गुरु और शनि अपनी – अपनी स्वराशि में रहेंगे , ये संयोग कई दशकों में एक बार आता है ।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर पहले होली की पूजा की जाती है और बाद में होलिका दहन किया जाता है। इस बार ये तिथि 6 मार्च सोमवार को है । इस बार होली पर ग्रहों के एक नहीं कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं , जिसके चलते ये पर्व बहुत ही खास बन गया है ।
ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री के अनुसार इस बार गुरु और शनि स्वराशि में है तो वहीं बुध और सूर्य मिलकर एक राजयोग बना रहे हैं । आगे जानिए होली पर बनने वाले इन दुर्लभ योगों के बारे में…
30 साल बाद शनि के योग में होगा होलिका दहन
वर्तमान में शनि अपनी स्वराशि कुंभ में स्थित है । अपनी ही राशि में होने से शनि शुभ फल देने वाला माना गया है । इसके पहले साल 1993 में शनि के कुंभ राशि में रहते हुए होलिका दहन का पर्व मनाया गया था यानी 30 साल पहले । इस राशि में अभी शनि के साथ सूर्य और बुध भी स्थित है। इस तरह एक ही राशि में 3 ग्रह होने से त्रिग्रही योग भी होली पर बन रहा है ।
गुरु 12 साल बाद रहेगा मीन राशि में
इस समय गुरु अपनी स्वराशि मीन में स्थित है । अपनी ही राशि में होने के चलते गुरु इस समय शुभ फल प्रदान कर रहा है। इसके पहले साल 2011 में गुरु ग्रह मीन राशि में था , तब होली का पर्व मनाया गया था । यानी 12 साल बाद एक बार फिर से गुरु के मीन राशि में रहते हुए होलिका दहन किया जाएगा ।
शुक्र ग्रह रहेगा उच्च राशि में
वर्तमान में शुक्र मीन राशि में गुरु के साथ युति कर रहा है । शुक्र ग्रह से ही भौतिक सुख – सुविधाओं की प्राप्ति होती है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार , शुक्र जब मीन राशि में रहता है तो शुभ फल प्रदान करता है क्योंकि ये शुक्र की उच्च राशि है । इस राशि में शुक्र बलवान स्थिति में आ जाता है । इस शुभ स्थिति में की गई होली पूजा घर – परिवार में सुख – समृद्धि लाने वाली रहेगी ।
सूर्य – बुध की युति से बनेगा राजयोग
इस समय मकर राशि में सूर्य और बुध एक साथ हैं । सूर्य और बुध की युति बनने बुधादित्य नाम का राजयोग बनेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बहुत ही शुभ माना गया है । इस योग में की गई पूजा , उपाय आदि का फल कई गुना होकर मिलता है । होली पर इस राजयोग के बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है ।
धार्मिक मान्यतानुसार होलिका दहन पर कुछ उपाय
डाॅ. शास्त्री के मुताबिक होली पर इन उपायों से व्यक्ति के जीवन में अच्छे अवसर बनते जाते हैं और घर की तंगी भी दूर हो सकती है । इसके लिए होलिका की परिक्रमा करते हुए उसमें मदार की दाल डाली जाए । इससे नौकरी में सफलता मिलती हुई मानी जाती है ।
इसके अलावा होलिका दहन की राख को सिर के पास सात बार घुमाना शुभ माना जाता है । सिर पर घुमाने के बाद इस राख को मिट्टी में दबाया जाता है । इस उपाय से रोग दूर रहते हैं और नजर दोष भी हटता है ।

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