चुप रहिए और निकलिए कोर्ट से बाहर… चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने सीनियर एडवोकेट विकास सिंह (Vikas Singh) को लगाई फटकार , जाने क्या है पूरा मामला ।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष सीनियर एडवोकेट विकास सिंह (Vikas Singh) के बीच गुरुवार को तीखी बहस हुई. मुख्य न्यायाधीश ने आज अदालत में अपना आपा खो दिया और सीनियर एडवोकेट विकास सिंह को एक याचिका की लिस्टिंग पर आपत्तिजनक शब्दों के लिए कोर्ट से बाहर जाने का आदेश दिया.

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सीनियर एडवोकेट विकास सिंह पर जोर से चिल्लाते हुए कहा-“चुप रहो. अभी इस अदालत को छोड़ दो. तुम हमें डरा नहीं सकते!” चैंबर्स ब्‍लॉक में वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट को आवंटित की गई 1.33 एकड़ भूमि को परिवर्तित करने के लिए दायर याचिका को सूचीबद्ध करने के संबंध में ये बहस हुई.

ये है पूरा मामला
मामला काफी दिनों से लंबित था. विकास सिंह को जब आज मामले की तत्काल सूची नहीं मिली, तो वह सीजेआई के साथ तीखी बहस में पड़ गए. उन्होंने कहा कि वह इस मामले को न्यायाधीशों के निवासियों तक नहीं ले जाना चाहते हैं. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सिंह को फटकारा और कहा, “क्या यह व्यवहार करने का तरीका है? मैं इस तरह से नहीं डरूंगा. बैठ जाओ.” हालांकि, सिंह ने इस मामले पर अपनी मजबूत भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि वकीलों को चैंबर आवंटित किए जाने के लिए 20 साल से इंतजार किया जा रहा है और अदालत ने बार-बार उल्लेख करने के बावजूद अभी तक इसे सूचीबद्ध नहीं किया.

SCBA के अध्यक्ष का व्यवहार ठीक नहीं
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “कृपया अपनी आवाज न उठाएं. यह SCBA के अध्यक्ष के रूप में व्यवहार करने का तरीका नहीं है. आप सुप्रीम कोर्ट को आवंटित भूमि को बार को देने के लिए कह रहे हैं. मैंने अपना निर्णय लिया है. इसे 17 तारीख को लिया जाएगा और यह पहले बोर्ड पर नहीं होगा.” इस पर सिंह ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि बार कुछ नहीं करता है इसका मतलब यह नहीं कि इसे हल्के में लिया जाना चाहिए. मैं इसके लिए दृढ़ता से महसूस करता हूं. 20 साल से वकील चैंबर आवंटित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं.”

मैं भारत का चीफ जस्टिस हूं- डीवाई चंद्रचूड़
इसपर सीजेआई ने कहा, “मिस्टर सिंह, मैं भारत का चीफ जस्टिस हूं. मैं लंबे समय तक बेंच में रहा हूं. मैंने कभी भी बार के सदस्यों से खुद को परेशान नहीं होने दिया. मैं अपने कार्यकाल के अंतिम 2 वर्षों में ऐसा नहीं होने दूंगा. आपको सामान्य वादी के रूप में व्यवहार करना चाहिए. कृपया मेरे हाथ को कुछ ऐसा करने के लिए मजबूर न करें जो आप नहीं चाहते.”

कपिल सिब्बल ने मांगी माफी
बाद में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने बार की ओर से पीठ से माफी मांगी और कहा, “आज सुबह जो हुआ उसके लिए मुझे खेद है. मुझे नहीं लगता कि बार को मर्यादा की सीमा का उल्लंघन करना चाहिए.”

पहले भी हो चुकी है ऐसी बहस
यह पहली बार नहीं जब सिंह को बेंच के सदस्यों ने फटकार लगाई है. सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने पहले मौखिक रूप से टिप्पणी की थी, “मुझे प्रैक्टिस के बारे में मत बताओ, मैं तय करूंगा कि मेरे न्यायालय में क्या होता है.” जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने भी अदालत में मामलों की सुनवाई के आदेश के बारे में “अनावश्यक” आपत्ति जताने के उनके आचरण पर नाराजगी व्यक्त की थी.

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