
इंदौर पुलिस ने 4 साल के मासूम श्रेयांस की संदिग्ध मौत के मामले का खुलासा कर दिया है। श्रेयांश का हत्यारा उसका परनाना शोभाराम (70) ही निकला। उसने ही श्रेयांस के मुंह को रजाई से दबाकर उसकी हत्या की थी। पुलिस ने रविवार रात उसे गिरफ्तार कर लिया है।
मामला शिप्रा थाने के कदावली गांव का है, जहां बीती 8 अप्रैल को श्रेयांश की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। घर में सोते समय हत्या होने से पुलिस के शक की सुई परिवार के बीच ही घूम रही थी।
शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होने की जानकारी:-पुलिस पहले दिन से ही सभी परिवार वालों पर नजर रख रही थी। शुरुआत में बच्चे की मौत हार्ट अटैक से होने की जानकारी सामने आई थी। लेकिन शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में डॉ. जितेंद्र ने पुलिस को दम घुटने से मौत होने की जानकारी दी थी। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और परिजन के बारे में जानकारी हासिल करने में जुट गई। पुलिस ने इस हत्याकांड को लेकर पूरे परिवार की कॉल डिटेल और रिश्तेदारों की जानकारी तक निकाली।
इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल ने बताया कि शोभाराम की 24 वर्षीय पोती नीतू की शादी देवास के सुतारखेडी में सुमित चौधरी से हुई थी। लेकिन श्रेयांस के होने के करीब ढाई साल बाद सुमित और नीतू अलग हो गए थे। तब से ही वह अपने पिता दिनेश चौधरी के यहां रहकर पीएससी की तैयारी कर रही थी। शोभाराम को लगता था कि नीतू अपने बेटे के कारण न तो ठीक से पढ़ाई कर पा रही है, न ही उसकी दूसरी शादी हो पा रही है। इसके अलावा जब नीतू इंदौर कोचिंग जाती थी, तो उसके बेटे को शोभाराम को ही संभालना पड़ता था। वह यह भी सोचता था कि वह बड़ा होकर प्रॉपर्टी में हिस्सा मांगेगा।
श्रेयांस वारदात वाली रात करीब 11 बजे सो गया था। सुबह जब नाना दिनेश उठे तो वह सोता दिखा। उन्होंने श्रेयांस को चादर ओढ़ाई और दूध बेचने चले गए। करीब 8 बजे जब वे वापस लौटे तब भी श्रेयांश उठा नहीं था। उन्होंने आवाज लगाई तो भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने श्रेयांस को हिलाकर उठाने की कोशिश की, लेकिन शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। वे घबरा गए। उसे तत्काल नजदीक के अस्पताल लेकर गए। यहां डॉक्टरों ने एमवाय अस्पताल ले जाने की सलाह दी। वे श्रेयांस को एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
8 अप्रैल की रात को मां नीतू कमरे में पढ़ाई कर रही थी और श्रेयांश मोबाइल में कार्टून देख रहा था। कार्टून देखते-देखते वो सो गया। करीब साढ़े दस बजे के आसपास नीतू ने देखा कि बेटा सो गया है। वह बेटे को अपने कमरे से लेकर नीचे पहुंची और नाना शोभाराम के पास सुला दिया। अगले दिन सुबह करीब साढ़े पांच बजे दादा शोभाराम उठे तो श्रेयांश सोया हुआ था। उन्होंने उसे चादर ओढ़ाई और चले गए।
श्रेयांश रोज सुबह साढ़े सात बजे के आसपास उठ जाता था लेकिन उस दिन नहीं उठा। मां नीतू प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग के लिए इंदौर आ गई थी। नीतू की काकी और दादी ने श्रेयांश के पलंग के पास जाकर देखा। बच्चे में कोई हलचल नहीं होने पर घर के अन्य लोगों बताया। फिर नाना दिनेश उसे लेकर नजदीक के अस्पताल पहुंचे।