4 दोस्तों की एक साथ मौत, बचपन से थे जिगरी दोस्त, एक ही घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

 

 

 

मिर्जापुर में एक हादसे ने चार दोस्तों की जिंदगी छीन ली। चारों जिगरी दोस्त थे। एक साथ स्कूल में पढ़े, साथ बड़े हुए। हर रोज चारों की मुलाकात होती थी। पार्टी में भी साथ ही जाते थे। कुछ ऐसा हुआ कि चारों को मौत भी एक साथ, एक ही समय में मिली। इनका अंतिम संस्कार भी एक ही घाट पर एक ही समय किया गया।

सबसे पहले जान लेते हैं कब और कहां हुआ हादसा

बुधवार की रात पटेहरा कला के रहने वाले अंकित मिश्रा उर्फ राम मिश्रा (17), सुमेश पाल (16), बहरछठ गांव के गणेश यादव (18), रामपुर रिक्शा गांव का अर्पित पांडेय (17) अपने दोस्त खंडवर मझारी के रहने वाले सूरज की बहन की शादी में शामिल होने गए थे। दोस्त के गांव की दूरी मात्र 6 किमी थी। सभी वहां हंसी-खुशी बारात में शामिल हुए। जयमाल के बाद बाकी रस्में होने लगीं। इसके बाद चारों वहां से अपने घर लौट रहे थे। सुबह करीब 4 बजे संत नगर थाना क्षेत्र में कलवारी-लालगंज मार्ग पर गोहीया कला गांव के पास उनकी बाइक आगे चल रही ट्रैक्टर ट्रॉली में जा घुसी। टक्कर लगने के बाद चारों सड़क पर बिखर गए और उनकी मौके पर मौत हो गई। इसकी सूचना मिलते ही सभी के घर में चीख-पुकार मच गई। चारों तरफ मातम छा गया।

घर का इकलौता चिराग था गणेश यादव
बहरछठ गांव का गणेश यादव अभी 18 साल का हुआ था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। खेती कर परिवार चलाने वाले पिता हरिहर प्रसाद ने जब से उसकी मौत की खबर सुनी, तब से वह रोए जा रहे हैं। बार-बार बिना कुछ बोले आसमान की ओर देखने लग रहे हैं कि हे भगवान, हे प्रभु ये क्या हो गया। अब हमारा बुढ़ापा किसके सहारे कटेगा।

अंकित मिश्रा के घर में दोहरा मातम
पटेहरा कला ग्राम निवासी अंकित मिश्रा उर्फ राम मिश्रा के परिवार में को दोहरा झटका लगा है। दरअसल, अंकित के घर में उसके चाचा बबलू मिश्रा (45) की मौत तबीयत खराब होने के कारण हाल ही में हुई थी। 5 दिन पहले ही परिवार ने उनकी तेरहवीं की थी। परिवार के लोग जवान सदस्य के गम से उबर नहीं पाए थे कि अंकित की मौत ने उनको झकझोर दिया। सड़क हादसा जिंदगी भर का दर्द दे गया। अंकित के पिता बद्री प्रसाद का रो-रोकर बुरा हाल है।

अंकित के घर से 200 मीटर दूर है सुमेश का घर
अंकित के घर से सिर्फ 200 मीटर की दूरी पर है सुमेश पाल का घर। सुमेश के घर में भी मातम छाया है। सुमेश के पिता रवि शंकर पाल का रो-रोकर बुरा हाल है। कच्ची दीवार पर रखे छप्पर वाले घर में रवि शंकर परिवार के साथ रहते थे। खेती किसानी से ही घर का खर्च चलता था। अंकित के पिता कहते हैं कि बेटे के जो सपना देख रखे थे, वो भी उसकी चिता के साल जल गए हैं।

अर्पित के पिता बोले- सोचा था बेटा अफसर बनेगा
रामपुर रिक्शा के निवासी अर्पित के पिता राधेश्याम पांडे पेशे से किसान हैं। राधेश्याम बेटे की मौत से टूट गए हैं। उन्होंने रोते हुए कहा कि बेटे की मौत के बाद कोई अरमान नहीं रहा। बेटा पढ़ने में अच्छा था। सोचा था बेटा अफसर बनकर घर की गरीबी को दूर करेगा। लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।

स्कूल से हुई थी सभी की दोस्ती
परिजनों के मुताबिक, चारों की दोस्ती पढ़ाई के दौरान स्कूल में हुई थी। अंकित, सुमेश और अर्पित प्रोजेक्ट माला स्कूल में पढ़ाई करते थे । गणेश जीआईसी राजकीय इंटर कॉलेज में पढ़ाई करता था। सभी छात्र 10वीं की परीक्षा बेहतर अंक के साथ उत्तीर्ण कर चुके थे। बेहतर अंक लाने पर परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं था । लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। मिर्जापुर के चील्ह गंगा घाट पर चारों दोस्तों का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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