इंदौर। पुलिस गिरफ्त में जालसाजी आरोपी, एक गाड़ी माल आता था कंपनी में, आरोपी 3 गाड़ी माल के बिल बनाकर पास कर लेते थे

कंपनी में कर्मचारियों की सांठ-गांठ से जालसाजी कर कंपनी के माल की हेराफेरी कर 81 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को लसूड़िया पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार था। वर्ष 2019 में केस दर्ज करने के बाद जब 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया तो इस आरोपी के खिलाफ सबूत मिले तब जाकर इसे बुधवार को बायपास स्थित सिल्वर स्प्रिंग से बुधवार को गिरफ्तार किया था, गुरुवार को उसे जेल भेज दिया गया।

लसूड़िया टीआई संतोष दूधी ने बताया कि एसके कम्पाउंड स्थित केमको प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर राम राजपूत की रिपोर्ट पर कैशियर शुभम वर्मा निवासी श्याम नगर, संजय पाल निवासी भागीरथपुरा और अमित केवट निवासी कुशवाह नगर पर केस दर्ज किया था। आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो धोखाधड़ी में कैशियर दीपक गुर्जर का नाम पता चला। करीब 45 दिन पहले दीपक गुर्जर को गिरफ्तार किया तो उसने बताया कि इस धोखाधड़ी में सांवेर रोड तनवीर ट्रेडर्स के राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की मुख्य भूमिका रही है। क्योंकि जब कंपनी में लाखों के माल की हेराफेरी हुई थी तब गुप्ता ही केमको कंपनी में रॉ मटेरियल सप्लाय करता था। गुप्ता ने कैशियर दीपक गुर्जर के साथ कंपनी को करीब 81 लाख रुपए की चपत लगाई है।

1 मजदूर के नाम पर दो कार्ड का वेतन

आरोपी दीपक गुर्जर ने बताया कि गुप्ता के साथ मिलकर उसे घोटला किया है। गुप्ता फर्जी रसीदें बनाकर जितना माल भेजता नहीं था, उससे ज्यादा के बिल बनाता था। वह बिल पास कर भुगतान करवा देता था। एक और कैशियर शुभम वर्मा कंपनी में काम करने वाले मजदूरों के दो-दो कार्ड बनाकर एक कार्ड का भुगतान मजदूरों को करता था और दूसरे कार्ड का भुगतान खुद रख लेता था। इसके लिए वह मजदूरों के फर्जी कार्ड बनाता था और वेतन देने के वाउचर पर फर्जी हस्ताक्षर खुद कर देता था। इसका खुलासा कंपनी के ऑडिट में हुआ। कंपनी ने मजदूरों के वेतन वाउचर की जांच भी कराई।

मिलकर एक साल में 7.50 लाख रुपए की ठगी कर ली

कंपनी ने जब खरीदे गए सामान की जांच की तो सामान सप्लाय करने वाले संजय पाल और अमित केवट ने फर्जी बिल बनाकर शुभम को देने की बात कबूल की। वहीं शुभम ने फर्जी बिल से भुगतान करना स्वीकारा। सालभर में आरोपियों ने 7.50 लाख रुपए की ठगी कर दी। जांच के बाद पुलिस ने भादवि की धारा 406, 408 के बाद 420, 467, 468, 471, 201 और 120-बी बढ़ाकर दीपक को आरोपी बना लिया। दीपक के बाद राजेंद्र गुप्ता की भी कंपनी मालिक विजय जैसवानी ने शिकायत की थी। जब राजेंद्र हाथ आया तो सख्ती से पूछताछ में उसने कबूला कि वह एक गाड़ी माल भेजता था और तीन गाड़ी की रसीद बनाकर बिल क्लियर करा लेता था।

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