दमोह। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के फरमान के बाद एक्शन में आई मध्यप्रदेश सरकार, सुसाइड केस में अब होगी CID जांच

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल दोपहर में मीडिया के सामने आए और चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा- सेल्समैन सुसाइड केस में पुलिस ने जल्दबाजी की है। मैं इसका सख्त विरोध करता हूं। जब तक इन सबको न्याय नहीं मिल जाता, मैं दमोह पुलिस की सेवाएं नहीं लूंगा। आज से ही मैं उन सबको वापस करूंगा। मेरी निजी सुरक्षा को छोड़कर दमोह पुलिस का कोई भी कर्मचारी मेरे बंगले पर या मेरे साथ नहीं होगा।

केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में चर्चा चल पड़ी। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मामले में CID जांच के आदेश दे दिए हैं। उधर, कांग्रेस भी मैदान में कूदी और केंद्रीय मंत्री पर हमला बोला।

23 जून को शहर के बजरिया वार्ड नंबर- 3‎ में राशन दुकान के सेल्समैन विक्रम उर्फ ‎विक्की रोहित (35) साल का शव राशन दुकान में फंदे पर मिला था। पुलिस को मौके पर सेल्समैन के पास से 2 पन्नों का सुसाइड नोट मिला। जिसमें धर्मपुरा वार्ड के पार्षद पति और नगर पालिका सांसद प्रतिनिधि यशपाल ठाकुर, भाजपा नेता मोंटी रैकवार, नरेंद्र परिहार और नरेंद्र सूर्यवंशी का नाम लिखा था। इन सभी पर विक्रम ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

इतना ही नहीं सुसाइड नोट में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल का भी नाम लिखा था। इसमें लिखा था कि यह सभी लोग मंत्री के नाम से मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। मुझसे राशन दुकान छीनना चाहते हैं।

आधे घंटे चक्काजाम के बाद दर्ज हुआ केस

रोहित की मौत से गुस्साए परिजन ने पोस्टमॉर्टम कराने से पहले‎ जिला अस्पताल के सामने सड़क पर धरना दिया था। सूचना पर तहसीलदार मोहित जैन, सीएसपी‎ भावना दांगी सहित कोतवाली व दमोह‎ देहात थाना टीआई सहित पुलिस बल मौके‎ पर पहुंचा। करीब आधे घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा।

परिजन इस जिद पर अड़े थे कि सुसाइड नोट में‎ जिन लाेगाें के नाम लिखे हैं, उनके खिलाफ‎ पहले एफआईआर दर्ज की जाए। इसके‎ बाद शव का पीएम कराएंगे और अंतिम‎ संस्कार करेंगे।‎ काफी देर तक पुलिस समझाइश देती‎ रही, लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं थे।

देहात थाना टीआई सत्येंद्र सिंह‎ राजपूत ने समझाइश दी कि कुछ भी कर‎ लो, तीन दिन के पहले मर्ग जांच होने तक‎ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती,‎ इसके बाद परिजन इस बात की जिद पर‎ अड़ गए कि हमें लिखित में दिया जाए कि‎ कब एफआईआर की जाएगी।

मृतक के‎ भाई सौरभ रोहित ने लिखित आश्वासन‎ दिए जाने की बात कही। पुलिस ने तीन‎ दिन बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया‎, इसके बाद परिजन शव का पीएम कराने‎ तैयार हुए। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव‎ काे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।‎

पुलिस ने 4 लोगों पर मामला दर्ज किया, इनमें मंत्री के करीबी भी

पुलिस ने 2 दिन बाद इस मामले में 4 लोगों के खिलाफ धारा 306 के तहत एफआईआर दर्ज की। बताया गया कि जिन पर केस दर्ज हुआ, इनमें एक-दो लोग केंद्रीय मंत्री के करीबी हैं। गुरुवार को धरमपुरा वार्ड के दर्जनों लोग यशपाल ठाकुर के समर्थन में केंद्रीय राज्य मंत्री के पास पहुंचे। उन्होंने यशपाल को निर्दोष बताते हुए उचित कार्रवाई की मांग की।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री को पुलिस की इस कार्रवाई पर गुस्सा आया। उन्होंने गुरुवार को दमोह पुलिस की कार्रवाई को दोषपूर्ण बताते हुए सुरक्षा लेने से मना कर दिया। उन्होंने बयान दिया कि अब से न्याय मिलने तक दमोह पुलिस की कोई भी सेवा ही नहीं लेंगे।

सेल्समैन ने लिखा था- पार्षद, सांसद के पास गए, मुझे काम नहीं करने दे रहे

मैं, विक्रम रोहित उर्फ विक्की निवासी बजरिया नंबर- 3 राशन दुकान का सेल्समैन हूं। मेरी दुकान 28/01/2023 को गौरीशंकर उप भंडार अटैच की गई थी, जिसकी पावती मुझे कार्यालय कलेक्टर (खाद्य शाखा) से प्राप्त हुई। उसके बाद नरेंद्र परिहार जो कि गौरीशंकर उप भंडार चलाता था, उससे मैं बार-बार चार्ज लेने का बोलता रहा कि मुझे चार्ज दे दो। एक महीने तक वह मुझे घुमाता रहा, फिर 25 मई को फोन करके बताया कि हमने, नरेंद्र परिहार और नर्मदा सूर्यवंशी दोनों की बात धरमपुरा वार्ड पार्षद यशपाल से कराकर दुकान नर्मदा सूर्यवंशी के नाम से करवा दी है और अब यह दुकान हम तीनों मिलकर चलाएंगे।

यशपाल ठाकुर, नरेंद्र परिहार, नर्मदा सूर्यवंशी… इन्होंने मेरी दुकान ‘सद्‌भावना’ का सामान और धरमपुरा गौरी शंकर का सामान, दोनों दुकानों का जून का गेहूं, चावल, नमक, शक्कर, एक साथ आया और हमें बिना बताए धरमपुरा में उतरवा लिया। मांगने पर वापस नहीं कर रहे हैं। मुझसे बिल भी रिसीव करवा लिया। नरेंद्र परिहार ने बोला बिल रिसीव कर दो, सामान भेज दे रहे हैं।

इन लोगों के द्वारा मुझे बार-बार परेशान किया जा रहा है। मुझे दुकान नहीं चलाने दे रहे। ये सब सांसद प्रह्लाद पटेल के पास गए थे। यशपाल ठाकुर ने सब‌को सांसद, कलेक्टर के पास जाकर खाद विभाग से नोटिस जारी करवाया। ये सब उपचुनाव के बाद से पार्षद, मोंटी रैकवार और यशपाल ठाकुर सांसद के पास जाकर मुझे काम-धंधा नहीं करने दे रहे हैं। जब तक मैं जिंदा रहूंगा, ये लोग मुझे सुख से काम धंधा नहीं करने देंगे। उम्मीद है कि मेरे मरने के बाद ये लोग मेरे परिवार को तकलीफ नहीं पहुंचाएंगे।

सुसाइड नोट में लिखी उधारी

येलु रैकवार – 28000
एजाज पठानी मोहल्ला- 15 हजार
केके पुलिस – 80000
केके पुलिस – 70001-08482
येलु रैकवार- 78697-67949

भाई बोला- आरोपी राशन दुकान हथियाना चाहते थे

मृतक के भाई सौरभ रोहित का आरोप है कि करीब 6 महीने पहले उनके भाई को राशन दुकान स्वीकृत हुई थी। इस दुकान को ये चारों लोग हथियाना चाहते थे, इसीलिए मेरे भाई को प्रताड़ित कर रहे थे। 15 दिनों से चारों मेरे भाई को टॉर्चर कर रहे थे। 2 दिन पहले आवंटन आया, तो इन लोगों का फोन आया कि बिल पर रिसीविंग दे दो। आगे की दुकानों का राशन उतारने के बाद आपका माल दे देंगे। पहले भी ऐसा होता रहा है, लेकिन इस बार इन लोगों ने मेरे भाई की राशन दुकान का अनाज भी अपने पास रख लिया, जो वापस नहीं दिया।

जब मेरे भाई ने यशपाल ठाकुर और मोंटी रैकवार से अनाज वापस मांगा तो उन्होंने कहा कि यदि बीच में आओगे तो तुम्हें जान से मार देंगे। आरोपियों से बहसबाजी के बाद मेरे भाई कलेक्ट्रेट गए थे और वहां भी शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और इसी तनाव के चलते उन्होंने इतना बड़ा कदम उठा लिया। हम चाहते हैं कि जब हमारे भाई ने सुसाइड नोट में साफ तौर पर लिखा है कि चारों की प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने आत्महत्या की है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। 2 दिन बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

ठेकेदार बोला- किसी ने नहीं हड़पा था विक्रम का खाद्यान्न ​​​​​​​

राशन दुकान में खाद्यान्न सप्लाई करने वाले ठेकेदार रोहित राय ने बताया कि पिछले महीने धरमपुरा वार्ड की दुकान को विक्रम रोहित की दुकान में अटैच किया गया था। दोनों दुकानों का खाद्यान्न विक्रम रोहित के पास पहुंच गया था, लेकिन विक्रम के द्वारा खाद्यान्न वितरित नहीं किया गया। धर्मपुरा वार्ड के पार्षद पति यशपाल ठाकुर ने कलेक्टर से इस मामले की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि उनके वार्ड के लोगों को दूसरे वार्ड में जाकर खाद्यान्न लेने में काफी दिक्कत हो रही है।

कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने विक्रम रोहित के यहां से दुकान हटाकर बजरिया 4 में नर्मदा सूर्यवंशी की दुकान में अटैच कर दिया था। साथ में यह भी आदेश हुआ कि नर्मदा सूर्यवंशी के यहां धर्मपुरा की दुकान भले ही अटैच है, लेकिन खाद्यान्न का वितरण धर्मपुरा से ही होगा।

ठेकेदार रोहित राय ने बताया कि नर्मदा सूर्यवंशी ने फूड विभाग में बात की थी कि उसके पास मई माह का खाद्यान्न नहीं पहुंचा है, क्योंकि उसे विक्रम रोहित ने अपने पास रख लिया था। तब खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर आदित्य दहिया ने सेल्समैन नर्मदा सूर्यवंशी के फोन से मुझे कहा कि मैं विक्रम रोहित के खाद्यान्न को नर्मदा सूर्यवंशी के यहां भिजवा दूं। मैंने पूरा खाद्यान्न नर्मदा सूर्यवंशी की दुकान पर भिजवा दिया। मृतक का खाद्यान्न किसी ने नहीं हड़पा। यही बयान मैंने पुलिस को भी दिया है। जब इस मामले में फूड इंस्पेक्टर आदित्य दहिया और कलेक्टर मयंक अग्रवाल से बात करनी चाही ताे उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री बोले- यशपाल ठाकुर बेगुनाह है

दमोह प्रवास पर पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री के पास गुरुवार सुबह धरमपुरा क्षेत्र के दर्जनों लोग पहुंचे और उन्होंने कहा- यशपाल ठाकुर बेगुनाह हैं, पुलिस ने झूठा मामला दर्ज किया है। पूरी बात सुनने के बाद मंत्री पटेल ने मीडिया के सामने आए और चौंका देने वाला बयान दिया।

मंत्री पटेल ने कहा कि नौजवान ने आत्महत्या की, उसकी मौत पर मैंने संवेदना व्यक्त की थी, लेकिन जो झूठे मुकदमे लगाकर या लगवाकर दबाव बनाना चाहते हैं, वह कान खोलकर सुन लें, उनके मंसूबे पूरे नहीं होंगे। जो दमोह की पुलिस ने किया है मुझे लगता है कि यह जल्दबाजी है। जब तक हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच नहीं हो जाए, पुलिस को ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

मैं निजी तौर पर मानता हूं कि इस मामले में जल्दबाजी की गई है। मैं दमोह एसपी के खिलाफ, इस कार्रवाई के खिलाफ हूं। यशपाल ठाकुर मेरे कार्यकर्ता हैं, एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं। उस सुसाइड नोट में तो मेरा नाम भी लिखा है, फिर मुकदमा मुझ पर भी दर्ज होना चाहिए था, इसलिए हर कीमत पर मैं अपने लोगों के साथ हूं। मैंने कहा था कि बारीकी से जांच होनी चाहिए, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने जल्दबाजी की है। मैं इसका सख्त विरोध करता हूं। जब तक इन सब को न्याय नहीं मिल जाता, मैं दमोह पुलिस की कोई भी सेवाएं नहीं लूंगा। आज से ही मैं उन सब को वापस करूंगा। मेरी निजी सुरक्षा को छोड़कर दमोह पुलिस का कोई भी कर्मचारी मेरे बंगले पर या मेरे साथ नहीं होगा।

एसपी बोले- मुझे नहीं पता मंत्री जी ने क्या बोला

केंद्रीय मंत्री पटेल के बयान पर दमोह एसपी राकेश कुमार सिंह से बात करना चाही तो उन्होंने बस इतना कहा कि मुझे नहीं मालूम मंत्री जी ने क्या बयान दिया है। जब मैंने सुना ही नहीं तो मैं उस पर कैसे प्रतिक्रिया दे सकता हूं।

सुसाइड नोट में इन नामों का जिक्र

यशपाल ठाकुर : ठाकुर लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहे और दमोह के धरमपुरा वार्ड से कई बार पार्षद भी चुने गए। इस निकाय चुनाव में उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया और भाजपा का दामन थाम लिया। वर्तमान में उनकी पत्नी धरमपुरा वार्ड से पार्षद हैं। वे केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के करीबियों में से एक हैं और नगर पालिका में सांसद प्रतिनिधि हैं।
मोंटी रैकवार : रैकवार दमोह के भाजपा के युवा नेता हैं। वे भी केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल के करीबियों में शामिल है, लेकिन कुछ महीने से ये दूर-दूर नजर आ रहे हैं।
नरेंद्र परिहार : धरमपुरा वार्ड में संचालित सरकारी राशन दुकान में सेल्समैन के रूप में नियुक्त हैं।
नर्मदा सूर्यवंशी : दमोह शहर के बजरिया वार्ड क्रमांक 4 में संचालित सरकारी राशन दुकान में सेल्समैन है।

शहर की स्थिति तो भगवान भरोसे- कांग्रेस जिला अध्यक्ष

जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष मनु मिश्रा का कहना है- सोचिए एक केंद्रीय मंत्री, जो भारत सरकार में महत्वपूर्ण जगह पर हैं, उन्हें यह कहना पड़ रहा है कि पुलिस-प्रशासन निष्पक्षता पूवर्क और अच्छी तरह से काम नहीं कर रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर आज किसी स्थिति में है, क्योंकि जिनकी सरकार है, उन्हें यह कहना पड़ रहा है कि पुलिस ठीक से काम नहीं कर रही है तो इसका मतलब है कि मामला गड़बड़ है। शहर के हाल तो भगवान भरोस ही हैं। हम यही चाहते हैं कि इस पूरे मामले की अच्छी तरह से जांच हो।

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने साधा निशाना

ट्वीट में लिखा – यही है @narendramodi जी का “समान नागरिक कानून”!!

भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति का “मृत्यु पूर्व दिया गया बयान अथवा सुसाइड नोट” एक महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया है। उसी के अनुरूप न्याय होता है, किंतु संविधान की रक्षा की शपथ लेने वाले केंद्रीय मंत्री श्री प्रहलाद पटेल का कानून कुछ और है?

दमोह में राशन दुकान के एक संचालक ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली, कथित आरोपियों के खिलाफ उसी आधार पर पुलिस ने कार्यवाही की, मंत्री जी अपने चहेतों पर हुई यह कार्यवाही अनुचित लगी!

बेचारी (!!) पुलिस क्या करे?

राष्ट्रभक्त बने या राष्ट्रद्रोही?

इंदौर में बजरंगियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद भी पुलिस को अपने सम्मान के लिए सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठानी पड़ी थी?

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