ब्राह्मण समाज के समर्थन में उभरता चुनावी मुद्दा: भाजपा विधायक केदार शुक्ला से पेशाब कांड के आरोप से उठते सवाल

सीधी के पेशाब कांड से सबसे ज्यादा फजीहत सीधी से भाजपा विधायक केदार शुक्ला की हुई थी। पेशाब कांड और उसके बाद आरोपी के घर तोड़ने से खड़े हुए संकट ने भाजपा से ज्यादा नुकसान केदार शुक्ला को पहुंचाया है

आदिवासी और ब्राह्मण के बीच खड़ी हुई लड़ाई में केदार शुक्ला अपने बयान पर स्मार्टनेस से अडे़ हैं। वे आज भी कह रहे हैं कि पेशाब कांड का आरोपी प्रवेश शुक्ला हमारा अधिकृत प्रतिनिधि नहीं है, लेकिन वे इस बात को भी मानते हैं कि हो सकता है, प्रवेश किसी बैठक में उनका प्रतिनिधि बनकर गया हो।

ब्राह्मणों की नाराजगी पर वे कहते हैं कि हालात विस्फोटक नहीं हैं, वो ब्राह्मण समाज को मना लेंगे और इस बार ज्यादा वोटों से जीतेंगे।

मुझे नहीं लगता कि शुक्ला परिवार का घर अवैध था

प्रवेश शुक्ला के घर पर बुलडोजर चलाने को लेकर केदार शुक्ला कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि उन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके मकान बनाया होगा। जिनका घर गिराया गया, वह हमारे यहां का साधारण परिवार नहीं है। वे ब्राह्मण जरूर हैं, लेकिन मांगने वाले ब्राह्मण नहीं हैं। वे गांव के जमींदार लोग है।

उनके पास अभी भी 50 से 100 एकड़ जमीन हर परिवार में है। वे किसी सरकारी जमीन पर घर बनाएंगे यह कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस मामले में जो पीड़ित है उसे भी उनके पूर्वजों ने बसाया था। पेशाब कांड का पीड़ित भी उन्हीं की जमीन पर रहता है। वह परिवार जमींदार होने के बावजूद शोषक नहीं है, इसलिए गरीबों में उन लोगों की इज्जत है।

यही कारण है कि पीड़ित भी उन्हीं के पक्ष में बोल रहा है। शुक्ला का मानना है कि आरोपी के घर पर बुलडोजर जल्दबाजी और दबाव में चल गया। उस दिन सारे मीडिया वाले बोल रहे थे कि बुलडोजर चलेगा या नहीं। मैं कह भी रहा था कि नियम-कायदे में होगा तो चलेगा। आखिरकार बुलडोजर चल गया। हालांकि अब जो भी होना था हो चुका है।

ब्राह्मण समाज को समझा लिया जाएगा, मैं अधिक वोट से जीतूंगा

बुलडोजर चलने के बाद सरकार और भाजपा के खिलाफ एक हुए ब्राह्मण समाज को लेकर केदार शुक्ला का कहना है कि मुझे पता है कि इस कार्रवाई से ब्राह्मण समाज में आक्रोश जरूर है, लेकिन स्थिति विस्फोटक नहीं है। मैं उनसे बात करके अपनी परिस्थिति समझाऊंगा तो मामला सुलझ जाएगा।

जिस तरह से ब्राह्मण समाज ने शुक्ला परिवार का साथ दिया है यह प्रशंसनीय है। मैं उन्हें साधुवाद देता हूं। रही बात उनकी ब्राह्मण समाज से उपजी नाराजगी कि तो उसके जो राजनीतिक परिणाम होंगे सो होंगे। मुझे यकीन है कि मैं इस बार के चुनाव में ज्यादा वोटों से जीतूंगा। मुझसे ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ेंगे।

केवल ब्राह्मणों के बल पर राजनीति नहीं कर सकता

विधायक केदारनाथ शुक्ला ने कहा कि सीधी में ब्राह्मण बनाम अदर्स की राजनीति होती रही है, लेकिन मैं एक ऐसा नेता हूं, जिसके साथ सभी जातियों और सभी वर्गों के लोग हैं। सीधी विधानसभा में ब्राह्मण बाहुल्य नहीं है। मुझे जितना वोट मिलता है उसका तिहाई-चौथाई भी ब्राह्मण नहीं है।

मैं वहां ब्राह्मण के बल पर राजनीति नहीं कर सकता। मेरे मतदाता आदिवासी समाज के लोग, अनुसूचित जाति के लोग, पिछड़े वर्ग के लोग और दूसरे भी हैं। मेरे साथ सभी वर्ग के लोग हैं, मैं सभी वर्गों की राजनीति करता हूं।

मीडिया वालों ने वीडियो दिखाया और कहा कि आपके क्षेत्र में ये कांड हो गया है

उस दिन मैं भोपाल में अपने जिले के प्रभारी मंत्री के साथ बैठा था। उस समय मीडिया के लोगों ने अचानक दनादन फोन करना शुरू किया। इसी बीच मुख्यमंत्री जी का भी फोन आया। मीडिया के साथियों ने ही मुझे वीडियो दिखाया कि आपके क्षेत्र में ऐसा हो गया है। जब मैं सीधी गया तो पता चला कि वीडियो तीन-साढे़ तीन साल पुराना है।

कुछ शरारती लोगों ने आपस की खेल-कूद में यह सब किया था, जिसे आज से जोड़कर वायरल कर दिया। अगर उसका डेट निकलवाएं तो पता चलेगा कि उस समय कांग्रेस गवर्नमेंट थी। ये घटना कांग्रेस सरकार के समय हुई, लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। जो घटना हुई है वह निंदनीय है वह चाहे कांग्रेस सरकार में हुई हो या भाजपा के समय।

आरोपी मेरा अधिकृत प्रतिनिधि नहीं, हो सकता है किसी बैठक में गया हो

मीडिया में प्रवेश शुक्ला को विद्युत वितरण कंपनी में विधायक केदारनाथ शुक्ला का प्रतिनिधि बताया गया था। इस सवाल पर विधायक शुक्ला ने कहा कि प्रवेश कभी उनका अधिकृत प्रतिनिधि नहीं था, लेकिन किसी बैठक में उनका प्रतिनिधि बनकर गया हो सकता है।

विधायक ने कहा कि मैं लंबे समय से राजनीति कर रहा हूं। 1985 से चुनाव लड़ रहा हूं। आठ चुनाव लड़ा हूं, चार चुनाव जीता, चार हारा। जब मैंने राजनीति शुरू की, अविभाजित सीधी-सिंगरौली जिले में भाजपा नहीं थी। मैंने वहां भाजपा का संगठन खड़ा किया। मुझसे लाखों लोग जुड़े हैं। लाखों लोग मुझसे प्रभावित भी हैं और विरोधी भी हैं।

वह भी ( प्रवेश शुक्ला) पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेता रहा है। प्रतिनिधि बनाने जैसी तो कोई बात नहीं थी। तकनीकी तौर पर देखें तो एक विधायक को जिला पंचायत, जनपद पंचायत और नगर पालिकाओं में ही प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार है। वह उनमें से कहीं मेरा प्रतिनिधि नहीं था। हो सकता है कि कभी किसी विभाग के कार्यक्रम में वह मेरे प्रतिनिधि के तौर पर भाग लिया हो, लेकिन वह अधिकृत प्रतिनिधि नहीं था।

भाजपा के जांच दल ने विधायक से बात ही नहीं की

सीधी पेशाब कांड की जांच के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने एक जांच दल बनाया है। इस जांच दल ने क्षेत्रीय विधायक केदारनाथ शुक्ला से कोई बात ही नहीं की है। इस पर विधायक शुक्ला ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष ने जांच दल बनाया है। मैं बस इतना जानता हूं कि जांच दल अपना काम कर रहा है। उनको जहां जाना है जाएं जो जांच करना है करें। मेरा सहयोग चाहिए तो पूरा सहयोग करूंगा। मेरी उनसे कोई बातचीत नहीं है।

सीधी विधानसभा का चुनावी समाज शास्त्र ऐसा

सीधी विधानसभा मध्य प्रदेश में ऐसी अनारक्षित सीट है, जहां सबसे अधिक आदिवासी वोटर हैं। पिछले चुनाव में यहां दो लाख 10 हजार से कुछ अधिक मतदाता थे। चुनाव में कुल एक लाख 34 हजार लोगों ने वोट डाले गए।

एक अनुमान है कि वहां आदिवासी मतदाताओं की संख्या 60 हजार से कुछ अधिक है। इसमें से 20 हजार कोल और 40 हजार गाेंड आदिवासी हैं। यहां पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या 40 हजार के आसपास है। इनसे ही थोड़ा कम-ज्यादा संख्या अनुसूचित जाति के मतदाताओं की है। ब्राह्मण समाज के मतदाताओं की संख्या 20 हजार के आसपास है। 15 हजार के करीब मतदाता क्षत्रिय समाज से हैं।

रियासत और जमींदारियों की वजह से ब्राह्मणों-ठाकुरों के पास बड़ी संपत्तियां हैं। इसकी वजह से यह वर्ग संख्या में कम होने के बावजूद पूरे क्षेत्र में सामाजिक-राजनीतिक रूप से प्रभावी है।

विंध्य के ताकतवर भाजपा नेताओं में शुमार हैं केदार

सीधी जिले के कोटहा गांव के निवासी केदारनाथ शुक्ला विंध्य क्षेत्र के ताकतवर भाजपा नेताओं में शुमार हैं। 9 सितम्बर 1954 को जन्मे शुक्ला ने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की। स्कूल-कॉलेज की राजनीति में सक्रिय रहे। फिर सीधी जिला एवं सत्र न्यायालय में वकालत शुरू की। वहां से भाजपा के तत्कालीन प्रभारी कुशाभाऊ ठाकरे उन्हें राजनीति में ले आए। 1985 में सीधी के गोपद-बनास विधानसभा सीट से उन्हें भाजपा का टिकट मिला। वह चुनाव वे कांग्रेस के कमलेश्वर प्रसाद द्विवेदी से हार गए।

1990 में भाजपा ने उनको टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। 1993 में शुक्ला फिर से चुनाव हार गए। इस बार उनके सामने अर्जुन सिंह के भाई कृष्ण कुमार सिंह थे। 1998 में केदारनाथ शुक्ला पहली बार गोपद-बनास से जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2003 में भाजपा ने उन्हें गोपद-बनास की जगह सीधी से चुनाव लड़ाया और शुक्ला यहां से हार गए। 2008 में पहली बार सीधी से उन्होंने जीत हासिल की। 2013 और 2018 के चुनाव में वे ठीक-ठाक अंतर से चुनाव जीते। शुक्ला मंत्री पद के भी दावेदार रहे हैं।

विधायक केदारनाथ शुक्ला से पहले भी जुड़े रहे हैं विवाद

  • अप्रैल 2022 में विधायक केदारनाथ शुक्ला के परिवार की शिकायत पर एक पत्रकार सहित रंगकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सीधी पुलिस ने पकड़ा था। थाने में उन लोगों के कपड़े उतरवा लिए गए और उसकी फोटो निकालकर वायरल कर दिया गया। दुनिया भर में मध्य प्रदेश की किरकिरी होने के बाद खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हस्तक्षेप करना पड़ा।
  • 2021 में सीधी के गोपद-बनास विकासखंड के हरबारो गांव निवासी एक आदिवासी गोंड परिवार ने शुक्ला पर उनकी जमीन हड़पने का आरोप लगाया। गोंड परिवार का कहना था, पारिवारिक बंटवारे के लिए वे लोग जब राजस्व रिकॉर्ड निकलवाने पहुंचे तो पता चला कि उनके दादा महकम सिंह के नाम दर्ज 17.41 एकड़ जमीन विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके भाई मार्कंडेय शुक्ला के नाम पर दर्ज हो चुकी है। राजस्व रिकॉर्ड में ये नाम 1972 में दर्ज बताए गए, लेकिन गाेंड परिवार का दावा था कि उनके परिवार से किसी ने वह जमीन कभी भी बेची नहीं। शुक्ला का कहना है कि वह उनकी पुस्तैनी जमीन है और इस मामले में राजस्व न्यायालय ने उनके हक में फैसला दिया है।
  • अक्टूबर 2019 में भाजपा विपक्ष में थी और झाबुआ विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में प्रत्याशी हार गया था। परिणाम आने के तुरंत बाद सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला ने भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को इस हार के लिए जिम्मेदार बता दिया। उनका कहना था, “झाबुआ में न तो भाजपा की हार हुई है और न कांग्रेस की जीत। चुनाव में प्रतिकूल परिणाम केवल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के अराजनीतिक कृत्यों के कारण आया है। केंद्रीय नेतृत्व को उन्हें जल्द से जल्द प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा देना चाहिए।’ इस बयान के बाद शुक्ला को नोटिस जारी हुआ था।
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