झाबुआ। छात्राओं के आरोपों पर विवाद: शपथ-पत्र में बताया जा रहा है निलंबित एसडीएम की बेगुनाही, छात्राओं का दावा- ‘गलत तरीके से छुआ’

आदिवासी नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ के मामले में झाबुआ के निलंबित एसडीएम सुनील कुमार झा 24 घंटे के भीतर ही जेल से बाहर आ गए। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी, होमगार्ड सैनिक और ड्राइवर के शपथ-पत्र के आधार पर झा को कोर्ट ने जमानत दे दी।

शपथ-पत्र में इन्होंने कहा कि ऐसा कुछ हुआ नहीं जैसा छात्राओं ने बताया। जबकि छात्राओं का कहना है कि निलंबित एसडीएम झा ने उनसे पीरियड कब आता है और कौन सा पैड इस्तेमाल करती हो, जैसे सवाल पूछने के साथ ही गलत तरीके से छुआ था। झा कह रहे हैं कि उन्होंने तो क्लास में लगने वाले पीरियड के बारे में पूछा था।

छात्राएं घटना के चार दिन बाद भी डरी-सहमी हैं। रिपोर्टर ने छात्राओं से अलग-अलग बात की और फिर वार्डन से अलग से चर्चा की तो वहीं तथ्य सामने आए जो एफआईआर में दर्ज हैं।

यह बात भी सामने आई कि जिन लोगों ने निलंबित एसडीएम झा के समर्थन में कोर्ट में शपथ पत्र दिए वे जहां घटना हुई उस कमरे में थे ही नहीं। बाहर खड़े थे।

सबसे पहले हॉस्टल के निरीक्षण के बैकग्राउंड को जानते हैं…

कलेक्टर ने आदेश दिए और जांच करने पहुंच गए एसडीएम

कलेक्टर तन्वी हुड्‌डा 8 जुलाई शनिवार को थांदला गई थीं। यहां उन्होंने एक सरकारी गर्ल्स हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्हें हॉस्टल के हालात खराब मिले। इसके बाद उन्होंने शनिवार शाम आधिकारिक वाट्सएप ग्रुप पर एक मैसेज भेजा। इसमें निर्देश था कि सभी एसडीएम अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के छात्रावासों की सुविधाओं की जांच करें और सोमवार को रिपोर्ट दें।

इस मैसेज को पाते ही एसडीएम सुनील कुमार झा ने शिक्षा विभाग के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) ज्ञानेंद्र ओझा को इसकी जानकारी दी। अगले दिन रविवार को करीब 3 बजे सुनील झा और ज्ञानेंद्र ओझा अपने गार्ड अमर सिंह के साथ तीन हॉस्टल का निरीक्षण करने के लिए निकले।

सबसे पहले उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय छात्रावास और ओबीसी लड़कियों के हॉस्टल का निरीक्षण किया। इसके बाद वे आदिवासी छात्राओं के हॉस्टल पहुंचे। ये वही हॉस्टल हैं जहां छेड़छाड़ वाली घटना हुई। ओबीसी और आदिवासी हॉस्टल इसके आसपास ही हैं।

सुनील झा और वार्डन निर्मला झरबड़े और एडीपीसी ज्ञानेंद्र ओझा पास के नवीन कन्या आश्रम पहुंचे जो 6वीं से 8वीं में पढ़ने वाली आदिवासी छात्राओं के लिए बनाया गया है। निर्मला जांच करने वाली इस टीम के साथ सबसे पहले ओबीसी हॉस्टल में गई थीं, क्योंकि उस हॉस्टल की वार्डन रविवार होने के कारण छुट्‌टी पर थी, उनका प्रभार आदिवासी हॉस्टल की वार्डन निर्मला झरबड़े के पास था।

हमें बाहर खड़ा रखा और लड़कियों के कमरों में अकेले गए थे एसडीएम

आदिवासी हॉस्टल की वार्डन निर्मला झरबड़े से बात की। उन्होंने बताया कि जब हम हॉस्टल पहुंचे तो सुनील झा सर अकेले हॉस्टल में गए। मुझे और ज्ञानेंद्र ओझा सर को प्रांगण में ही इंतजार करने को कहा। चूंकि वह एसडीएम हैं और निरीक्षण करने आए थे, ताे मैंने गर्ल्स हॉस्टल होने के बावजूद कोई आपत्ति नहीं ली और एसडीएम सर को अकेले जाने दिया।

एसडीएम सुनील झा सर कमरा नंबर 1 से 5 का निरीक्षण करने लगे। थोड़ी देर बाद वे बाहर निकले और मुझसे रजिस्टर लाने के लिए कहा और टॉयलेट का निरीक्षण करने के लिए जाने लगे। मैं लौटी और उन्हें रजिस्टर दे दिया। फिर एसडीएम ने मुझसे पूछा कि पलंग की संख्या के मुकाबले लड़कियां ज्यादा हैं। मैंने जवाब दिया कि पलंग हॉस्टल में ही रखे हैं, लेकिन कुछ लड़कियां बेड शेयर करके रहना चाहती हैं।

इसके बाद उन्होंने रजिस्टर में साफ लिखा कि व्यवस्था संतोषप्रद है। सात पलंग पर 10 बच्चियां तथा 8 पलंग पर 10 बच्चियां रहती हैं। वॉर्डन ने एसडीएम को बताया कि पलंग ऊपर रखे हैं। जरूरत पड़ी तो लगा लेंगे। साफ-सफाई अच्छी है। बाउंड्रीवॉल टूटी है जिसे बनाई जाना चाहिए।

लड़कियों ने बताया कि जो सर आए थे उन्होंने मेरी कमर पर हाथ डाला

निर्मला आगे बताती हैं कि जब एसडीएम निरीक्षण कर चले गए उसके बाद बच्चियां मेरे पास आईं। उन्होंने मुझसे पूछा ‘यह अंकल जो अभी आए थे वो कौन हैं?’ एक बच्ची ने मुझे बताया कि उन्होंने (सुनील झा) उसकी कमर पर हाथ रखा। एक और लड़की ने बताया कि सर उस से पूछ रहे थे कि तुम्हें आखिरी बार पीरियड कब आया था? तुम पैड कहां से लेती हो? उन्होंने मुझे गलत तरीके से छुआ भी।

ये सुनकर मैं सन्न रह गई, क्योंकि इन लड़कियों की उम्र 11-13 है। इनसे ऐसे सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए थे। इसके बाद मैंने तुरंत आदिवासी विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर नेहा मेहरा को संपर्क करने की कोशिश की। संडे होने के कारण उनसे बात नहीं हो पाई। अगले दिन कलेक्टर ऑफिस गई। मीटिंग चल रही थी इसलिए उनसे मेरी मुलाकात दोपहर तीन बजे हुई। जब मैंने उन्हें घटनाक्रम बताया तो वो चौंक गईं। फिर उन्होंने कलेक्टर तन्वी हुड्‌डा को ये मामला बताया और रात को तीन बजे मैंने एफआईआर लिखवाई।

इसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धाराओं 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया। अगले दिन पुलिस ने सुनील झा गिरफ्तार कर लिया।

वार्डन निर्मला झरबड़े से पूछा क्या आपकी सुनील झा से अनबन हुई थी? उन्होंने कहा, ‘नहीं। उन्होंने पलंग को लेकर मुझसे सवाल किया था। उसका उत्तर मैंने दे दिया था। उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड लिखा है कि उन्हें मेरा काम संतोषजनक लगा। ‘

छात्राएं बोलीं- बाल छूकर सर ने पूछा कौन सा तेल लगाती हो

आदिवासी कन्या आश्रम की लड़कियों से बात की। उन्होंने ठीक वैसा ही बताया जैसा एफआईआर में लिखा है। 13 वर्षीय छात्रा ने बताया कि सर (सुनील झा) मेरे कमरे में आए। उन्होंने हॉस्टल में व्यवस्थाओं के बारे में पूछा और फिर बेड पर बैठ गए। उन्होंने मुझे कंधे से पकड़ा। इतनी देर में दूसरी लड़की बाथरूम से नहाकर आई। उसके बाल गीले थे। उन्होंने उसके बाल टच किए और पूछा, ‘तुम कौन सा तेल लगाती हो?’ उसने जवाब दिया ‘आमला (आंवला) का। ‘

उसके बाद वह खड़े हुए। उन्होंने मेरे माथे को चूमा। बगल में एक लड़की और खड़ी थी। सर ने उससे पूछा, ‘क्या तुम्हें पीरियड होते हैं? क्या तुम स्टेफ्री (पैड) खरीदती हो? कौन से मार्केट से लेती हो?’ इसके बाद वह एक लड़की को बाहर ले गए। उन्होंने उस लड़की को टॉयलेट दिखाने के लिए कहा। उन्होंने उसे भी कसकर गले लगाया था। कमर पर हाथ भी रखा था।

एडीपीसी का पक्ष में बयान, हमने सबसे बाहर खड़े होकर बात की

पॉक्सो और एससी/ एसटी जैसी गंभीर धाराओं में जेल में बंद सुनील झा की रिहाई तीन लोगों के शपथ-पत्र देने कारण हुई है। एसडीएम के साथ निरीक्षण वाले दिन साथ रहे एडीपीसी ज्ञानेंद्र ओझा, ड्राइवर पंकज और होमगार्ड सैनिक अमरसिंह हुडवे ने कोर्ट को शपथ पत्र पर लिखकर दिया है कि सुनील झा के खिलाफ जो शिकायत दर्ज की गई है, वो झूठी है।

इसके बाद हमने एडीपीसी ज्ञानेंद्र ओझा से बात की तो उन्होंने बताया कि मैं उस दिन एसडीएम के साथ था। हमने हर लड़की से सबके सामने प्रांगण में बात की थी। सुनील जी ने लड़कियों से क्लास में लगने वाले पीरियड्स के बारे में पूछा था। इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। हमने ड्राइवर पंकज और होमगार्ड सैनिक अमरसिंह हुडवे से भी बात की, लेकिन उन्होंने कहा कि हमें जो भी बताना है कोर्ट को बताएंगे।

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