इंदौर के होलकर साइंस कॉलेज की लाइब्रेरी में 18 जुलाई की रात टीन शेड से फिसलने से इंजीनियर मनीष झरने की दर्दनाक मौत का VIDEO सामने आया है। सीसीटीवी फुटेज में यह हादसा कैद हुआ। दोनों तरफ से लग रहे शेड के बीच में एक हिस्सा गेप का था, वहीं ऊपर वे खड़े थे और फिसल गए। इससे वे सीधे पंखे और फिर टेबल पर टकराते हुए फर्श पर गिरे थे। यहां बारिश के चलते शेड बदलवा रहे थे। इंजीनियर के साथ मनीष इस काम के कांट्रेक्टर भी थे। वे इंस्पेक्शन के लिए गए थे। मजदूरों के साथ प्राचार्य सुरेश सिलावट जुपिटर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी।

मनीषके घर यहां हादसे की जानकारी के बाद लोगों की भीड़ लगी थी। परिवार के लोग सदमे में हैं। मनीष के दो बच्चे हैं। बेटा मनन 5 साल का और बेटी मानवी अभी 3 साल की है। मां और घर के लोगों को रोता देख दोनों बच्चे हैरान हैं। बच्चे मां से पापा के बारे पूछने रहे थे लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं था। पोस्टमॉर्टम के बाद शव जैसे ही घर पहुंचा चीख पुकार मच गई।
पिता ने जूते पॉलिश कर पढ़ाया, इंजीनियर बनाया
मृतक के पिता सुरेश झरने की जूते पॉलिश और रिपेयर करने की दुकान है। बेटे की मौत से बेहाल सुरेश झरने ने बताया कि बेटा शुरू से पढ़ने में काफी होशियार था। वह इंजीनियर बनना चाहता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगे कॉलेजों में पढ़ा पाना काफी मुश्किल था। बेटे का सपना पूरा करने के लिए दिन-रात जूते रिपेयर और पॉलिश का काम किया। सांवेर रोड स्थित वैष्णव कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई थी।
पीछे छोड़ गया गहरा दर्द
मृतक मनीष के मौसा हुकुम चंद्र सगोरे बताते हैं कि वह सिर्फ 31 साल का था, लेकिन अपने टैलेंट के दम पर काफी अच्छा काम कर रहा था। माता-पिता ने उसे पढ़ाने के लिए काफी परेशानी उठाई। लेकिन आज हम-सब इस हालत में पहुंच चुके हैं कि कुछ बोल नहीं पा रहे। दो मासूम बच्चे हैं जो ये भी नहीं जानते कि पिता ड्यूटी जाने के बाद अब कहां गए हैं। पूरे परिवार को जीवन भर का दर्द देकर चला गया।
कई लोगों की चली गई रोजी-रोटी
साथ में काम करने वाले राकेश और जितेंद्र पिपले बताते हैं कि अमावस की छुट्टी के कारण दो दिन से साइट पर काम बंद था। अचानक पता चला तो भागते-भागते एप्पल हॉस्पिटल पहुंचे। यहां कोई नहीं था, जानकारी मिली कि मनीष को जुपिटर हॉस्पिटल में भर्ती कराया है। लेकिन यहां पहुंचे तो उनकी डेथ हो चुकी थी। वे मजदूरों का सबसे पहले ख्याल रखते थे। हमें जब मन होता तब पैसा मांग लेते, उन्होंने कभी भी मना नहीं किया। अब उनके चले जाने से कई लोगों की रोजी-रोटी चली गई है।

कॉलेज प्रबंधन अपनी गाड़ी से लेकर पहुंचा अस्पताल
लाइब्रेरियन मनोज गोवरेले बताते हैं कि, घटना की जानकारी मिलते ही कॉलेज में हड़कंप मच गया। मजदूरों के साथ लाइब्रेरी के कर्मचारी मनीष को उठाकर बाहर लेकर आए। यहां से एम्बुलेंस को फोन लगाए और प्राचार्य को सूचना दी। एम्बुलेंस जब तक पहुंचती, इससे पहले अपनी निजी कार से जुपिटर अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन बचाया नहीं जा सका।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- देखते-देखते हुआ हादसा
होल्कर साइंस कॉलेज की जिस निर्माणाधीन लाइब्रेरी में यह घटना हुई है हम वहां भी पहुंचे। यहां लाइब्रेरी के कर्मचारी प्रमोद (प्रत्यक्षदर्शी) ने बताया कि शेड के ऊपर मनीष झरने काम का निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान लाइब्रेरी में नीचे सर-मैडम किताबें देख रहे थे। अचानक मनीष का पैर फिसला तो वो पंखे से टकराए। पंखे को पकड़ने की कोशिश की लेकिन पकड़ नहीं पाए और नीचे टेबल पर सिर के बल गिरे तो टेबल टूट गई। मुंह और नाक से काफी खून बह रहा था।
मौके पर पहुंचे थे प्राचार्य
सूचना के बाद मौके पर पहुंचे प्राचार्य सुरेश सिलावट ने बताया कि उसके सिर में गंभीर चोट आई थी। मनीष जिस निर्माणाधीन बिल्डिंग से गिरा था, वहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। इंजीनियर ने सुरक्षा हेलमेट भी नहीं पहनी थी। मामले में भंवरकुआं पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।