
इंदौर में बिजली कंपनी टोने टोटके की एक कहानी से चर्चा में है। वो भी किसी और के लिए नहीं, उनके सर्वोच्च अफसर यानी प्रबंधक निदेशक अमित तोमर के साथ..। टोटके करने का आरोप है उनके ही अधीनस्थ एक अतिरिक्त अधीक्षण यंत्री गजेंद्रकुमार पर। दरअसल, यह मामला तब चर्चा में आया जब CMD तोमर के ऑफिस ने यह जानकारी मीडिया में लीक कर दी कि उनके ऑफिस के कैबिन और बाथरूम में कथित रूप से सिंदूर लगे नींबू पड़े हैं। जब सीसीसीवी चेक कराए तो तोमर की गैरमौजूदगी में गजेंद्र कुमार कैबिन में आते-जाते दिखाई दिए थे। अब खबर है कि शोकाज नोटिस के बाद कुमार का ट्रांसफर आगर कर दिया गया है।
इस पूरे मामले में आरोपों से घिरे गजेंद्रकुमार से बातचीत की। वे बोले- मैं पढ़ा-लिखा इंजीनियर हूं, एम टेक हूं। कटा नींबू, टोने-टोटके में मैं विश्वास नहीं करता हूं। सब बकवास है। यदि ऐसा था तो मुझे बुलाकर चर्चा की जा सकती थी। मैं चला जाता, स्थिति स्पष्ट कर देता। न तो मेरी मंशा कभी गलत थी न है न रहेगी। मैंने मेरे जीवन में कभी ऐसा कोई काम नहीं किया कि मुझे ईश्वर के सामने खड़े होने में शर्म आए। बात दूसरी है।
मुझे नहीं पता कौन लोग इस तरह से प्रचारित कर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं : गजेंद्र कुमार
मैं सुबह 9.30 व पौने दस बजे के बीच में ऑफिस आया था। मुझे बताया गया कि साहब के रूम की लाइट चालू नहीं है। साहब के रूम के बाहर जो स्टाफ था, उससे मैंने कहा कि देखो लाइट चालू नहीं है क्या। उन्होंने फिर गेट खोला और कहा कि सर आप भी आ जाओ तो सामान्य तौर पर मैं गया। बटन दबाकर देखा तो लाइट चालू थी। सब कुछ ओके था तो फिर मैं आ गया। इसके अलावा कोई बात नहीं हुई। उनके कमरे की टेबल भी साफ नहीं थी तो मैंने कहा कि इसे साफ कर दो। बस और कुछ नहीं हुआ, लेकिन जिस तरह की बातें चल रही है वो मेरी समझ से परे है। मुश्किल से 1-2 मिनट उनके कैबिन में रुका। हम तीन लोग गए थे और बाहर निकल आए थे, इसके अलावा कुछ नहीं हुआ।
इसके बाद शाम को पता पड़ा कि मुझे नोटिस जारी किया जा रहा है कि मैं एमडी सर के रूम में अनधिकृत रूप से दाखिल हुआ हूं। अनधिकृत रूप से तो नहीं गया मैं, सामान्य घटना है। अधीक्षण यंत्री मेंटेनेंस हूं मैं। मुझे कहा गया कि लाइट चालू नहीं है, देख लीजिए तो मैं चला गया। इमसें ऐसी कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। सामान्य सी बात है।
मैं पढ़ा-लिखा इंजीनियर हूं कटा नींबू, टोने-टोटके में मैं विश्वास नहीं करता हूं। सब बकवास है। इन चीजों में मेरा विश्वास नहीं है और न ही मैंने इन चीजों को देखा है। इन चीजों से मेरा वास्ता ही नहीं है।
मैं पिछले 32 साल से इस विभाग में कार्यरत हूं। मेरे जीवन में कभी कोई ऐसी बात नहीं हुई। मुझे नहीं पता कि कौन लोग इस तरह से प्रचारित करके मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उसके पीछे उनकी मंशा क्या है। ऑफिस में सभी दूर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में इस तरह की बातें तो सोच से परे है, वैसे भी इस तरह की गतिविधि करना मेरे जैसे पढ़े-लिखे आदमी के लिए तो संभव ही नहीं है।
मुझे मौखिक रूप से पता चला है कि नोटिस देकर मुझसे सर के केबिन में प्रवेश के बारे में पूछा गया है। कटा नींबू या अन्य सामग्री कुछ भी जब्त नहीं हुई है। अगर ऐसा होता है उन चीजों को संज्ञान में लिया जाता।
अचानक पूछा गया कि अंदर क्यों गए थे, रिप्लाई तो मैं दूंगा
मैं सुबह उनके केबिन में गया था लेकिन दिनभर कोई चर्चा नहीं हुई। मेरे लिए भी ताज्जुब की बात है क्योंकि ऐसी कोई बात ही नहीं थी। अचानक से मुझसे पूछा गया है कि आप क्यों गए थे तो उसका रिप्लाई में करूंगा। कोई कहेगा की लाइट चालू नहीं है तो चेक किया और एक मिनट में बाहर आ गए। मुझे बुलाकर चर्चा की जा सकती थी। मैं चला जाता, स्थिति स्पष्ट कर देता।
न तो मेरी मंशा कभी गलत थी न है न रहेगी। इस तरह की बातें करना केवल गॉसिप टाइप का है। जिससे की निश्चित तौर पर मेरी छवि धूमिल होती है। जो कि अच्छी बात नहीं है। मैंने मेरे जीवन में कभी ऐसा कोई काम नहीं किया कि मुझे ईश्वर के सामने खड़े होने में शर्म आए।

अब पढ़िए नोटिस में क्या लिखा है
मुख्य महाप्रबंधक की तरफ से अधीक्षण यंत्री गजेंद्र कुमार को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है, जिसमें लिखा है कि आप 12 जून 2023 से अधीक्षण यंत्री के पद पर मेंटेनेंस संकाय, कार्पोरेट कार्यालय में पदस्थ हैं।
यह पाया गया है कि आपके द्वारा 24 जुलाई 2023 को सुबह 9.25 बजे बिना किसी कार्य से बगैर किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्राप्त किए अनावश्यक रूप से प्रबंध निदेशक के कक्ष में प्रवेश किया गया। आपके अनधिकृत प्रवेश को लेकर क्या मंशा थी, क्योंकि प्रबंध निदेशक के कक्ष में अत्यावश्यक नस्ती-दस्तावेज भी होते हैं। आपकी ऐसी क्या मंशा थी जो आपके द्वारा ऐसा कृत्य किया गया। आपका यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
आपके द्वारा मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन कर स्वयं को अनुशासनात्मक कार्यवाही का पात्र बनाया है। इस प्रकार निर्दिष्ट कर्तव्यों के विरुद्ध आचरण के लिए क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। अपना स्पष्टीकरण पत्र प्राप्ति के तत्काल बाद उचित माध्यम से अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। नियत समयावधि में स्पष्टीकरण प्राप्त न होने अथवा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषप्रद न होने की स्थिति में आपके विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही करते हुए उचित अनुशासनात्मक कार्यवाही अंतिम रूप से संपादित की जाएगी।

नींबू से होकर चर्चा इंदौर सिटी में ट्रांसफर-पोस्टिंग पर आई
वहीं दूसरी तरफ सूत्रों के मुताबिक मामला पद की लड़ाई से भी जुड़ा हुआ है। एक-डेढ़ महीने पहले एसी मेंटेनेंस गजेंद्र कुमार ने कंपनी में अधीक्षण यंत्री इंदौर सिटी बनाने की इच्छा जताई थी। भोपाल स्तर से फाइल आगे भी बढ़ी लेकिन हुआ कुछ नहीं। और आखिर में 12 जून को गजेंद्र कुमार को अधीक्षण यंत्री मेंटेनेंस बना दिया गया। फिलहाल अधीक्षण यंत्री इंदौर सिटी मनोज शर्मा और ग्रामीण ध्रुव नारायण शर्मा हैं। इनकी पारी लंबी बताई जा रही है और चुनावी साल में ये ट्रांसफर के दायरे में आ सकते हैं। नींबू-मिर्च के बीच ट्रांसफर पोस्टिंग का विवाद भी कंपनी स्टाफ में चर्चा में बना हुआ है।
मामले में CMD पहले ही बता चुके हैं कि उनके पास जो जानकारी प्राप्त हुई है, उसी आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।