आज ‘नए मध्य प्रदेश के पुरोधा’ को याद करने का दिन है… कौशल किशोर चतुर्वेदी

आज ‘नए मध्य प्रदेश के पुरोधा’ को याद करने का दिन है

मध्यप्रदेश की राजनीति के आकाश में सागर जिला हमेशा रवि बनकर चमका है। आज भी प्रदेश सरकार में तीन दिग्गज मंत्री मंत्रिमंडल में सागर जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। तो 1956 में गठित मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल भी सागर जिले से थे। रहली तहसील के गुड़ा गांव में पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म 2 अगस्त 1877 को हुआ था। सूखा राहत कार्य में निरीक्षण करने से अपने काम की शुरुआत कर पंडित रविशंकर शुक्ल अपनी ईमानदारी के दम पर नायब तहसीलदार बने, लेकिन नौकरी छोड़ राजनीति की डगर थाम ली। और फिर राजनीति की ऊंचाईयों को छूते हुए सागर जिले का नाम रोशन किया। आज इस महान शख्सियत को याद करने का दिन है।
पंडित रविशंकर शुक्ल के पिता का नाम पंडित जगन्नाथ शुक्ल और माता का नाम श्रीमती तुलसी देवी था। रवि शंकर जी ने 4 वर्ष की आयु में सागर के सुन्दरलाल पाठशाला में दाखिला लिया। ब्रिटिश राज में यह पाठशाला सेंट्रल प्रोविंस में स्थित छह शालाओ में से एक थी। इस ही पाठशाला से 8 वर्ष की आयु में शुक्ल ने प्राथमिक शिक्षा पूरी की थी। माध्यमिक शिक्षा के पूर्ण होने के बाद पंडित जगन्नाथ शुक्ल राजनांदगांव चले गये और अपने भाई पंडित गजाधर शुक्ल के साथ बंगाल नागपुर कॉटन मिल संचालन में सहभागी बने। कुछ वर्ष मिल चलाने के बाद वह रायपुर चले गये। इस दौरान रवि शंकर जी ने अपनी स्कूली शिक्षा रायपुर हाई स्कूल से पूर्ण कर ली। इंटर की परीक्षा आपने जबलपुर के रॉबर्टसन कॉलेज से उत्तीर्ण की। आपने स्नातक की पढ़ाई नागपुर के हिसलोप कॉलेज से पूर्ण की। नागपुर में पढ़ते हुए शुक्ल जी राष्ट्रीय आंदोलन के निकट आए। 1898 में संपन्न हुये कांग्रेस के 13वें अधिवेशन में भाग लेने आप अपने अध्यापक के साथ अमरावती गए थे। नागपुर से ही आपने विधि की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद रविशंकर सरायपाली में सूखा राहत कार्य का निरीक्षण का काम करने लगे। अपनी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के लिये शुक्ल जी को पदोन्नत कर नायब तहसीलदार बना दिया गया। पर सन् 1901 में आपने सरकारी नौकरी छोड़ कर जबलपुर के हितकारिणी स्कूल में अध्यापन कार्य शुरु किया। पंडित रविशंकर शुक्ल ने 1906 से रायपुर में वकालत प्रारंभ की। वे स्वतंत्रता आन्दोलनों में भी भाग लेते रहे। शिक्षा समाप्‍त करने के पश्‍चात् आप तीन वर्ष तक खैरागढ़ राज्‍य के हाई स्‍कूल में प्रधानाध्‍यापक तथा बस्‍तर कवर्धा एवं खैरागढ़ के राजकुमारों के शिक्षक रहे। सन 1926 से 1937 तक आप ‘रायपुर ज़िला बोर्ड’ के सदस्य रहे। 1936 में प्रांतीय धारा सभा के चुनाव में शुक्ल जी विजयी हुए और डॉ. खरे द्वारा त्यागपत्र देने के बाद अगस्त, 1938 से 10 नवम्बर, 1939 तक मुख्यमंत्री रहे। 27 अप्रैल 1946 से 14 अगस्त 1947 तक सीपी और बरार के प्रमुख रहे। 15 अगस्त 1947 से 31 अक्टूबर 1956 तक सीपी और बरार के प्रथम मुख्यमंत्री रहने का गौरव पंडित जी को मिला। वह दो बार मुख्यमंत्री बने थे। तब 1 नवम्बर 1956 को अस्तित्व में आए नए राज्य मध्यप्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी पंडित रविशंकर शुक्ल के हिस्से में आया। दो माह तक आपने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद को सुशोभित किया। अपने कार्यकाल के दौरान 31 दिसम्बर 1956 को पंडित जी का स्वर्गवास हो गया। पंडित रविशंकर शुक्ल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता और एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें नए ‘मध्य प्रदेश के पुरोधा’ के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, स्वदेशी खादी, राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया और असहयोग सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। 1923 में नागपुर में आयोजित झंडा सत्याग्रह में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था।
प्रारम्‍भ से ही आपको सार्वजनिक कार्यों के प्रति रूचि थी और सदा जनहित के कार्यों में महात्‍मा गांधी के नेतृत्‍व में असहयोग आंदोलन प्रारंभ होने पर आप अपनी अच्‍छी वकालत को छोड़कर राजनीति के क्षेत्र में क्रियात्‍मक रूप से उतरे थे और गिरफ्तार कर लिये गए। परन्‍तु बाद में आपको छोड़ने के लिये सरकार को बाध्‍य होना पडा। सन् 1930 में आपको तीन साल की सजा हुई और सन् 1932 में सजा के साथ-साथ आप पर पांच सौ रूपये जुर्माना हुआ तथा आपका नाम वकीलों की सूची से हटा दिया गया। परन्‍तु सन् 1935 में आपने फिर वकालत करने की आज्ञा प्राप्‍त कर ली थी।
मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल जी के सम्मान में विधान सभा सचिवालय द्वारा 1995-1996 से उत्कृष्ट मंत्री पुरस्कार स्थापित किया गया है।दिल्ली में स्थित भारत के संसद भवन परिसर में रविशंकर शुक्ल की प्रतिमा लगी थी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित विश्वविद्यालय का नाम पंडित रवि शंकर शुक्ल के नाम पर है। संघर्षों से पंडित रविशंकर शुक्ल का गहरा नाता रहा, लेकिन उन्होंने एक बार कदम आगे बढ़ाए तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। नए मध्यप्रदेश के इस पुरोधा को ‍शत शत नमन…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *