“बहना” ही लगाएंगीं विजय तिलक…कौशल किशोर चतुर्वेदी

“बहना” ही लगाएंगीं विजय तिलक…

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव अब एकतरफा महिला आबादी पर टिका नजर आ रहा है। अब यह बहना ही सत्ता की वैतरणी पार लगाएगी। और यह लाड़ली बहना ही आशीर्वाद देगी, तभी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में विजय के संकल्प की सिद्धि संभव हो पाएगी। क्योंकि विजय तिलक लगाने का काम 2023 में आधी आबादी ही करने वाली है। दरअसल मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के चेहरे आमने-सामने हैं। भाजपा के प्रखर वक्ताओं द्वारा मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जब-जब सरकार की उपलब्धियां गिनाई जाएंगी, तब-तब मोदी के साथ शिवराज का चेहरा ही सामने होगा। और जब बात कांग्रेस की होगी, तब मध्यप्रदेश में खेवनहार कोई और नहीं बल्कि कमलनाथ ही का चेहरा सामने आएगा। और वैसे तो आधी आबादी को लुभाने की खातिर ही चुनाव में नारी सम्मान योजना की गेंद कांग्रेस के पाले से फेंकी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज ने लाड़ली बहना का संग पाकर मानो जीत दिलाने वाला छक्का लगा दिया है।

ग्वालियर में 10 सितंबर 2023 को लाड़ली बहना योजना अंतर्गत चौथी किश्त का वितरण संपन्न हुआ था। तब शिवराज ने अपने मन की बात कहते हुए खुशी जताई कि मेरी सवा करोड़ लाड़ली बहनों का परिवार अब और भी बड़ा हो गया है। 21 से 23 साल की विवाहित बहनें एवं घर में ट्रैक्टर होने के कारण जो बहनें योजना का लाभ पाने से वंचित रह गई थीं, उन्‍हें भी जोड़कर अब यह परिवार लगभग 1.31 करोड़ बहनों का परिवार बन गया है। और फिर बहनों पर लाड़ बरसाते हुए शिवराज बोले कि हमने तय किया है कि आवास योजना में जिनके नाम छूट गए हैं उन बहनों से आवेदन अपने-अपने पंचायत में लेंगे और आवेदन लेकर उसकी जांच करके “लाड़ली बहना आवास योजना” के माध्यम से बहनों को पक्के घर बनाने का पैसा भी दिया जाएगा। आगे बोले कि हमने तय किया है कि जिन गरीब लाड़ली बहनाओं के बड़े-बड़े बिजली के बिल आए हैं, वो बहनें नहीं मैं भरवाऊँगा। गरीब बहनों के इस महीने तक के बिल हम ज़ीरो कर देंगे, अगले महीने से जिनकी 1 किलोवाट बिजली से कम खपत है उनके बिल केवल 100 रुपए आएंगे। लाड़ली बहनों को श्रावण मास की गैस रिफिल 450 रूपये में उपलब्ध कराने की स्वीकृति कैबिनेट ने दे दी है। मुख्यमंत्री चौहान की 27 अगस्त 2023 को की गई घोषणा के पालन में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनांतर्गत समस्त गैस कनेक्शनधारी महिलाओं और गैर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना अंतर्गत गैस कनेक्शनधारी लाड़ली बहनों को श्रावण मास (04.07.2023 से 31.08.2023) में गैस रिफिल 450 रूपये में उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया है। लाड़ली बहनों के नाम से जारी गैस कनेक्शन पर श्रावण मास में कराए गए रिफिल पर अनुदान देय होगा।

दरअसल बहनों का लाड़ जमीनी स्तर पर नजर आने लगा है। मध्यप्रदेश में दो करोड़ 62 लाख 49 हजार 578 महिला मतदाता हैं। इनमें से एक करोड़ 31 लाख महिला मतदाता लाड़ली बन गईं हैं। जिन्हें अलग-अलग तरह से लाभ पहुंचाने की समग्र योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस और कमलनाथ हैं, जिन्होंने नारी सम्मान योजना के जरिए इसी आधी आबादी को लुभाने की कोशिश की थी। पर सरकार बनने पर महिलाओं को 1500 रुपए प्रति माह की सम्मान राशि वाली नाथ की सोच को ठेंगा दिखाते हुए शिवराज ने महिलाओं को प्रति माह 3000 रुपए तक राशि वाली लाड़ली बहना योजना शुरू ही कर दी। और 1000 रुपए से शुरू कर महिलाओं के खाते में पहुंचने वाली यह राशि अब 1250 रुपए प्रति माह तक पहुंच भी चुकी है। ऐसे में इन बहनों का आशीर्वाद ही सत्ता का प्रसाद दिलाने की दम रखेगा। और यह तय है कि विजय तिलक बिना महिला आबादी के लग पाना संभव नहीं है। ऐसे में हर महीने की दस तारीख का मध्यप्रदेश में बढ़ता क्रेज शिवराज को फील गुड कराने के लिए काफी है…।

कौशल किशोर चतुर्थी

कौशल किशोर चौधरी मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पिछले ढाई दशक से सक्रिय हैं। दो कहानियाँ “सबसे बड़ा अचीवर युवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के द्वारा अपनी विशेष पहचान बनाई गई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलाइन स्टार” के कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन इंडिया न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्याह्न यात्री, ईटीवी मध्य-छत्तीसगढ़ में छात्र रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनीतिक एवं सरकारी साप्ताहिक समाचार पत्र, भास्कर में दैनिक समाचार पत्र में पत्रकार, लोकमत समाचार में ब्यूरो ब्यूरो प्रमुखों की देनदारी का दायरा बना हुआ है। नई दुनिया, नवभारत, चौथी दुनिया समेत अन्य पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम कर चुके हैं।

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