तुलसी नगर रहवासी संजय ठाकरे हत्याकांड:हाई कोर्ट ने खारिज किया जिला कोर्ट फैसला, नौ आरोपियों को बरी करने में जारी किए वारंट

इंदौर ही नहीं प्रदेश के चर्चित तुलसी नगर रहवासी संघ के अध्यक्ष संजय ठाकरे हत्याकांड में जिला कोर्ट द्वारा नौ आरोपियों को बरी करने के मामले में हाई कोर्ट ने ठाकरे परिवार और अभियोजन द्वारा की गई अपील एडमिट कर ली है। इसके साथ ही सभी नौ आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी कर उन्हें कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को होगी। इस केस में पुलिस के कमजोर इन्वेस्टिगेशन के कारण आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ था जिसके चलते वे बरी गए थे।

आरोपियों के नाम किशोर पटेल, कमलेश वर्मा, सोनू चौधरी, राहुल चौधरी, राजकुमार चौहान, कमल पटेल, वीरेंद्र चौधरी, विनय पाण्डे और राहुल मिशल हैं। इनमें सरपंच पति किशोर पटेल मुख्य आरोपी था। संजय ठाकरे तुलसी नगर रहवासी संघ के अध्यक्ष और क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे। आरोपी किशोर पटेल की पत्नी हेमलता तब सरपंच थी। तब उसके पति किशोर द्वारा तुलसी नगर व महालक्ष्मी नगर में कई अवैध निर्माण किए जा रहे थे। ठाकरे ने इस मामले में तब नगर निगम, प्रशासन, लोकायुक्त आदि को क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण को लेकर कई शिकायतें की थी। इस पर 1 अप्रैल 2011 की रात किशोर पटेल व उनके साथियों ने उनकी उस दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी जब वे कार से घर लौट रहे थे।

सरकार तक गूंजा था मामला, सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था

तब यह मामला भोपाल तक गूंजा था। इस केस में पुलिस ने दस आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इनमें से इन नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था जबकि एक आरोपी बलविंदर का पता ही नहीं चला था। चर्चित इस केस में तब हाई कोर्ट द्वारा आरोपी किशोर पटेल को जमानत देने के मामले में ठाकरे परिवार में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने उसकी जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से उसके सहित अन्य आरोपी जेल में ही थे। आरोपी किशोर पटेल ने तब 13 बार जमानत के लिए प्रयास किए थे।

नौ साल बाद हुआ फैसला

इस केस का फैसला नौ साल बाद 14 दिसम्बर 2020 में हुआ था। इसमें कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण उन्हें बरी कर दिया था। इसके बाद संजय ठाकरे के भाई विनोद ठाकरे ने अपने एडवोकेट मनोहरसिंह चौहान दे माध्यम से निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। दूसरी ओर अभियोजन की ओर से अपील की गई। एडवोकेटचौहान ने बताया कि हाई कोर्ट ने अपील एडमिट कर ली है। इसके साथ ही नौ आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं।

इन बिंदुओं को लेकर की थी अपील

– ठाकरे की हत्या के कुछ समय पहले उन्होंने उनके मोबाइल से अपने परिवार को सूचना दी गई थी कि किशोर पटेल व उसके साथी उनकी रैकी कर रहे थे। इस लेकर पुलिस ने कोर्ट में चालान में काल डिटेल्स पेश की लेकिन वह प्रमाणित नहीं थी।

– पुलिस ने जो जब्ती की थी वह भी अभियोजन ने साबित की। इसके साथ ही फोरेंसिक रिपोर्ट में भी सिद्ध हुआ कि गन शॉट इन्जुरी से ही उनकी मौत हुई है।

– इन मुद्दों को आधार बनाकर अपील की गई थी। इस पर हाई कोर्ट ने माना कि यह अपील सुनवाई योग्य है।

एक आरोपी 12 साल फरार

खास बात यह कि केस में एक आरोपी बलविंदर हत्याकांड के बाद से ही फरार है। 2020 में जब कोर्ट ने फैसला सुनाया तो उसमें जिक्र किया था कि पुलिस ने इतने सालों में उसे पकड़ने के लिए क्या प्रयास किए। इसके साथ ही उक्त आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर उसे उसे कोर्ट में पेश करने को कहा था। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि जिन जांचकर्ता पुलिस अधिकारियों ने केस में जो कमजोर इन्वेस्टिगेशन किया है, उनके खिलाफ विभाग जांच कर कार्रवाई करें। इस केस में जांचकर्ता तत्कालीन लसूडिया थाना टीआई विजयशंकर द्विवेदी थी जिनकी कुछ समय पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है।

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