प्रदेश में 16 नागरिक सहकारी बैंक डूबे, 65 हजार लोगों के 50 करोड़ रुपए फंसे

जमाकर्ताओं को कभी सरकार तो कभी न्यायालयों में गुहार लगाना पड़ रही है। गंभीर बीमारी और संकट में भी उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है। कई जमाकर्ता तो दुनिया से चले गए। कई के वारिस हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जिनके वारिस भी नहीं हैं। बैंकों के वीरान पड़े कार्यालयों में कुछ कर्मचारी हैं, लेकिन वे केवल इतनी वसूली कर लेते हैं, जिससे किसी तरह उनका वेतन निकल सके।

मामलों का जल्दी निपटान करने के लिए हर तीन-चार महीने में सहकारिता मुख्यालय पर समीक्षा बैठक होती है। इसमें सहकारिता और आरबीआई के अधिकारी रहते हैं। आला अफसरों के मंथन के बावजूद वसूली में तेजी नहीं आ रही है। कुछ परिसमापकों का कहना है कि वसूली के लिए तहसीलदारों के माध्यम से आरआरसी जारी कराई है, पर हकीकत यह है कि यह कवायद भी कागजी खानापूर्ति से आगे नहीं बढ़ रही है। इंदौर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की गाइडलाइन का पालन नहीं करने और घोटालों के कारण प्रदेश में 30 साल में 16 नागरिक सहकारी बैंक डूब चुके हैं। इन बैंकों में 65 हजार से अधिक जमाकर्ताओं के लगभग 50 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं। पड़ताल में सामने आया है कि इन 16 नागरिक सहकारी बैंकों के लगभग 9 हजार कर्जदारों से करीब 100 करोड़ रुपए की वसूली बाकी है।

जिन अफसरों के पास वसूली का अधिकार है, वे लापरवाह बने बैठे हैं। सहकारी बैंकों को चलाने वालों की नीति और नीयत में खोट के कारण ही मालवा-निमाड़ से लेकर महाकौशल और बुंदेलखंड में नागरिक सहकारी बैंक डूबते चले गए। इनमें इंदौर के महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक, मित्र मंडल सहकारी बैंक, सिटीजन अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और श्री को-ऑपरेटिव बैंक, रतलाम का नागरिक सहकारी बैंक, बुरहानपुर का सिटीजन को-ऑपरेटिव व सर्वोदय महिला सहकारी बैंक, खरगोन का महिला नागरिक और खंडवा का दीनदयाल नागरिक सहकारी बैंक शामिल हैं।

जबलपुर नागरिक सहकारी और संस्कारधानी महिला नागरिक सहकारी बैंक भी गर्त में चले गए। होशंगाबाद का सुविधा महिला, सागर, दमोह और दतिया के नागरिक सहकारी बैंक भी डूबने वाले बैंकों की जमात में शामिल हैं। ये सभी बैंक 2004 से लेकर 2009 के बीच डूबे और परिसमापन में आ गए। मंदसौर कमर्शियल को-ऑपरेटिव बैंक भी डूब चुका है और अब क्रेडिट सोसाइटी है।

परिसमापकों की जिम्मेदारी है कि वे बकायादारों से वसूली करके जमाकर्ताओं को उनका पैसा लौटाएं। परिसमापक को सिविल कोर्ट के अधिकार हैं। वे ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं तो निगरानी बढ़ाएंगे। – ब्रजेश शरण शुक्ल, अपर आयुक्त, सहकारिता, भोपाल मित्र मंडल सहकारी बैंक इंदौर सिटीजन अर्बन बैंक इंदौर श्री को-ऑपरेटिव बैंक इंदौर महाराष्ट्र ब्राह्मण बैंक इंदौर बुरहानपुर सिटीजन बैंक सर्वोदय महिला बैंक बुरहानपुर खंडवा दीनदयाल सहकारी बैंक सागर नागरिक सहकारी बैंक दतिया नागरिक सहकारी बैंक दमोह नागरिक सहकारी बैंक सुविधा महिला बैंक होशंगाबाद खरगोन महिला सहकारी बैंक जबलपुर नागरिक सहकारी बैंक रतलाम नागरिक सहकारी बैंक

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