दिवालिया हो चुके सहकारी बैंकों के संचालकों का बड़ा हाथ, खुद लोन लिए और नहीं चुकाए

दिवालिया हो चुके नागरिक सहकारी बैंकों को डुबोने में इनके संचालकों का बड़ा हाथ रहा है। इन्होंने प्रभाव का इस्तेमाल कर लाखों के लोन लिए और चुकाए ही नहीं। कोर्ट से वसूली के लिए गिरवी संपत्ति की कुर्की के आदेश भी दिए लेकिन वसूली अधिकारी प्रकरणों को दबाकर बैठ गए।

मित्र मंडल और महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक के ही करीब 900 बजावरी प्रकरण वसूली अधिकारी के पास हैं। इनमें 20 करोड़ 56 लाख रुपए की वसूली होना है। इसके लिए वसूली अधिकारी को इंदौर प्रीमियर को-ऑपरेटिव (आईपीसी) बैंक में अलग कार्यालय दिया गया है। खास बात यह है कि आईपीसी बैंक के भवन के नवीनीकरण के दौरान कई महत्वपूर्ण फाइलें ही गायब हो गईं।

मित्र मंडल सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष धीरज दुबे, पूर्व संचालक दिलीपसिंह सिकरवार, नंदकिशोर शर्मा, राधेश्याम गुप्ता, कृष्णपालसिंह सोनगरा, बाबूलाल नेमा, नीता गुप्ता, कन्हैयालाल बागड़ी ने कुल 13.15 लाख रुपए (ब्याज सहित 68.77 लाख) का लोन लिया। महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक में भी संचालकों ने कई आर्थिक अनियमितताएं कीं।

वर्ष 2006 में बैंक के सदस्य की शिकायत पर पूर्व अध्यक्ष यशवंत डबीर, तत्कालीन संचालक बसंत महस्कर और विकास पुंडलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और उन्हें जेल भी भेजा गया। तत्कालीन अध्यक्ष यशवंत डबीर और प्रबंधक चंद्रशेखर लोंढे ने संचालक मंडल की अनुमति के बिना वर्ष 2005 में अवैध तरीके से विशाल ट्रेडिंग कंपनी की लोन की सीमा बढ़ा दी। दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

सीधी बात: वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक डीपी खरिया का जवाब

आपको नियुक्त किया है। वसूली क्यों नहीं कर रहे?
– मैं छह महीने पहले ही वसूली अधिकारी बना हूं। पहले आनंद खत्री थे। उन्होंने मुझे अभी तक रिकाॅर्ड नहीं सौंपा है।

कई बजावरी प्रकरण लंबित हैं,?
– बजावरी प्रकरणों की कई फाइलें नहीं मिल रही हैं। आईपीसी बैंक के एक कमरे में फाइलें पड़ी हैं। बैंक के कर्मचारियों काे भी तलाशने के लिए कहा, लेकिन वे भी नहीं तलाश पाए।

फाइलों को तलाश कराने का काम तो आप भी कर सकते हैं।
– मेरे पास कोई फाइल आएगी तो कार्रवाई करूंगा। मैं अभी विधानसभा चुनाव की एसएसटी टीम में ड्यूटी पर हूं। इस बारे में बाद में बात करता हूं।

लोन लिया है, चाेरी नहीं की

बैंक की रिकवरी तो चल ही रही है। हमने लोन लिया है, कोई चोरी नहीं की। जैसे-जैसे पैसा आ रहा है, चुका रहे हैं। जिन्होंने करोड़ों के लोन ले रखे हैं, उनसे बात करना चाहिए। हम लोगों ने इतना बड़ा लोन नहीं लिया है।
– धीरज दुबे, पूर्व अध्यक्ष, मित्र मंडल सहकारी बैंक और बैंक के ऋणी

जबरन संचालक बना दिया

मुझे तो बैंक के बारे में कोई नाॅलेज नहीं था। नरेश जोशीजी ने संचालक बनवा दिया। मैंने 2002 में लोन लिया था। पैसे भरने को राजी हूं, लेकिन ब्याज सहित दुगुने से भी अधिक बना दिया है। ब्याज वृद्धि रोकी जाए।
– दिलीपसिंह सिकरवार, पूर्व संचालक मित्र मंडल सहकारी बैंक व ऋणी

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