इंदौर। जेल में कैदी के साथ बड़ा हादसा, बाथरुम में गिरने से बाल्टी का हैंडल गले में घुसा

 

बाल्टी पर गिरने के दौरान उसकी रॉड निकलकर व्यक्ति के गले के आरपार हो गई। रॉड गले के अंदर लैरिंग्स (कंठ वाली नली) के अंदर से चली गई थी।इसके बाद उसे एमवाय अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों की टीम ने तीन घंटे की जटिल सर्जरी के बाद उसे बाहर निकाला। पेशेंट अभी अस्पताल में एडमिट है तथा हालत अच्छी है।

घटना 30 अक्टूबर को इंदौर में हुई थी। उक्त 34 वर्षीय युवक को एमवाय अस्पताल लाया गया था। उस दौरान उसके गले में एक रॉड घुसी हुई थी, जो आरपार हो गई थी। जब ध्यान से उसे देखा तो पता चला कि वह बॉल्टी के हैंडल की रॉड है। इस पर तत्काल उसे ईएनटी डिपार्टमेंट में रेफर किया गया। वहां उसका एक्सरे और सीटी स्कैन किया, जिसमें पता चला कि रॉड लैरिंग्स में से होकर बाहर निकल गई है। इस दौरान लैरिंग्स फट गई थी। इसके चलते उसे सांस लेने में काफी तकलीफ भी हो रही है। ऐसे में उसका तुरंत ऑपरेशन प्लान किया गया। इसके पूर्व उसकी ब्लड संबंधी जरूरी जांच सहित अन्य जांच भी करा ली गई।

रॉड निकालने के बाद कंठ नली को रिपेयर किया गया चूंकि मामला नाक, कान व गला यूनिट, सर्जरी व एनेस्थिशिया विभाग से जुड़ा था, इसलिए तीनों यूनिट की टीमें तैयार कर रात 2 बजे सर्जरी शुरू की गई, जो तड़के 5 बजे तक चली। सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि इस सर्जरी में रॉड को सुरक्षित बाहर निकालकर लैरिंग्स को ठीक किया गया। इसके बाद उसे आईसीयू में लाया गया जहां उसकी हालत फिर बिगड़ने लगी। इस पर उसे सीधे सांस की नली से ऑक्सीजन दी गई, जबकि लैरिंग्स को टच नहीं किया, क्योंकि उसे कुछ देर पहले ही रिपेयर किया गया था।

रिकवरी के बाद अब डिस्चार्ज करने की तैयारी

मरीज को दो दिन आईसीयू में रखा गया और

हालत में सुधार होने पर वार्ड में रैफर किया गया। चूंकि आहार नली को कुछ खास नुकसान नहीं हुआ था इसलिए पहले उसे सेमी सॉलिड डाइट देना शुरू की। अब वह ठीक भोजन भी कर रहा है । एमवाय अस्पताल में गले में इस तरह रॉड घुसने का संभवत: पहला मामला है, जिसमें मरीज की जान बचा ली गई। सर्जरी करने वाली टीम में सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता, एनेस्थिशिया टीम से डॉ. किशोर अरोरा, डॉ. ऋतु पुराणिक, ईएनटी विभाग के डॉ. जगराम वर्मा शामिल थे।

8 इंच लम्बी और 4 मिमी चौडी रॉड

जिस व्यक्ति की सर्जरी हुई है उसका नाम दीपक पिता जगदीश है। वह जिला जेल इंदौर में एक हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा भुगत रहा है। जेल सुपरिटेंडेंट जवाहर मंडलोई ने बताया कि घटना वाली रात वह बाथरूम में गया था और संतुलन बिगड़ने से गिरा जिससे बाल्टी की रॉड उसके गले में जाकर घुस गई। डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी के बाद निकाली गई रॉड की लम्बाई 8 इंच और चौडाई 4 मिमी है। मरीज को तीन-चार दिनों बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

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