
कोरोना के कठिन दौर में सबसे सक्रिय सांसदों का सर्वे, इंदौर सांसद शंकर लालवानी देश के सबसे सक्रिय सांसदों में से एक, साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी ने किया रिसर्च
कोरोना के दौरान जब पूरे देश मे लॉकडाउन लगा था और लोग डरे हुए थे तब देश के सबसे सक्रिय सांसदों का एक सर्वे साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर धवल मेहता और उनकी टीम ने किया है। इस सर्वे के मुताबिक इंदौर के शंकर लालवानी देश के सबसे सक्रिय सांसद रहे हैं।
साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर धवल मेहता ने बताया कि कोरोना एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक आपदा है। ये एक ऐसी महामारी है जिसका अब तक कोई इलाज नहीं है। शुरुआत में देश के शहरी क्षेत्रों में कोरोना का प्रकोप ज़्यादा था इसलिए हमने तय किया कि शहरी क्षेत्र के लोकसभा सांसदों पर रिसर्च किया जाए।
15 मार्च से 20 जून 2020 तक हुए इस सर्वे में बिहार, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश के सांसदों को शामिल किया गया। सांसदों के लिए शुरुआत में किए गए कार्य, ली गई बैठकें, जन जागरण के लिए गए काम, संसदीय क्षेत्र में की गई पहल, सामाजिक मुद्दे तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय जैसे मानक तय किए गए।
इस स्टडी का पहला मानक था शुरुआत में किए गए कार्य यानी ऐसे सांसद जिनके पास महामारी के शुरुआती दौर में ही कुछ एक्शन प्लान तैयार था। ऐसे सांसदों में चंद्रपुर के सुरेश धनोरकर, इंदौर के शंकर लालवानी, नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के हंसराज हंस, सिरसा की सुनीता दुग्गल शामिल थी।
इस सर्वे का दूसरा मानक था ली गई बैठकें और जिसे तीन श्रेणियों में बांटा गया था। पहला, प्रशासन के साथ बैठक, दूसरा जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक और तीसरा स्थानीय अफसरों के साथ बैठक। प्रशासन के साथ बैठक कर रणनीति बनाने वाले सांसदों में करनाल के सांसद संजय भाटिया, इंदौर के शंकर लालवानी, नॉर्थ-ईस्ट मुंबई के मनोज कोटक, पुणे के साथ गिरीश बापट, रांची के संजय सेठ और रतलाम के गुमान सिंह डामोर प्रमुख थे।
जमीन पर उतरकर अफसरों के साथ मोर्चा संभालने वाले सांसदों में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, कुरुक्षेत्र के नायब सिंह, उज्जैन के अनिल फिरोजिया, खरगोन के गजेंद्र सिंह पटेल और ईस्ट दिल्ली के गौतम गंभीर प्रमुख रहे।
नागरिकों की परेशानियों और अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से समझने में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सिंह, इंदौर के शंकर लालवानी, पुणे के गिरिशचंद्र बापट, आणंद के मितेशभाई पटेल, पोरबंदर के रमेश भाई धाडुक, उज्जैन के अनिल फिरोजिया और करनाल के संजय भाटिया प्रमुख है।
इस दौरान एक अच्छी बात ये थी कि कई सांसदों ने ऑनलाइन मीटिंग्स की ताकि कोरोना से संबंधित सावधानियों का पालन हो सकें।
आम लोगों में कोरोना के विषय में जनजागरण लाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी और मुसीबत के समय आम लोग अपने नेता की तरफ ही देखते हैं। ऐसे में पोरबंदर के सांसद रमेश धाडुक, खजुराहो के सांसद विष्णुदत्त शर्मा, मेहसाणा की शारदाबेन पटेल, करनाल के संजय भाटिया, इंदौर के शंकर लालवानी, लातूर के सुधाकर शंगारे, गुना के कृष्ण पाल सिंह, कुरुश्रेष्ठ से नायाब सिंह उज्जैन से अनिल फिरोजिया और शहडोल से हिमाद्री सिंह ने जन जागरण में कोई कसर नहीं छोड़ी।
‘संसदीय क्षेत्र में की गई पहल’ के मानक को 3 कैटेगरी में बांटा गया जिसमें पहला है संसदीय क्षेत्र से जुड़े निर्णय दूसरा संसदीय क्षेत्र में दौरा और तीसरा अन्य पहल जो किसी सांसद द्वारा की गई। संसदीय क्षेत्र से जुड़े निर्णय जैसे कंट्रोल रूम की प्लानिंग, क्षेत्र में लॉकडाउन और अनलॉक से जुड़े निर्णय, ऑफिस खुलने से जुड़े हुए निर्णय, मजदूरों के पलायन से जुड़े निर्णय तथा स्कूल और कॉलेज से जुड़े निर्णय लेने में खरगोन के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, पुणे के सांसद गिरीश बापट, इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, नॉर्थ ईस्ट मुंबई से किशोर कोटक, लातूर से सुधाकर शंगारे और झुंझुनू से नरेंद्र कुमार प्रमुख रहे हैं। इन सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े अहम निर्णय प्राथमिकता के आधार पर लिए।
इसमें दूसरी कैटेगरी थी कोरोना के दौरान लगातार अपने संसदीय क्षेत्र में सक्रिय रहना जिसमें हॉस्पिटल का दौरा, क्षेत्र के अनलॉक और लॉकडाउन से जुड़े फैसलों के लिए निर्णय करना, एयरपोर्ट, कोविड-19 केयर सेंटर आदि का द्वारा करना शामिल था। इस केटेगरी में जलगांव के सांसद उन्मेष पाटील, पोरबंदर के सांसद रमेश भाई धाडुक, इंदौर के शंकर लालवानी, अमरावती की नवनीत कौर, सुरेंद्र नगर के महेंद्र मुंजपारा और बैतूल के दुर्गादास उइके ने सक्रियता के साथ काम किया।
अन्य गतिविधियों जैसे शहर के अधिकारियों से लगातार बात करना, कोरोना वॉरियर्स का सम्मान करना, स्वास्थ्य से जुड़े मामले देखना, करुणा की सैंपल इन करवाना और उसका बैकलॉग क्लियर करवाना और एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ईपास जैसी सुविधाएं शुरू करवाना एवं उनकी मॉनिटरिंग करना आदि शामिल था। इन गतिविधियों में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, आंबेडकर नगर के रितेश पांडे, खजुराहो से विष्णु दत्त शर्मा, कुरुक्षेत्र से नायब सिंह, गोरखपुर के रवि किशन, करनाल के संजय भाटिया, पुणे के गिरीश बापट, आनंद के मितेश पटेल, लातूर के सुधाकर शंगारे, अमरावती की नवनीत कौर, पोरबंदर के रमेश भाई धाडुक, अजमेर के भागीरथ चौधरी, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के हंस राज हंस और भरतपुर की रंजीता कोहली ने अपने क्षेत्र में लगातार सक्रियता दिखाई।
कोरोना के कठिन टाइम में कई सांसद अपने टि्वटर हैंडल पर लोगों की समस्याओं का समाधान करते, फ्रंटलाइन कोरोना योद्धाओं का ध्यान रखते दिखाई दिए। साथ ही कई सांसद दूसरी जगह से उनके संसदीय क्षेत्र में आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग और कोरोना टेस्ट का ध्यान रखते भी दिखाई दिए।
सामाजिक विषयों के मानक को भी तीन हिस्सों में बांटा गया जिसमें फूड डिस्ट्रीब्यूशन, प्रवासी मजदूरों की मदद, आर्थिक मदद और मेडिकल सहायता शामिल थी। दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी मजदूरों और गरीबों को खाना/अनाज बांटने, कम्युनिटी किचन सेटअप करने, शेल्टर होम्स की सुविधा शुरू करवाने में अंबेडकर नगर के सांसद रितेश पांडे, इंदौर के शंकर लालवानी, खजुराहो के विष्णु दत्त शर्मा, पोरबंदर के रमेश धाडुक, करनाल के संजय भाटिया, उज्जैन के अनिल फिरोजिया, नॉर्थ ईस्ट मुंबई के मनोज कोटक, पुणे के गिरीश बापट कुरुक्षेत्र के नायब सिंह, इस दिल्ली के गौतम गंभीर ने अपने अपने संसदीय क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया।
भौगोलिक स्थितियों के कारण कई संसदीय क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों की समस्या नहीं थी। प्रवासी मजदूरों की सक्रियता से मदद करने वालों में खजुराहो के विष्णुदत्त शर्मा, बिलासपुर के अरुण साव, करनाल के संजय भाटिया, इंदौर के शंकर लालवानी, शहडोल की हिमाद्रि सिंह और पोरबंदर के सांसद रमेश धाडुक प्रमुख थे।
समाज के वंचित वर्ग की आर्थिक मदद करने, रिलीफ फंड में सहायता देने और नए अस्पतालों की सुविधा देने में खजुराहों के सांसद विष्णुदत्त शर्मा, अजमेर के भगीरथ चौधरी, बिलासपुर के अरुण साव, खरगोन के गजेंद्र पटेल, भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा, इंदौर के शंकर लालवानी, झूंझनू के नरेंद्र कुमार, करनाल के संजय भाटिया और उज्जैन के अरुण फिरोदिया प्रमुख रहे।
लोगों को मास्क, सैनेटाइजर, पीपीई किट बांटने जैसी मेडिकल सुविधाओं में ईस्ट दिल्ली के गौतम गंभीर, लातूर के सुधाकर शंगारे, वैशाली की वीणा देवी, खरगोन के गजेंद्र पटेल, कुरुक्षेत्र के नायब सिंह और अमरावती की सांसद नवनीत कौर प्रमुख रहे।
महामारी के दौरान सभी सांसदों ने नागरिकों की मदद करने के लिए अभियान चलाए और कोविड का असर कम करने के लिए कदम उठाए। सांसदों ने सभी नागरिकों से समानता का व्यवहार किया और जमीन पर उतर कर जरुरतमंदों की मदद की।
केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रुप से समन्वय करने वाले सांसदों में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, कुरुक्षेत्र के नायब सिंह, जलगांव के भैयासाहेब पाटिल, मेहसाणा की शारदाबेन पटेल, पोरबंदर के रमेश धाडुक और शहडोल की सांसद हिमाद्रि सिंह प्रमुख रही।
कोरोना के दौरान सांसदों ने नागरिकों को कोरोना से बचाने और उनकी समस्याएं सुलझाने की बहुत कोशिश की। सांसद जमीन पर लगातार सक्रिय थे और विभीन्न मंत्रालयाें के संपर्क में रहकर मदद की कोशिश कर रहे थे। शहरों में लगातार कोरोना के केस आ रहे थे और लोगों की लापरवाही से मामले लगातार बढ़ रहे थे, ऐसे में सांसदों की भूमिका बेहद अहम रही।
कोविड-19 महामारी जंगल में लगी आग की तरह फैल रही है और इस पर काबू करना आसान नहीं है लेकिन भारत सरकार इसे रोकने के पूरे प्रयास कर रही है। ऐसे में कोई शक नहीं है कि सांसदों और दूसरे जनप्रतिनिधियों ने सरकार की मदद करने और नागरिकों को इस महामारी से बचाने के हरसंभव प्रयास किए हैं।
इस स्टडी का उद्देश्य ये पता लगाना था कि इस महामारी के समय सांसदों ने कैसे इसका सामना किया और लीडरशिप के पैमाने पर वे कितने खरे उतरे। इस सर्वे में सोशल मीडिया से संबंधित डाटा का उपयोग किया गया। प्रो.मेहता ने बताया कि अगर किसी क्षेत्र में मजदूरों का पलायन कम हुआ है या नहीं हुआ है तो उन क्षेत्रों के मुकाबले, जहां से होकर मजदूर गुजरे हैं, सांसदों की रैंकिंग में अंतर आ सकता है।