
चीन की सरकार से जुड़ी एक बड़ी डेटा कंपनी 10 हजार भारतीय लोगों और संगठनों की निगरानी कर रही है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका परिवार, कई कैबिनेट मंत्री और मुख्यमंत्री शामिल हैं। ज्यूडिशियरी, बिजनेस, स्पोर्ट्स, मीडिया, कल्चर एंड रिलीजन से लेकर तमाम क्षेत्रों के लोगों पर चीन की नजर है। यहां तक कि आपराधिक मामलों के आरोपियों की भी निगरानी की जा रही है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन में ये खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनी हाइब्रिड वॉरफेयर (Hybrid Warfare) और चीनी राष्ट्र के विस्तार के लिए बिग डेटा के इस्तेमाल में खुद को सबसे बेस्ट बताती है. झेनहुआ डेटा इंफोर्मेंशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड की तरफ से इन लोगों की रियल टाइम निगरानी हो रही है. निगरानी में इन लोगों से जुड़ी हर छोटी से छोटी जानकारी को शामिल किया जा रहा है. जिन लोगों की निगरानी की जा रही है, उनमें पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, पंजाब के सीएम कैप्टन अमिरंदर सिंह, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक का नाम भी शामिल है.
इन कैबिनेट मंत्रियों पर रखी जा रही है नजर
कुछ कैबिनेट मंत्रियों का रियल टाइम डेटा भी चीन की नजर में है. इनमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, रेल मंत्री व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का नाम भी शामिल है. वहीं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत से लेकर तीनों सेनाओं के कम से कम 15 पूर्व प्रमुखों का नाम भी इस लिस्ट में है.
जजों और उद्योगपतियों पर भी है चीन की नजर
यही नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक चीन की नजर न्यायपालिका पर भी है. भारत के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, उनके साथी जज एमएम खानविल्कर से लेकर लोकपाल जस्टिस पीसी घोष और नियंत्रक व महालेखा परीक्षक जीसी मुर्मू भी चीन के टारगेट लिस्ट में शामिल किए गए हैं. चीन ने इसके साथ ही कुछ जानेमाने उद्योगपतियों पर भी नजर रखी हुई है. इसमें अजय त्रेहन से लेकर रतन टाटा और गौतम अडानी जैसे इंडस्ट्रियलिस्ट का नाम है.
भ्रष्टाचार-आतंकवाद से जुड़े अभियुक्तों का भी लीक हो रहा डेटा
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की डेटा कंपनी राजनीतिक और सरकारी प्रतिष्ठानों के प्रभावी लोगों, ब्यूरोक्रेट्स, साइंटिस्ट, पत्रकार, शिक्षाविद,, एक्टर्स, एक्ट्रेस, कुछ खिलाड़ियों की भी निगरानी कर रही है. इतना ही नहीं, इस लिस्ट में क्रिमिनल और भ्रष्टाचार-आतंकवाद से जुड़े अभियुक्त भी शामिल हैं.
लिस्ट में मीडिया से किन लोगों का है नाम?
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी डेटा कंपनी की इस लिस्ट में भारतीय मीडिया से जुड़े द हिंदू के एडिटर इन चीफ एन. रवि, ज़ी न्यूज के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी, इंडिया टुडे ग्रुप के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई, पीएमओ में मीडिया सलाहकार संजय बारू और इंडियन एक्सप्रेस के मुख्य संपादक राज कमल झा का नाम शामिल है.
खिलाड़ियों और इन आर्टिस्ट की भी की जा रही है निगरानी
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी कंपनी ने खिलाड़ियों और कालाकारों को भी नहीं छोड़ा है. लिस्ट में खेल, संस्कृति और धर्म से जुड़े लोगों का नाम भी है. इसमें सचिन तेंदुलकर, फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल, क्लासिकल डांसर सोनल मानसिंह, पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार गुरुबचन सिंह, कई चर्चों के बिशप, पादरी, धर्मगुरु, राधे मां, निरंकारी मिशन के हरदेव सिंह का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है.
कैसे मिली चीन की इस नई चाल की जानकारी?
रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन एक्सप्रेस ने बिग डेटा टूल्स का इस्तेमाल करते हुए झेनहुआ के इस ऑपरेशंस से जुड़े मेटा डेटा की जांच की, जिसके बाद इस बात का खुलासा हुआ. जांच में बड़े पैमाने पर लॉग फाइल के डंप से भारतीय संस्थाओं से जुड़ी जानकारी निकाली गई. डेटा लीक करने वाली कंपनी ने इसे ओवरसीज की इंफोर्मेशन डेटाबेस का नाम दिया. इस डेटाबेस में एडवांस लैंग्वेज, टार्गेटिंग और क्लासिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल किया गया है. इसमें सैकड़ों एंट्रीज बिना किसी कारण के हैं. इसमें यूनाइटेड स्टेट्स, यूनाइटेड किंगडम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूएई की भी एंट्रीज हैं.
9 सितंबर से बंद है डेटा चुराने वाली कंपनी की वेबसाइट
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस की ओर से वेबसाइट www.china-revival.com में दिए गए ईमेल आईडी पर एक क्वॉयरी भेजी गई थी, जिसका कोई जवाब नहीं आया है. 9 सितंबर को ये कंपनी ने अपनी वेबसाइट पैसिव कर दी है. अब ये नहीं खुल रही. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में चीनी दूतावास के एक सूत्र ने कहा- ‘चीन ने कंपनियों या व्यक्तियों को चीनी सरकार के लिए बैकडोर या स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करके अन्य देशों के डेटा चुराने के लिए नहीं कहा है.’ हालांकि, सवाल ये है कि अगर चीनी सरकार ने ऐसा नहीं कहा तो चीनी सरकार ने ओकेआईडीबी डेटा का इस्तेमाल किस मकसद से किया?
चीन की इस चाल पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) के साइबर सिक्योरिटी, टेक और डेटा एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटर का कहना है कि हर देश अपने-अपने तरीके से फॉरिन विजिलेंस करता ही है. लेकिन, जिस तरह से चीन ने बिग डेटा साइंस और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है, उससे चीन ने फॉरिन विजिलेंस को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया है. पॉटर कहते हैं, ‘चीन जिन लोगों की जानकारी ले रहा है, उसकी रेंज दिखाती है कि वह अब हाइब्रिड वॉरफेयर के रणनीतिक मूल्यों को लेकर काफी गंभीर हैं. चीन के पास अमूल्य डेटा है, जिसका कई तरीकों से फायदा उठाया जा सकता है. बता दें कि पॉटर झेनहुआ डेटा सेंटर की इंफोर्मेशन को वेरिफाई करने में सोर्स के साथ काम कर चुके हैं.