
इंदौर में जेल प्रहरी के पद पर भर्ती होने वाले युवक के बारे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एमजी रोड पुलिस ने जांच में सभी आरोप सही पाए जाने के बाद रविवार को युवक के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था।
बताया जा रहा है कि आरोपी पूर्व में छिंदवाड़ा में 14वीं वाहिनी में नव आरक्षक के पद पर तैनाती के बाद बिना जानकारी के लापता हो गया था। इसके बाद आरोपी सिपाही को भगोड़ा घोषित कर कार्यमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद आरोपी को फिर से शासकीय नौकरी से हमेशा के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया था।
इसके बावजूद उसने जिला जेल में प्रहरी की एग्जाम दी और उसका सिलेक्शन भी हो गया। इस पूरे मामले में गोपनीय शिकायत होने पर जांच की गई थी। वर्तमान में आरोपी प्रहरी अशोक नगर की जिला जेल में पदस्थ है।
एमजी रोड पुलिस ने एक पत्र की जांच के बाद आदेश होने पर जिला जेल अशोक नगर में पदस्थ जेल प्रहरी विशाल पुत्र अशोक बुनकर के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि विशाल की पहले 14वीं वाहिनी विस बल में पोस्टिंग थी। उसे लंबे समय तक सूचना दिए बिना अवकाश पर रहने के बाद भगोड़ा घोषित कर नौकरी से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद उसने इंदौर से जेल प्रहरी के लिए एग्जाम दी और भर्ती हो गया।
जून 2019 में सरदारपुर में हुई थी पोस्टिंग 2019 में विशाल बुनकर का चयन जेल प्रहरी के पद पर हुआ था। उसकी पहली पोस्टिंग जून 2019 में धार के सरदारपुर में हुई थी। 30 जुलाई 2019 को उसने सरदारपुर में ज्वाइन किया। इसके बाद बाद अक्टूबर 2022 को उसका स्थानांतरण अशोक नगर कर दिया गया। तब से विशाल अशोक नगर में ही पदस्थ है।
चार साल पुलिस सेवा में रहने के बाद हुआ बर्खास्त
विशाल बुनकर अक्टूबर 2013 में पुलिस सेवा में भर्ती हुआ। इस दौरान उसे बेच नंबर 282 मिला। विशाल एक दिन अचानक छुट्टी पर गया और फिर वापस नहीं आया। काफी पत्राचार के बाद भी विशाल नौकरी पर वापस नहीं आया। इसके बाद उसे जुलाई 2016 में भगोड़ा घोषित कर बर्खास्त कर दिया गया।
गोपनीय शिकायत के बाद हुआ खुलासा
मामले में विशाल बुनकर को लेकर एक गोपनीय शिकायत जेल कार्यालय इंदौर को मिली। जिसमें शपथ पत्र, अनुप्रमाणन फार्म, चरित्र प्रमाण पत्र सत्यापन और शासकीय सेवा की जानकारी गलत देने व छिपाने की जानकारी दी गई। इसे लेकर 14वीं बटालियन के कमांडेंट को लेटर लिखकर 23 फरवरी 2023 को जानकारी मांगी गई। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि विशाल पहले विस बल में नव आरक्षक के पद पर पदस्थ था। इसके बाद उसे बर्खास्त किया गया। जेल प्रशासन ने गलत जानकारी देकर नौकरी हासिल करने को लेकर एमजी रोड पुलिस को लेटर सौंपा। जिसके बाद मामले में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।