भारत और चीन के बड़ते तनाव के बीच भारत ने चीन स्थित बैंक से कोरोना महामारी से लड़ने के लिए लिया क़र्ज़

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव जारी है। इसी तनाव के बीच केंद्र सरकार की तरफ से सदन को जानकारी दी गई है कि उसने चीन के मालिकाना हक वाले बैंक से दो लोन लिए हैं। ये लोन 9000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा के हैं और सरकार ने बीजिंग स्थित एशियन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर इनवेस्‍टमेंट बैंक (एआईआईबी) से यह कर्ज लिया है। बुधवार को वित्‍त राज्‍य मंत्री अनुराग ठाकुर की तरफ से सदन को बताया गया है कि कोरोना वायरस महामारी से जूझने के लिए सरकार ने यह कर्ज चीन से लिया है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘आप क्रोनोलॉजी समझिए। प्रधानमंत्री बोले कि कोई सीमा में नहीं घुसा। फिर चीन-स्थित बैंक से भारी क़र्ज़ा लिया। फिर रक्षामंत्री ने कहा चीन ने देश में अतिक्रमण किया। अब गृह राज्य मंत्री ने कहा अतिक्रमण नहीं हुआ।’ राहुल ने सवाल किया कि मोदी सरकार भारतीय सेना के साथ है या चीन के साथ?

103 देश हैं AIIB के सदस्य
दरअसल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत किए गए उपायों का समर्थन करने के लिए भारत सरकार ने एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के साथ 750 मिलियन डॉलर (करीब 5,521 करोड़ रुपये) के एक कर्ज समझौते पर हस्ताक्षए किए हैं। AIIB एक बहुपक्षीय विकास बैंक है जिसका उद्देश्य एशिया में सामाजिक और आर्थिक परिणामों को बेहतर बनाना है। इस समय AIIB के कुल 103 सदस्य देश हैं। वोटिंग पावर के लिहाज से चीन के पास बैंक की कुल 26.5% हिस्सेदारी है, वहीं भारत के पास 7.6% की हिस्सेदारी है। इसके अलावा पाकिस्तान के पास 1%, रूस के पास 5.9%, साऊदी अरब के पास 2.4%, यूएई के पास 1.2% और ऑस्ट्रेलिया के पास 3.4% की हिस्सेदारी है।

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