इंदौर। ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुआ रिफ्रेशमेंट व्यापारी, तमिलनाडु के रिटायर्ड डीजीपी का फोटो लगाकर किया फ्रॉड

ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले बदमाशों ने तमिलनाडु के रिटायर्ड डीजीपी का फोटो इस्तेमाल कर शहर के रिफ्रेशमेंट व्यापारी से धोखाधड़ी की। बदमाशों ने व्यापारी को फोन कर धमकाया कि तुम्हारे बेटे के दोस्तों ने एक लड़की का रेप किया। इसमें तुम्हारा बेटा भी शामिल है। हम उसे उठा लाए हैं और बुरी तरह तोड़ दिया। उसने रेप करना भी कबूल लिया है।

यदि बेटे का नाम बाहर करना है तो दिए गए नंबर पर 31 हजार रुपए ट्रांसफर कर दो। घबराया व्यापारी कुछ समझ पाता, तब तक फोन करने वालों ने एक बालक की पिटाई करने की आवाज भी सुनाई, जिसमें वह बालक व्यापारी को पिता के तौर पर बोल रहा है कि पापा- इन्हें रुपए डाल दो, ये बहुत मार रहे हैं।

बेटे से मिलती-जुलती आवाज सुन व्यापारी ने तुरंत पूछताछ किए बगैर बदमाशों को 27 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में बदमाशों ने क्राइम ब्रांच वाला बन उससे और रुपए मांगे तो व्यापारी ने परिचित से बदमाशों के अकाउंट नंबर व क्यूआर कोड पर रुपए ट्रांसफर करने के लिए कहा। जब परिचित ने बात की तो मामला संदिग्ध लगते ही उन्होंने पैसे ट्रांसफर करना बंद कर दिया। बाद में बेटे को फोन किया तो वह सकुशल दुकान पर बैठा मिला। मामले में साइबर क्राइम को शिकायत की गई।

डीजीपी की फेसबुक प्रोफाइल से डीपी कॉपी कर ठगी की

बदमाशों ने तमिलनाडु के रिटायर्ड डीजीपी की वर्दी वाली प्रोफाइल कॉपी करने के बाद उनका नंबर की डीपी में इस्तेमाल किया। शहर में कुछ साल पहले भी ऐसे ही एडिशनल एसपी रैक का अधिकारी बन बदमाशों ने कुछ पेट्रोल पंप संचालकों से ठगी की थी। यह राजस्थान से ऑपरेट होता था जो फिर सक्रिय हुआ है।

बदमाशों ने मुझे समझने का मौका नहीं दिया, बेटे की पिटाई की आवाज सुन घबरा गया था

घटना कनाड़िया रोड स्थित सूरज नगर निवासी राकेश शेंडगे (48) के साथ हुई। उन्होंने बताया रविवार रात 8 से 8.30 के दरमियान वह ग्रेटर कैलाश मार्ग स्थित रिफ्रेशमेंट शॉप पर थे। तभी अचानक उन्हें (मो. नंबर 6299760728) से कॉल आया। इस नंबर पर वर्दी पहने तमिलनाडु के रिटायर्ड डीजीपी आईपीएस के. विजय कुमार की फोटो दिख रही थी। यह देख मैं चौंक गया। फिर फोन करने वालों ने पुलिसिया अंदाज में धमकाया और बेटे को पीटने की आवाज सुनाने का ऐसा स्वांग रचा ताकि मुझे लगे बेटा पुलिस कस्टडी में है।

व्यापारी ने बताया बेटे की चीख-पुकार सुन वह घबरा गए। बेटे का नाम भी वे सन्नी ले रहे थे, इसलिए लगा बेटा परेशानी में है। उन्होंने कॉल करने वालों से कहा आप कहां हैं, बेटा कहां, मैं आकर बात करता हूं, लेकिन बदमाशों ने धमकाया इतना समय नहीं है। बेटे को जेल जाने से बचाना है तो तत्काल 31 हजार ट्रांसफर करो और फोन मत काटो। मैंने कहा इतनी राशि खाते में नहीं है तो फिर दूसरे अंजान नंबर से कॉल कर अकाउंट नंबर व क्यूआर कोड भेजे, जिस पर रुपए ट्रांसफर किए।

12 साल पहले रिटायर्ड हो चुके डीजीपी

बदमाशों ने जिस आईपीएस डीजीपी रैक अफसर की फेसबुक प्रोफाइल उपयोग की, वे 2012 में रिटायर्ड हो चुके। इन्हें वीरता के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक, विशिष्ट सेवा पदक, सराहनीय सेवा पदक मिला है और ये चंदन तस्कर वीरप्पन के खात्मे के लिए किए गए ऑपरेशन ‘कोकून’ का हिस्सा रहे हैं।

डर का फायदा उठाते हैं बदमाश

इस तरह के मामले अन्य शहरों में भी सामने आए हैं। अधिकांशतः राजस्थान के ठग ऐसा करते हैं। किसी भी अंजान नंबर से किसी प्रभावशाली व्यक्ति का कॉल आए तो सतर्क रहें। ऑन लाइन पैसा ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित थाने में जाकर पुलिस को जानकारी दें। डर, अज्ञानता का फायदा उठाकर बदमाश ऐसे लोगों को टारगेट करते हैं।

– जितेंद्र सिंह, एसपी स्टेट साइबर सेल, इंदौर

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