
‘मैं पार्क में झाड़ू लगा रही थी, तभी बेटियां भागती हुई आईं। कहने लगीं कि भय्यू को कुत्ते उठाकर ले गए। यह सुन मैं और पति दौड़े। 3-4 कुत्ते भय्यू को नोंच रहे थे। कुत्ते बेटे का एक हाथ खा गए। यह देख मैं बेहोश हो गई। मेरा बेटा मान-मिन्नतों से हुआ था। आंखें बंद करती हूं, तो वही दिखता है। कोई मेरा बेटा लौटा दे’…।
ये दर्द उस मां का है, जिसके सात महीने के मासूम बेटे केशव को कुत्तों ने शिकार बना लिया। जिससे उसकी मौत हो गई। घटना को 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बेटे की याद में मां रक्षा की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं। बात करते-करते वह रोने लगती है। परिजन उसे संभालते हैं, लेकिन दर्द सुनकर वे भी रोने लगते हैं। पिता देवेंद्र की हालत भी ऐसी ही है। 7 साल की शिवन्या और 3 साल की परी छोटे भाई को ढूंढती रहती है। छोटी बेटी तो भाई के साथ खेलने की जिद भी करती है, लेकिन भाई केशव कहीं दिखाई नहीं देता। आदमपुर छावनी पहुंचकर मां-पिता का दर्द जाना…।
मां के सामने बेटे को कुत्ते घसीट ले गए थे दिन था 10 जनवरी का । जगह थी मिनाल रेसीडेंसी क्षेत्र स्थित पार्क के पास। आदमपुर छावनी के देवेंद्र और उसकी पत्नी रक्षा साफ-सफाई का काम करते हैं। रोज की तरह वे बेटी शिवन्या, परी और बेटे केशव (भय्यू) को बाइक पर बैठाकर मिनाल रेसीडेंसी पहुंचे। दोपहर 1 बजे रक्षा सफाई कर रही थी। बच्चे पास में खेल रहे थे। 50-100 फीट की दूरी रही होगी। एक कुत्ता आया और केशव का हाथ को मुंह में दबोच कर खींचने लगा। बहन शिवन्या और परी कुछ समझ पाती, उससे पहले ही कुत्ता केशव को कुछ दूर ले गया।
सात माह के केशव के शरीर को कुत्तों ने नोंच दिया था। उसका हाथ कुत्ते खा गए थे।
मां रक्षा कहती हैं- बेटियां भागती हुई और और भय्यू को कुत्तों द्वारा नोंचने की बात कहने लगी। मैं, पति और आसपास लोग दौड़ पड़े। कुत्तों को भगाया और जब केशव को देखा तो वह लहूलुहान हालत में था। उसके धड़ से हाथ गायब था। मैं देखकर बेहोश हो गई। इसके बाद मुझे कुछ मालूम नहीं। जब होश आया तो घर पर थीं। परिजनों ने बताया कि भय्यू नहीं रहा।

केशव के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम करवाया गया था।
‘बच्चों के खातिर आए थे, नहीं मालूम था बेटा छिन जाएगा’ पिता देवेंद्र वाल्मिकी बताते हैं कि ‘मैं गुना जिले के पलासी गांव का रहने वाला हूं। 3 साल तक मंडीदीप रहा। डेढ़ साल पहले ही भोपाल में आकर बसा। मिनाल रेसीडेंसी इलाके में पत्नी के साथ काम करता हूं। आदमपुर छावनी में रिश्तेदार रहते हैं, इसलिए यहां किराए के मकान में रहने लगा। घर में कोई सदस्य नहीं है, इसलिए बेटा और बेटियों को रोज ले जाते थे। शाम को परिवार घर लौट आता था। बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए भोपाल में आए थे, लेकिन मालूम नहीं था कि बेटा छिन जाएगा।
जब तक पहुंचे, बेटे का दम निकल चुका था
देवेंद्र ने बताया कि तीन-चार कुत्ते बेटे को नोंच रहे थे। हम सब दौड़े और बेटे को देखा तो उसका दम निकल चुका था। सबसे पहले मोदी हॉस्पिटल में पहुंचे। फिर दूसरे अस्पताल ले गए। जहां बताया कि केशव नहीं रहा। यहां पर 7-8 महीने से काम कर रहे थे। पहले से कुत्ते हैं। अंदाजा नहीं था कि कुत्तों की वजह से हमारा जिगर का टुकड़ा हमसे दूर हो जाएगा।
इकलौता बेटा था केशव
देवेंद्र का कहना है कि मैं बयां नहीं कर सकता मेरे दिल पर क्या बीत रही है। कुछ समझ नहीं आ रहा। क्या हो रहा है, मैं क्या करूं। केशव मेरा सबसे छोटा और इकलौता बेटा था। वह हमारा बेहद चहेता था। दो बेटियों के बाद उसका जन्म हुआ तो हमारी खुशी का ठिकाना ना रहा। पत्नी बेटे की मौत के बाद से सदमे में है। मेरी तो दुनिया ही खत्म हो गई, क्या कहूं.. कुछ समझ नहीं आ रहा है।

शव को कब्र से बाहर निकालती पुलिस।
कब्र से निकलवाया था शव, पीएम के बाद फिर दफनाया
भोपाल में हुए इस हादसे के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी घटना पर दुख जताया था। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि इस तरह की घटना ना हो, इसके लिए प्रबंध किए जाएं। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज से सुझाव भी आमंत्रित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मृतक के परिजनों को चार लाख रुपए की सहायता राशि देने के निर्देश भी दिए थे। घटना के बाद पुलिस ने केशव का शव कब्र से निकवाया था और पोस्टमार्टम कराया था।
• घटना पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा कि यह घटना दिल दहला देने वाली है। इसमें अधिकारी ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि जवाबदार वे ही हैं, इसलिए संबंधित अधिकारियों को नोटिस दे रहे हैं।
• इधर, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निगम कमिश्नर फ्रैंक नोबल ए. के साथ कलेक्टोरेट में मीटिंग की थी। उन्होंने स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद निगम ने अभियान भी शुरू किया। वहीं, कार्रवाई में बाधा पहुंचाने वाले 7 पेट लवर्स पर केस भी दर्ज किए गए।
इसलिए बढ़ रहे हैं डॉग बाइट के मामले
गर्मी ही नहीं ठंड से भी अग्रेसिव होते हैं कुत्ते, क्योंकि इन्हें रात में बैठने के लिए उचित जगह नहीं मिल पाती।
• यह कुत्तों का प्रजनन काल होता है। फीमेल डॉग के साथ छोटे-छोटे बच्चे होते हैं, इनको लेकर वे असुरक्षित महसूस करती हैं और हमलावर हो जाती हैं।
“कुत्तों की आबादी में लगातार इजाफा हो रहा है, इस कारण कुत्तों को न तो भरपेट खाना मिल रहा है और न पानी इस कारण भी कुत्ते हमले कर रहे हैं।
भोपाल में बच्चों को शिकार बना रहे कुत्ते
राजधानी भोपाल में पिछले कुछ दिन से आवारा कुत्ते बच्चों को ज्यादा शिकार बना रहे हैं। 10 जनवरी को हुए मामले के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकारी संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अभियान चलाने की बात कहीं। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद शहर में डॉग बाइट के मामले कम नहीं हो रहे हैं।
भोपाल में सवा लाख से ज्यादा डॉग, हर रोज सिर्फ 30 नसबंदी
• 3-4 साल में राजधानी में कुत्तों के काटने की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं।
• हर साल एक से डेढ़ करोड़ रुपए नसबंदी पर खर्च। फिर भी संख्या बढ़ती जा रही है।
• सवा लाख से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स हैं। ठंड में डॉग्स आक्रामक होकर राहगीरों के पीछे दौड़ लगाते हैं।
• नगर निगम के पास नसबंदी के पर्याप्त इंतजाम नहीं। महापौर मालती राय कह चुकीं हैं कि एक दिन में 20-30 नसबंदी ही कर सकते हैं।