महाकाल की नगरी और वहाँ के मुख्यमंत्री की सोच का विषय

20 लाख से अधिक आबादी , व्यवस्था ना के बराबर

🔸सोमवार सुबह भस्मारती में आगजनी की घटना ने मंदिर के अलावा शहर में आकस्मिकचिकित्सा व्यवस्थाओं की भी पोल खोल कर रख दी,उज्जैन जिले की आबादी 20 लाख से अधिक है तथा शासकीय चिकित्सालय में बड़ी घटना के बाद चिकित्सा व्यवस्था का जिम्मा एकाएक बड़ जाता है

,,,आज इमरजेंसी के दौरान एक बार फिर यहां पर व्यवस्था चरमराई सी नजर आई तथा बर्न यूनिट मैं एक दर्जन घायल पहुंचे तो प्राथमिक उपचार देकर उन्हें इंदौर रेफर किया गया आखिर उज्जैन का यह जिला चिकित्सालय उज्जैन ही नहीं पूरे उज्जैन संभाग में सबसे बड़ा शासकीय अस्पताल है ,,,

🔸🔥देखा जाए तो पूरे उज्जैन संभाग में बड़ी घटनाओं के बाद यहां पर उपचार के लिए घायलों को भेजा जाता है परंतु अब यह शहर सिर्फ धार्मिक नगरी तक ही सीमित नहीं सीएम का गृह नगर भी है ऐसे में उज्जैन में शासकीय स्तर पर आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्थाओं की स्थिति निर्मित होने पर शासकीय अस्पतालों में अत्यधिक बर्न यूनिट से लेकर दुर्घटना के दौरान कई बार बस भर कर घायल पहुंचते हैं तो आधे से ज्यादा को इंदौर रेफर कर देते हैं आखिर उज्जैन में अत्याधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की ओर ध्यान कब दिया जाएगा,, इंदौर पर निर्भरता कब तक रहेगी,,क्योंकि इंदौर के शासकीय अस्पतालों में पहले से लोड अधिक है वहां भी संभागीय स्तर पर अस्पताल है और इंदौर बड़ा संभाग है जनसंख्या के हिसाब सेभीअस्पतालो

मैं अधिक लोड रहता है,ऐसे मेंउज्जैन तथा संभाग से घायलों को भी इंदौर के शासकीय अस्पतालों में भेज दिया जाता है आज की घटना में अरविंदो अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर में महाकाल मंदिर में हुए हादसे में घायलों को रेफर किया गया हमारे यहां भी मेडिकल रिसर्च सेंटर है तथा व्यवस्था ट्रस्ट देखा है परंतु शासन स्तर पर भी उज्जैन शहर में संभागीय दर्जा होने के चलते चिकित्साव्यवस्था इमरजेंसी के दौरान हर स्थिति में निपटने के लिए होनी चाहिए, ताकि रेफर की जरूरत ही ना आन पढ़ें,,, चिकित्सा व्यवस्था प्राथमिकता से ध्यान देने का विषय है उज्जैन में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का आए दिन पहुंचाना होता रहता है व्यवस्थाएं दुरुस्त होनी चाहिए आज भी हादसा हुआ तो देश के गृहमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने फोन किया देश भर में आज यह घटना चर्चा का विषय रही,,,

🔸रहा सवाल महाकाल मंदिर में आगजनी की घटना का तो प्राथमिक तौर पर इतना तो स्पष्ट है कि केमिकल युक्त गुलाल वह भी क्विंटलों की मात्रा में आरती के दौरान मशीनों तथा मूठ्ठे भर-भर कर गर्भगृह और श्रद्धालुओं पर उड़ाया गया स्थिति यह थी कि गुलाल का गुब्बार गर्भ ग्रह से लेकर नंदीहाल गणेश मंडपम तक पूरी तरह से फैल चुका था,पास में बैठा हुआ आदमी तक एक दूसरे को नजर नहीं आ रहा था क्योंकि यह इलाके एयर कंडीशनर व्यवस्था में है जिसके चलते बाहर से हवा आना-जाना भी ठीक से बंद है जिसके चलते और घुटन सी भी गुलाल के दौरान महसूस होने लगी थी कुल मिलाकर धार्मिक रीति रिवाज और परंपराओं तक देवालय में व्यवस्था सीमित रहे तब तक ही उचित है उसे आधुनिकता और भव्यता का रूप देने में कई बार खामियाजा भी भुगतना होता है,,

बाबा महाकाल नाराज है अब तो सुधारो पंडितों

निरंजन वर्मा

यह महाकाल का ही प्रकोप था…  और किसी का हो भी नहीं सकता…. पूजा के दौरान गुलाल के आग पकड़ने की घटना ने सबको अचंभित कर दिया .कई पुजारी इसमें घायल है और कई गंभीर  भी .. दुःखद है …

अब जब यह घटना हो गई है तो उसके पीछे के कारण पर भी चर्चा कर लेना चाहिए ….कुछ कारण तो वह है जो सामने दिख रहे हैं और कुछ कारण वह है जो दिख नहीं रहे हैं… जिन पर बात करना लोगों को अंधविश्वास लगेगा …कुछ हसेंगे …लेकिन आप कुछ सोचिए ना जो बाबा महाकाल  जो दुनियाभर के भक्तो के संकट हर लेता है उसी के दरबार में अगर संकट आ रहा है मतलब वो नाराज़ हैं । हो क्यो भी ना ….महाकाल मंदिर का व्यवसायीकरण इस कदर हो चुका है कि आम भक्त भगवान से दूर  हो गए है और पैसे वाले भगवान से सीधे मिल रहे हैं ….मिलाने वाले पुजारी हैं लेकिन शायद बाबा महाकाल को भी पुजारी की यह दुकानदारी पसंद नहीं आई ….उन्होंने इशारा किया है…. इशारा छोटा है लेकिन इस छोटे से इशारे में ही कईयो की जान पर बन आई है… …  दर्शन करने आने वाले व्यक्तियों को भक्तों को कई किलोमीटर बेवजह घुमाया जाता है .. ना बुजुर्ग देखते हैं ना विकलांग देखते हैं ….. हा पंडित  की जेब गर्म कर दो तो   आम आदमी के लाइन से वी आई पी लाइन  में पहुँच जाओ …  थोड़ा और माल देकर नन्दी गृह और खास दक्षिणा के बाद गर्भ गहुचाने की व्यवस्था भी इनके  हाथो में ही होती हैं …… वैसे भी उनके लिए तो पैसा ही भगवान हो चुका हैं … महाकाल तो सिर्फ एक माध्यम है … भगवान से सीधे मिलाने के  इस धंधे में प्रशासन भी बराबर का हिस्सेदार हैं …   जिसने बाबा महाकाल को भगवान से  ब्रांड बनाकर  वसूली शुरू कर दी .. ऒर आम भक्तो को बाबा से दूर कर दिया ..  ये उन भक्तो की ही हाय है जो आते तो दर्शनों के लिए है पर बाबा के सामने ही उन्हें गाली दी जाती है… अपमानित किया जाता है …ऐसे कई वीडियो भी खूब वायरल हो   चुके हैं…..

वैसे इससे ज्यादा भीड़ वैष्णो देवी मंदिर में होती है… लेकिन वहां का टोकन सिस्टम ऐसा है कि लोगों को आधे घंटे से ज्यादा लाइन में नहीं लगना  पड़ता.. सिस्टम तो यहां भी बन सकता है लेकिन दुकानदारी बंद होने का जो खतरा है…  यह सिर्फ एक छोटा सा इशारा है…  अब सुधरे  तो ठीक वरना वो  बाबा महाकाल है अपना हिसाब खुद कर लेगा…

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