
प्रेस विज्ञप्ति
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, इंदौर
दुनिया भर में आतंक फैलाने वाली इस महामारी ने दुनिया समेत आपके प्रिय शहर इंदौर के नागरिकों को भी ऐसा जकड़ा है कि प्रशासन, वैज्ञानिक, चिकित्सक और अन्य सभी रोग नियंत्रक एजेंसियां भी असहाय ही दिख रही हैं. जहां रोगियों को उपचार हेतु अस्पतालों में बिस्तर उपलब्ध नहीं है ऑक्सीजन के प्रदाय में कमी आ रही है वहां अन्य संसाधनों का भी दम फूलने लगा है. ऐसे में ही कोविड-19 से ग्रसित होकर दिवंगत हुए रोगियों के शरीर संबंधी दुर्घटना हुई हैं जो न केवल सामाजिक रुप से दुखद है बल्कि हमारे संसाधनों की कमी की ओर भी इंगित करती हैं. जहां कोविड काल में 24 घंटे चिकित्सकों पैरामेडिकल स्टाफ, विभिन्न निजी और शासकीय चिकित्सालय में सैनिकों की भांति रोगियों को बचाने में प्रयासरत हैं वहीं वे स्वयं भी कोरोना से लोहा लेते हुए पीड़ित हो रहे हैं और तो और डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ कोरोना से ग्रसित होकर मृत्यु का वरण भी कर रहे हैं. भारत में अब तक 556 चिकित्सक और 1312 पैरामेडिकल स्टाफ कोरोना से लड़ाई हार कर जीवन होम कर चुके हैं. ऐसी स्थिति में डॉक्टर नर्स व अन्य सपोर्ट स्टाफ को निरंतर प्रेरित कर महासंग्राम में खड़े बनाए रखने में भी अत्यंत जटिलता प्रस्तुत हो रही है.
क्या ये समाज डॉक्टर्स को देखने का अपना नजरिया बदलेगा !
क्या ये देख पाएंगे कि असल मे गुनाह और गुनाहगार कौन है !
क्या वो अपना फैसला तथ्यों और असली मुजरिमों को जानने के बाद कर पाएंगे।
क्या हमेशा आरोप लगाने वाले भी वो , जज भी वो ही , सजा देने वाले भी वो ही रहेंगे !
कभी उनका पक्ष भी सही तरीके से समझा भी जाएगा या नही। या हमेशा मूक जानवर( डॉक्टर) की तरह अपनी बलि चड़वाता रहेगा !
एक डॉक्टर से हमेशा ये उम्मीद कर के उसको ही सजा क्यों दी जाती है कि वो clinical , adminstration, management, ethics , clerical work का जिम्मेदार वो अकेला ही क्यों रहता है जबकि उसको अपना समाजीक जीवन के साथ अपना परिवार भी एक आम आदमी की तरह ही जिम्मेदारी निभानी होती है। वो खुद भी एक आम इंसान है जिसकी अपनी limitations है!
जब रात को एक कोविद मरीज की पूरी care करने के बावजूद मोत होने पर family मेंबर्स को declare, inform और बॉडी handover कर दी गयी थी तो वो बॉडी को एडमिनिस्ट्रेशन के नियमों के अनुसार उचित व्यवस्थाु करे! सुबह 12 बजे तक डॉक्टर क्या dead बॉडी को देखे या जो जीवित मरीज है उनके इलाज मे अपनी शक्ति लगाए!
क्यों क्यों क्यों …..
हमारा सिस्टम क्या ये बताने का कष्ट करेगा कि डॉक्टर पर तो आपने अधूरा सच जाने बिना Enquiry बिठा दी एक व्यक्ति के कहने पर, मगर क्या डॉक्टर के निर्दोष साबित होने पर ,झूठे फरियादी को समाज मे बदनाम करने और चिकित्सक के परिवार को मानसिक यंत्रणा के नाम पर कुछ सजा सुनाई जाएगी या नही।
चिकित्सक और उसका परिवार निर्दोष होने के बावजूद आजीवन
Post traumatic stress disorder के मरीज बने रहे
मरीज के सेकंड लेवल के रिश्तेदार शुरू से ही गलत इरादों के साथ आते हैं । तभी मरीज को बीमारी के अंतिम छोर पर ले जाकर अस्पताल में पटक देते है । फोटोग्राफी , बात करने के पहले से decide करना भी उनके गलत इरादों को दर्शाता है !
हमारा प्रशासन से निवेदन है की –
हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले हर Corona मरीज़ के साथ परिवार के एक सदस्य को साथ में आवश्यक कर देना चाहिए जो 24 घण्टे PPE किट पहन कर साथ रहे और अपना और मरीज़ का भर्ती से लेकर डिस्चार्ज (या …) तक ध्यान रखें।
हॉस्पिटल में स्टाफ की कमी है और डॉक्टर्स व नर्सेस किन हालात में काम करते है इसका भी अंदाजा हो जायेगा।
मरीजों को दवाइयां और खाना भी समय पर मिल जायेगा, साफ सफाई भी हो जायेगी, कोई लापरवाही भी नहीं होगी !!!
इंडियन मेडिकल एसोशिएशन् द्वारा कुछ सुझाव प्रस्तुत है
1.शरीर की समुचित सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा एक केंद्रीय स्तर पर मोर्चरी स्थापित की जा सकती है
2.अंतिम संस्कार करने हेतु नगर निगम की सहायता से शव वाहन द्वारा शव दाह ग्रह या कब्रगाह में शव को तुरंत स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां शव को संरक्षित रखा जा सकता है
3. अस्पतालों में ही रोगी उपचार हेतु बिस्तर उपलब्ध नहीं है तो मृत शरीर को अनिवार्य कार्यवाही पश्चात परिजनों को सौंप दिया जाए ताकि शुभ मुहूर्त/ रात्रि वर्जना/ परिजन विदेश से आ जाएं जैसी परिस्थितियों से चिकित्सालय को मुक्त रखा जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो
चिकित्सकों ने इस कोरोना काल में रोगियों के उपचार में अपना सर्वस्व लगाया है और हजारों की संख्या में रोगी स्वास्थ्य लाभ कर घर भी लौटे हैं. चिकित्सकों या चिकित्सालय के प्रशासन को भी पूरी तरह से हर कमी के लिए दोषी ठहराना उचित नहीं है, जब सरकारें स्वयं इस रावण रूपी महामारी के समक्ष घुटनों पर आ गई हैं.
नागरिकों से अपील की जाती है कि वह अपनी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए
घर पर ही रहें
मास्क का अनिवार्य प्रयोग करें
साबुन पानी से हाथ मुंह धोने के अलावा स्नान करते रहें
… ताकि चिकित्सक के पास या चिकित्सालय जाने की जरूरत ही ना पड़े और हम विकट परिस्थितियों से बचे रहें इस दुरूह काल में…
डॉ सतीश जोशी
अध्यक्ष
डॉ.साधना सोडानी
सचिव
डॉ संजय लोढ़े
उपाध्यक्ष M P