
अमेरिका के टेक्सास (Texas) प्रांत के दक्षिणपूर्व हिस्से में वॉटर सप्लाई के दौरान अमीबा (brain-eating amoeba) पाए जाने के बाद आठ शहरों के निवासियों को अलर्ट कर दिया गया है. यह अमीबा ब्रेन यानी दिमाग खाने वाला है. टेक्सास प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सभी संभल कर रहें अन्यथा यह तबाही ला सकता है. टेक्सास कमीशन ने पर्यावरण गुणवत्ता के आधार पर वॉटर एडवाइजरी जारी कर यहां के निवासियों को आगाह किया है कि पानी की आपूर्ति में नाइगेलेरिया फाउलेरी यानी दिमाग खाने वाला अमीबा मौजूद है, इसलिए इसका इस्तेमाल तत्काल बंद कर दें.
इस अमीबा का नाम नेगलेरिया फाउलरली (Naegleria fowleri) बताया जा रहा है। यह इंसान के दिमाग को खा जाता है। शुक्रवार शाम को इसे पानी के अंदर पाया गया। आयोग ने कहा कि वह इस समस्या के जल्द से जल्द समाधान के लिए प्रयास कर रहा है। अमेरिका के बीमारी रोकथाम केंद्र के मुताबिक यह दिमाग को खाने वाला जीवाणु आमतौर पर मिट्टी, गर्म झील, नदियों और गर्म जलधाराओं में पाया जाता है।
6 साल के बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया
केंद्र ने बताया कि यह जीवाणु ठीक से रखरखाव नहीं किए जाने वाले स्वीमिंग पूल और फैक्ट्रियों से छोड़े गए गरम पानी में भी रहता है। चेतावनी में कहा गया है कि लेक जैक्शन, फ्रीपोर्ट, एंगलेटोन, ब्राजोरिया, रिचवुड, ऑयस्टर क्रीक, क्लूट, रोजेनबर्ग के लोगों से कहा गया है कि वे पानी का इस्तेमाल नहीं करें। लेक जैक्शन इलाके में आपदा की घोषणा की गई है।
प्रशासन अब इस गंदे पानी को निकालने का प्रयास कर रहा है। यह घटना 8 सितंबर को शुरू हुई जब एक 6 साल के बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चे के अंदर यह घातक अमीबा पाया गया था। इस घटना के बाद जब पानी की जांच की गई तो उसे Naegleria fowleri से पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद लोगों को पानी नहीं पीने की सलाह दी गई।
संपर्क में आनेवाले 97 प्रतिशत लोगों का बचना बेहद मुश्किल
सीडीसी का कहना है कि Naegleria fowleri घातक होता है। वर्ष 2009 से लेकर 2018 तक इस जीवाणु से ग्रसित होने के 34 मामले सामने आए थे। वर्ष 1962 से लेकर 2018 के बीच 145 लोगों को इस जीवाणु ग्रसित किया जिसमें से केवल 4 लोग ही जिंदा बच पाए। इससे संक्रमित इंसान के दिमाग में जानलेवा संक्रमण होता है।
सेंट्रल ऑफ डिजीज कंट्रोल के अनुसार, लोग इस तरह के अमीबा के शिकार स्विमिंग के दौरान होते हैं। जब नेगलेरिया फाउलरली उनकी नाक में प्रवेश करके उनके दिमाग तक पहुंच जाता है और दिमाग के टिश्यूज को खाना शुरू कर देता है। इस तरह के अमीबा के संपर्क में आनेवाले 97 प्रतिशत लोगों का बचना बेहद मुश्किल होता है।