एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी हेड डॉ. मनीष कौशल का ऑडियो वायरल होने के मामले में विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। हालांकि रिकॉर्ड पर इसे न डीन बता रहे हैं और न खुद डॉ. कौशल। लेकिन मामला काफी चर्चा में है। नजदीकी लोगों के मुताबिक एसोसिएट प्रोफेसर और डॉ. कौशल के बीच काफी समय से खींचतान चल रही है। यह खींचतान वर्चस्व को लेकर है। 2023 में जब डॉ. कौशल सर्जरी हेड बने उसके बाद से दोनों के बीच तनाव और बढ़ गया।
डॉ. कौशल का कहना है कि मेरी पुरानी रिकॉर्डिंग को 43 छात्रों के फेल के केस से जोड़ा गया। इन एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्रों की एग्जाम 16 मार्च के बाद थी। उनकी यह रिकॉर्डिंग फरवरी के दूसरे हफ्ते की है। यह उस दौरान की है कि जब डॉ. कौशल छह फैकल्टी के साथ थे। उस दौरान वह एसोसिएट प्रोफेसर भी उसमें शामिल थे। डीन डॉ. संजय दीक्षित का भी कहना है कि रिकॉर्डिंग डेढ़ माह पुरानी है। मामले में डॉ. कौशल को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने अभी इसका जवाब नहीं दिया है।
अब जानिए क्या है कारण
लम्बे समय से चल रही खींचतान के बाद 2023 में जब डॉ. कौशल सर्जरी विभाग के हेड बने तो उन्होंने अपने अधिकार का उपयोग करना शुरू किया। ऐसे में उनके और कथित एसोसिएट प्रोफेसर के बीच दूरियां और बढ़ने लगी। इसे लेकर डॉ. कौशल ने किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन उनका कहना है कि मेरा काम विभाग का अच्छा एडमिनिस्ट्रेशन बनाए रखना है। मैं इसे लेकर किसी को कुछ कहता हूं या उनकी गलती का एहसास कराता हूं तो हो सकता है कि बुरा लगता है। हर जगह नरम रुख से काम नहीं लिया जा सकता। मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना, क्योंकि इस एग्जाम में मेरी कोई भूमिका ही नहीं थी। मैंने साइन तक नहीं की थी।
भड़काने वाली बात वायरल की गई
अभी तक ऑडियो रिकॉर्डिंग को 50% सही बताने वाले डॉ. कौशल का कहना है कि रिकॉर्डिंग 90% सही है। लेकिन खास बातों को कांट-छांट दिया। जब मेरे साथ छह डॉक्टर बैठे थे, तो सामान्य बोलचाल में मैंने अपनी बात कही। मैंने कहा कि था कि ‘हमारे जमाने मैं तो ऐसा होता था कि…’ इस तरह के शब्दों को ऑडियो में काट दिया गया। एग्जाम के बाद जब रिजल्ट आया तो 43 छात्रों के फेल होने का एक अलग ही मामला था। उसमें भी मेरे खिलाफ भड़काया गया और एबीवीपी ने कॉलेज में प्रदर्शन किया। मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश की।
टोटल में जोड़ा ही नहीं 15 नंबर का सेक्शन
उधर, 43 छात्रों के फेल होने के मामले में जब डीन डॉ. संजय दीक्षित ने सर्जरी विभाग हेड डॉ. मनीष कौशल को री-टोटल करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, वह पूरी हो गई है। यह री-टोटल रिजल्ट नेशनल मेडिकल कौंसिल (NMC) को जबलपुर यूनिवर्सिटी भेज दिया है। वहां कमेटी इस पर निर्णय लेगी। डॉ. कौशल के अनुसार इन 43 स्टूडेंट्स के रिजल्ट में 15 नंबर के एक सेक्शन के नंबरों को कुल टोटल में जोड़ा ही नहीं गया था। उनका कहना है कि एक-दो स्टूडेंट्स के साथ ऐसा भूल वश हो सकता है, लेकिन 43 स्टूडेंट्स के नंबर नहीं जोड़ना आश्चर्यजनक है। इसमें चार इंटरनल (जाम नगर, जयपुर, ग्वालियर और रीवा) थे। इन लोगों ने कुल टोटल चैक ही नहीं किया।
सभी नौ एग्जामिनर्स ने दिए शपथ पत्र
मामले में सभी नौ एग्जामिनर्स ने शपथ पत्र भी दिए हैं। इसमें उन्होंने कहा कि नंबर कम नहीं दिए बल्कि री-टोटल में गड़बड़ी हुई। डॉ. कौशल के मुताबिक इसे देखना उनका ही काम था। उसे अब उन्होंने रेक्टिफाई कर दिया। फिर जब उन्होंने इसे मुझे दिया तो मैंने एक्सटरनल से साइन कराकर यूनिवर्सिटी जमा करा दिया। इसमें एक्सटरनल ने भी शपथपत्र दिया है। इसके लिए एक कमेटी बनाई थी। कमेटी में डॉ. अनुपम माहेश्वरी, डॉ. सोनिया मोजेस और डॉ. शशि शर्मा ने मामले को देखा। फिर सभी एग्जामिनर्स ने नंबर चेक किए तो पाया कि नंबर जोड़ने में गलती हुई है। ऐसे में 43 स्टूडेंट्स फेल घोषित कर दिए गए। उनका कहना है कि मैंने मेल में सब कुछ अवगत करा दिया है। इसकी मैन्युअल कॉपी भी भिजवाई है। निश्चित तौर पर अब इससे फेल घोषित किए गए स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी। डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि रिवाइज्ड रिजल्ट जल्द ही आने की उम्मीद है।
मेरी अनौपचारिक चर्चा को वायरल किया, इसे लेकर मुझे पुलिस या साइबर सेल को कोई शिकायत नहीं करनी है। मुझे जो नोटिस जारी किया गया है उसका जवाब मैं जल्दी और मजबूती से दूंगा।
-डॉ. मनीष कौशल हेड सर्जरी डिपार्टमेंट, एमजीएम कॉलेज