भोपाल। हाउसिंग बोर्ड के नियमों में उलझे हजारों लोग, करोड़ों संपत्ति हुई अवैध; जानिए कैसे हो रहे परेशान – देखें VIDEO

‘आठ साल पहले मेरे भाई श्रीराम निगम की अचानक मौत हो गई। उसके मालिकाना हक का एक फ्लैट था। मैंने सोचा कि ये फ्लैट बेचकर जो पैसा मिलेगा उससे भाई के बच्चों की पढ़ाई होगी। उनका भविष्य संवर जाएगा, लेकिन जब फ्लैट बेचने की कोशिश की तो पता चला कि ये फ्लैट तो अवैध है।’

ये कहानी है भोपाल के रहने वाले नरेश निगम की। दरअसल, नरेश के भाई श्रीराम ने जिस बिल्डिंग में फ्लैट खरीदा था, वो हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर है, लेकिन जमीन श्रीराम के नाम पर नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के नाम है जिसने इसे लीज पर लिया था।

बोर्ड के नियम के मुताबिक कोई व्यक्ति लीज पर ली हुई जमीन का कॉमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर सकता। मगर, इस नियम न तो पालन हो रहा है और न ही करवाया जा रहा है। इसकी वजह से वो लोग परेशान हैं जिन्होंने हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बनी बिल्डिंग में फ्लैट तो ले लिए अब वे न तो प्रॉपर्टी को बेच सकते हैं न ही इस पर लोन ले सकते हैं।

पढ़िए किस तरह से हाउसिंग बोर्ड के इस नियम को ताक पर रखकर बनाई जा रही हैं बिल्डिंग, लोग कैसे परेशान है और क्या कहना है हाउसिंग बोर्ड के अफसरों का…

ये बिल्डिंग हाउसिंग बोर्ड की लीज की जमीन पर बनी हैं, जिन्होंने इसमें फ्लैट खरीदे हैं नियम के मुताबिक उनकी प्रॉपर्टी अवैध है।

पहले जानिए किस नियम के चलते अवैध हो गई प्रॉपर्टी

हाउसिंग बोर्ड 30 साल की लीज पर जमीन देता है। इसके लिए लीजधारक को कलेक्टर गाइडलाइन का .50 प्रतिशत शुल्क देना होता है। 30 साल की लीज खत्म होने के बाद ये शुल्क 3 प्रतिशत हो जाता है।

यदि हाउसिंग बोर्ड से कोई व्यक्ति 30 साल की लीज पर जमीन लेता है। उस पर कोई दुकान या बिल्डिंग बनाकर बेच देता है, तो हाउसिंग बोर्ड इसे अतिक्रमण मानता है। ये प्रॉपर्टी अवैध हो जाती है। इस प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री तो हो जाती है, लेकिन जब लीज की अवधि खत्म होती है तो ये रिन्यू नहीं हो सकती। इस प्रॉपर्टी को 2 फीसदी शुल्क चुका कर फ्री होल्ड भी नहीं किया जा सकता।

दो मामलों से समझिए कैसे लोग हो रहे परेशान

केस 1: भोपाल के रविंद्र जैन 7 साल से मकान बेचने की कोशिश में

भोपाल के रविंद्र जैन ने 1998 में नेहरू नगर में फ्लैट खरीदा था। ये हाउसिंग बोर्ड की जमीन थी। रविंद्र जैन को लगा कि हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बिल्डिंग बनी है तो सब कुछ नियमानुसार ही होगा। उन्होंने जिस बिल्डर से फ्लैट खरीदा उसने भी कभी नहीं बताया कि ये लीज की जमीन है।

बिल्डर ने यहां फ्लैट बनाने के साथ दुकानें भी बना दी। 2017 में जमीन की लीज खत्म हो गई। रविंद्र जैन ने जब अपना फ्लैट बेचने की कोशिश की तो खरीदने वाले ने उनसे लीज रिन्यू के कागज मांगे। वे हाउसिंग बोर्ड में लीज रिन्यू करवाने पहुंचे तो कहा गया कि लीज की जमीन पर बगैर अनुमति बिल्डिंग बनी है इसलिए लीज रिन्यू नहीं हो सकेगी।

केस 2: नवीन जैन को दुकान लेना महंगा पड़ा, लोन भी नहीं मिल रहा

भोपाल के नवीन जैन की कहानी भी ऐसी ही है। पेशे से व्यापारी नवीन कहते हैं कि जब उनका किराना का व्यवसाय अच्छा चला तो उन्होंने जिंदगी की जमा पूंजी से अरिहन्त अपार्टमैंट में बनी दुकान खरीदी। दुकान खरीदने के बाद उन्हें अपने व्यापार के सिलसिले में बैंक से लोन की जरूरत थी।

बैंक में संपत्ति गिरवी रखने के लिए उन्होंने दुकान के दस्तावेज दिए, तो बैंक ने इस पर लोन देने से मना कर दिया। बैंक की तरफ से कहा गया कि इसकी लीज खत्म हो चुकी है। लीज रिन्यू होने पर ही लोन मिलेगा। नवीन जब हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर गए तो पता चला कि हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर नियम के खिलाफ निर्माण हुआ है।

अब हाउसिंग बोर्ड नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता

दरअसल, हाउसिंग बोर्ड किसी व्यक्ति को लीज पर जमीन देता है तो उसकी शर्तों में साफ लिखा होता है कि जमीन का इस्तेमाल वो खुद कर सकेगा। इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन, जब इसका व्यवसायिक इस्तेमाल होता है तो हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते।

हाउसिंग बोर्ड ऐसे निर्माण को अतिक्रमण तो मानता है, मगर इस अतिक्रमण को हटाने का अधिकार नगर निगम के पास है। दो विभागों के बीच समन्वय न होने से ऐसी संपत्तियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आम लोगों को पता ही नहीं चलता कि जिस संपत्ति को वे खरीद रहे हैं वो अवैध है। जब वो संपत्ति खरीदते हैं तो उसकी रजिस्ट्री हो जाती है। उन्हें लगता है कि संपत्ति वैध है।

हाउसिंग बोर्ड नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता। जिसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।

तत्कालीन मुख्यमंत्री ने दिया था नियमों में बदलाव का भरोसा

तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे मामलों को देखते हुए नियमों में बदलाव का भरोसा दिया था। दरअसल, देवास में भी ऐसी 2500 से ज्यादा संपत्तियां हैं। शिवराज जब देवास पहुंचे थे तब इससे परेशान लोगों ने उनसे नियमों में बदलाव करने और संपत्तियों को वैध करने की मांग की थी।

तब तत्कालीन सीएम शिवराज ने लोगों को भरोसा दिया था। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी खुद मानते हैं कि लोगों की परेशानी को देखते हुए कई बार बोर्ड की बैठक में ये मुद्दा उठ चुका है, लेकिन इस नियम में बदलाव का अधिकार केवल सरकार के पास ही है।

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