श्री महाकालेश्वर मंदिर अधिनियम में 41 वर्षों बाद बदलाव की तैयारी, पूरे उज्जैन क्षेत्र के विकास के लिए बनाया जाएगा नया अधिनियम

भगवान महाकाल मंदिर के प्रबंधन के लिए 41 वर्ष पहले मप्र सरकार की ओर से लागू किया गया श्री महाकालेश्वर मंदिर अधिनियम-1982 जल्द बदलने वाला है। सरकार का मानना है कि अब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है। मंदिर समिति के काम में भी काफी बदलाव हो गए हैं। पुराने अधिनियम में बदलाव से क्षेत्र का सही मायने में विकास संभव हो पाएगा। अभी यह अधिनियम महाकाल मंदिर परिसर पर ही लागू होता है, जबकि उज्जैन में 50 से ज्यादा विश्वप्रसिद्ध मंदिर व श्रद्धा स्थल हैं। नया अधिनियम पूरे उज्जैन क्षेत्र के विकास के लिए बनाया जाएगा।

अधिनियम में बदलाव पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। सरकारी स्तर पर इसका ड्राफ्ट बन रहा है। इसके बाद विधानसभा में लाया जाएगा। आचार संहिता के बाद जून से इस पर युद्ध स्तर पर काम होना है। पुराने अधिनियम में मंदिर का सारा कामकाज, प्रबंधन, पुजारियों, पंडों, सेवकों की व्यवस्था, मंदिर को मिलने वाले दान, मंदिर में श्रद्धालुओं व दर्शन की व्यवस्थाएं मंदिर प्रबंधन समिति को दी गई थी। इसके अध्यक्ष कलेक्टर को बनाया गया था। समिति में प्रशासक की भी नियुक्ति राज्य सरकार से की जाती है। अधिनियम में ही इस बात का उल्लेख है कि मंदिर संचालन के अलग नियम सरकार बना सकेगी।

प्रमुख श्रद्धास्थल इसमें आएंगे, अभी ड्राफ्ट बन रहा… फिर विधानसभा में आएगा

जरूरत क्यों?

रोज डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंच रहे… सालाना दान 150 करोड़, हर मंदिर का अलग ट्रस्ट

महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष 1983 में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सीमित थी, लेकिन अब प्रतिदिन औसतन डेढ़ लाख श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आ रहे हैं। दान भी उसी मात्रा में बढ़ा है। पिछले एक साल में मंदिर को 150 करोड़ रुपए का दान मिला है। इसके अलावा यहां शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर, गढ़कालिका, कालभैरव, मंगलनाथ, गुरु संदीपनि आश्रम, चिंतामण गणेश और 84 महादेव मंदिर सहित कई अन्य हिंदू धार्मिक स्थान हैं।

साल 2028 में 15 करोड़ से ज्यादा लोगों के आने की संभावना है। इन सभी मंदिरों का प्रबंधन अलग-अलग ट्रस्टों और प्रशासन के जरिए होता है। सरकार का मानना है कि यदि सभी मंदिरों का प्रबंधन एक ही अधिनियम के तहत होगा तो श्रद्धालुओं को सुविधा होगी।

सुझाव मिल रहे हैं, लोगों की राय लेंगे : सीएम

41 साल पुराने अधिनियम को बदलने के सुझाव मिले हैं। लोगों की राय ले रहे हैं। मंदिर की आय से क्षेत्र में विकास और सेवा के काम हों, यह अच्छा विचार है। यदि उज्जैन के लोग चाहेंगे तो ही मंदिर अधिनियम में अच्छे बदलाव करेंगे। – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

मंदिर अधिनियम-1982 में मुख्य रूप से ये बदलाव होंगे

अधिनियम में मुख्य रूप से मंदिर की परिभाषा बदलनी होगी। अभी मंदिर का अर्थ महाकाल मंदिर परिसर में स्थित 17 प्रमुख मंदिर और मूर्तियां हैं। बदलाव के बाद मंदिर का अर्थ उज्जैन तीर्थक्षेत्र के सभी मंदिर हो जाएगा। कालभैरव, हरसिद्धि, मंगलनाथ, गुरु संदीपनि आश्रम, गढ़कालिका, चिंतामण गणेश और 84 महादेव मंदिर आदि इसमें शामिल हो जाएंगे।

दान राशि का उपयोग का क्षेत्र के विकास कार्य और सेवा कार्यों तक विस्तारित किया जाना है। इससे सभी मंदिरों की आय बढ़ाकर उस राशि से विभिन्न सेवाकार्य शुरू किए जा सकते हैं।

तीसरा बदलाव विकास को लेकर है। मंदिर समिति को इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक, शिक्षा और सेवा कार्यों तक के काम दिए जाएंगे।

मंदिरों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। मूर्तिशिल्प, हस्तशिल्प जैसी कलाओं का विकास कर बड़ी संख्या में रोजगार पैदा किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *