भोपाल। स्कूल में सेकेंड क्लास की छात्रा से रेप के मामले में छात्रा के मां ने एसआई पर लगाए गंभीर आरोप – एसआई ने दिया मामले को निपटाने का ऑफर… देखें VIDEO

राजधानी के एक बड़े निजी स्कूल में सेकेंड क्लास की छात्रा से रेप के मामले में एसआई की भूमिका पर सवाल उठे हैं। सबसे बड़ा राजदार सब इंस्पेक्टर प्रकाश राजपूत को ही बताया जा रहा है। प्रकाश ही वह एसआई है, जिसने 29 अप्रैल की रात को बच्ची की मां पर इस बात का दबाव डाला था कि वह उसकी मेडिकल जांच न कराए।

पीड़ित बच्ची की मां ने बताया कि राजपूत ने मुझसे कहा कि मोदी (स्कूल संचालक) से ड्रग्स के नशे में गलती हुई है। वो ले-देकर मामला समझ ले। बात आगे न बढ़ाए।

उधर, स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि 19 अप्रैल को बच्ची की मां एसआई राजपूत के साथ ही स्कूल में एडमिशन के लिए आई थी। उन्होंने पूरे दस्तावेज भी नहीं दिए। पीड़ित बच्ची की मां ने  बातचीत करते हुए ये स्वीकार किया कि वह राजपूत के साथ स्कूल में एडमिशन के लिए गई थी। ऐसे में पुलिस अब स्कूल संचालक, वार्डन, एसआई राजपूत और पीड़िता की मां की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है। उधर, एफआईआर के बाद से राजपूत गायब है। पुलिस उसे तलाश रही है।

इस पूरे केस के इन्वेस्टिगेशन को करीब से समझने के लिए पुलिस अधिकारी, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम, स्कूल मैनेजमेंट और पीड़िता की मां से बात की। समझा कि किस-किस की भूमिका सवालों के घेरे में है।

अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ


सबसे पहले जानिए SI प्रकाश राजपूत की भूमिका संदिग्ध क्यों?

स्कूल प्रबंधन के मुताबिक 19 अप्रैल को जब बच्ची का स्कूल में एडमिशन हुआ तो सब इंस्पेक्टर प्रकाश राजपूत भी बच्ची के साथ आए थे। राजपूत के कहने पर ही बच्ची का एडमिशन हुआ। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक एसआई राजपूत ने ही एडमिशन के लिए फोर्स किया था। हम उन्हें पहले से जानते थे, वह आते-जाते रहते थे। मिसरोद थाने में पदस्थ रहे हैं। इसी कारण हमने उनके कहने पर एडमिशन दिया।

एसआई प्रकाश राजपूत पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप है।

एडमिशन के बाद 21 अप्रैल रविवार को बच्ची की मां उससे मिलने पहुंची थी। तब तक सब कुछ ठीक था। 21 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच बच्ची के साथ वारदात हुई है। बच्ची की मां के मुताबिक जब 28 अप्रैल रविवार को उसने मुझे ब्लीडिंग की बात बताई और वार्डन ने फोन कट कर दिया।

तब 29 अप्रैल को मैं फिर स्कूल पहुंची और बच्ची को लेकर जेपी अस्पताल गई। वहां पता चला कि उसके प्राइवेट पार्ट में सूजन है, तो जेपी अस्पताल की तरफ से ही पुलिस को सूचना दी गई। इसके कुछ देर बाद एसआई प्रकाश राजपूत अस्पताल आया।

जेपी अस्पताल की तरफ से पुलिस को सूचना दी गई, मगर पुलिस ने उस दिन मामला दर्ज नहीं किया।

मां ने कहा कि तब तक पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज नहीं की थी। अगले दिन मंगलवार की शाम को जब मैं दोबारा थाने पहुंची, वहां बैठी रही, तब केस दर्ज किया गया।

इस घटना की एफआईआर दर्ज होने के बाद से एसआई राजपूत गायब है। इस मामले की जांच कर रही डीसीपी श्रद्धा तिवारी से जब राजपूत की भूमिका पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि इस केस की सभी एंगल से जांच की जा रही है।

उन्होंने ये भी माना कि मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के प्राइवेट पार्ट से छेड़खानी की पुष्टि हुई है। जो-जो भी दोषी होगा, वो बच नहीं पाएगा।

स्कूल प्रबंधन ने पूरी घटना को लेकर उठाए सवाल

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि पिछले 28 सालों में आज तक इस तरह के आरोप नहीं लगे हैं। हमें पूरा यकीन है कि किसी खास मकसद के तहत यह आरोप लगाए गए हैं। स्कूल प्रबंधन का ये भी आरोप है कि बच्ची की मां पहले भी कई लोगों को इसी तरह से फंसा चुकी है।

उन्होंने दस्तावेज जमा करने के लिए आठ दिन का समय मांगा था, लेकिन बिना कोई दस्तावेज के एडमिशन कराया गया था। हमें पुख्ता जानकारी मिली है कि बच्ची Null मां के खिलाफ चोरी सहित अन्य धाराओं में कई केस दर्ज हैं। एसआई राजपूत और बच्ची की मां से पूछताछ हो तो सब साफ हो सकता है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।

स्कूल प्रशासन का पक्ष

बच्ची की मां का आरोप- स्कूल प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की

बच्ची की मां का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की है। बच्ची की मां के मुताबिक रविवार 28 अप्रैल को जब उसने बच्ची को फोन लगाया तो वह रोने लगी थी। वीडियो कॉल पर उसने बताया कि उसे ब्लीडिंग हुई है। जब मैंने इसका कारण पूछा तो वार्डन ने फोन काट दिया था।

वे कहती हैं कि जब बच्ची ने वार्डन को बताया कि उसे पेन हो रहा है तो बजाय उसे डॉक्टर के दिखाने के मामले को दबाने में जुटे रहे। बच्ची की मां का कहना है कि मुझे जो बच्ची ने नाम बताया मैंने उसी तरह से घटनाक्रम पुलिस को बताया। बच्ची के साथ हैवानियत की गई, तब भी मुझे खबर नहीं दी गई। उसके कपड़ों को छिपा दिया गया, वह मुझे नहीं दिए गए।

 

अब जानिए स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

28 अप्रैल को बच्ची से फोन पर बात करने के बाद जब उसकी मां 29 तारीख को हॉस्टल पहुंची तो उन्हें बताया गया कि बाकी बच्चे पेरेंट्स के साथ जा चुके हैं। स्कूल में छुट्टी की सूचना बच्ची की मां को नहीं दी गई।

वहीं जिन दो वार्डन के बारे में बच्ची ने बताया प्रबंधन उनके नाम तक नहीं बता पा रहा है। साथ ही जब स्कूल संचालिका से पूछा कि हॉस्टल में कितने बच्चे रहते हैं तो वो इसका सही जवाब नहीं दे सकीं। एडमिशन के वक्त बच्ची की मां ने पूरे दस्तावेज नहीं दिए थे, तो फिर बच्ची को एडमिशन क्यों दिया गया।

स्कूल प्रबंधन के आरोपों पर बच्ची के मां के जवाब

सवाल: एडमिशन के लिए आप एसआई राजपूत के साथ क्यों गई थीं?

जवाब: हां, वो मेरा परिचित है, लेकिन मेरी बेटी के साथ दरिंदगी से मैं समझौता कैसे कर सकती हूं। वो मुझ पर इस बात के लिए दबाव डाल रहा था। कोई भी मां अपनी बेटी के साथ गलत कैसे बर्दाश्त कर सकती है।

सवाल- स्कूल प्रबंधन का कहना है कि आपके खिलाफ तो पहले भी कई एफआईआर हो चुकी है?

जवाब: वो दस्तावेज के साथ बात करें। मेरा चरित्र हनन करके वो अपने गुनाहों से नहीं बच सकते। यदि मैं चुप रह गई तो न जाने ऐसी कितनी बच्चियों के साथ गलत हरकत होती रहेगी।

सवाल: बच्ची के पिता क्यों सामने नहीं आ रहे हैं?

जवाब: ये मेरा पारिवारिक मसला है, मैं अपने पति से अलग रह रही हूं। मेरी बेटी की परवरिश खुद कर रही हूं।

सवाल: आप भोपाल की रहने वाली हैं, फिर बेटी को हॉस्टल में रखने की क्या जरूरत?

जवाब: मेरी बीडीएस की पढ़ाई कम्प्लीट हो गई है। मैंने सोचा कि मैं बेटी को हॉस्टल में रखकर बेहतर तरीके से जॉब कर पाऊंगी।


पुलिस के साथ बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम भी पहुंची।
बच्ची की मां ने पुलिस को क्या बताया

बच्ची की मां के मुताबिक हर रविवार को ही परिजन बच्चों से मिल सकते हैं, इसलिए रविवार के दिन 21 अप्रैल को वह बच्ची को हॉस्टल से बाहर घुमाने लाई थीं। इस रविवार यानी 28 अप्रैल को जब बच्ची से फोन पर बात की तो वह रोने लगी।
वीडियो कॉल पर बोली, उसे ब्लीडिंग हुई है। जब मैंने कुछ पूछा तो वार्डन ने फोन कट कर दिया। मैं तुरंत 29 अप्रैल को इंदौर से स्कूल पहुंची। फिर बच्ची को लेकर जेपी अस्पताल गई, जहां चेकअप के बाद डॉक्टर ने बताया कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट में सूजन और ब्लीडिंग हुई है।

मां ने आगे कहा- बच्ची ने बताया कि चार-पांच दिन पहले हॉस्टल की वार्डन ने उसे दाल-चावल खाने को दिया था। उसे उस रूम में ले जाया गया जहां अभी कोई नहीं रहता। दाल चावल खाकर वो बेसुध हो गई। रात में जब उसकी नींद खुली वह अपने कमरे में नहीं थी।


पुलिस की टीम हॉस्टल में जांच करते हुए।

बच्ची ने बताया कि एक मोटे से दाढ़ी वाले अंकल उसके साथ गलत काम कर रहे थे। पास में खड़े अंकल बोल रहे थे कि मोदी सर, बच्ची को होश आ गया है। अंकल ने दो-तीन बार बोला। इसके बाद उस अंकल ने उसकी आंख पर हाथ रख दिया। उसके पेट में दर्द हो रहा था और प्राइवेट पार्ट से ब्लड आ रहा था।’ ‘बच्ची फिर से बेहोश हो गई।

बच्ची को सुबह होश आया तब वो अपने पलंग पर सो रही थी। उसने होश में आने के बाद वार्डन से कहा कि मेरे पेट में पेन हो रहा है। उन्होंने बच्ची को नहलाया-धुलाया। बेटी ने जब मुझसे बात करने की जिद की तो उससे कहा स्कूल जाओ, वहां से आने के बाद बात करा देंगे।

पीड़िता की मां का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्ची को उसे कुछ भी बताने से मना किया।

उन लोगों ने बच्ची को डराया-धमकाया कि किसी से कुछ कहोगी तो हम मम्मी से बात नहीं कराएंगे। उन्होंने कहा- संडे को बात कराएंगे। जब मैंने बेटी से बात करने के लिए फोन किया तो उन्होंने कहा कि बच्ची अभी सो रही है। बात नहीं करा सकते।

जब मैंने दोबारा कॉल किया तो पीछे से आवाज आई कि 2 मिनट से ज्यादा बात मत करना और फोन कट गया। फिर मैंने वीडियो कॉल किया तो बच्ची रो पड़ी। फिर उन्होंने बच्ची से फोन छीनकर स्विच ऑफ कर दिया।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *