इंदौर। नगर निगम में 107 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में चौंकाने वाला खुलासा, फर्जीवाड़े का 70 फीसदी हिस्सा निगम अधिकारियों की जेब में जाने का आरोप – देखें VIDEO

इंदौर नगर निगम में हुए करोड़ों रुपए के फर्जी बिल घोटाले में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। 107 करोड़ के भ्रष्टाचार में अब तक निगम इंजीनियर सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ में ठेकेदारों ने फर्जीवाड़े का 70 फीसदी हिस्सा निगम अधिकारियों की जेब में जाने का आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि आरोप सही पाए जाने पर निगम के कई अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती

आरोपियों से पुलिस रिमांड में हुई पूछताछ के आधार पर 36 फाइलों की जांच की गई। इसमें 48 करोड़ रुपए के घोटाले का पता चला है। इसमें से आधी रकम (24 करोड़ रुपए) का भुगतान ठेकेदारों ने अपनी फर्म के नाम से करवाया। पुलिस ने ठेकेदारों के बैंक खाते फ्रीज करवा दिए हैं। सभी के खातों में कुल मिलाकर 70 लाख रुपए मिले हैं। निगम के खाते से भुगतान किए गए 24 करोड़ रुपए आरोपियों ने कहां इन्वेस्ट किए इस पर अभी जांच शुरू हुई है।

निगम के इंजीनियर की भूमिका आई सामने

घोटाला 2022 के पहले अलग-अलग दौर में हुआ है। इनमें 36 फाइलों में फर्जी बिल, रसीदें, चेक, तारीख के आधार पर आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अभी तक निगम के इंजीनियर, क्लर्क और एक कम्प्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार हो चुके हैं। इन दोनों और ठेकेदारों ने इंजीनियर अभय राठौर की भी भूमिका बताई। उनका कहना है कि राठौर द्वारा बिल के पूरे दस्तावेज तैयार कर फाइल अधिकारियों को फॉरवर्ड की जाती थी।

48 करोड़ में से 24 करोड़ रुपए का जो घपला सामने आया है, उसमें पांच फर्म जुड़ी हैं। नींव कंस्ट्रक्शन (मो. साजिद), ग्रीन कंस्ट्रक्शन (मो. सिद्दीकी), किंग कंस्ट्रक्शन (मो. जाकिर), क्षितिज एंटरप्राइजेस (रेणु वडेरा) और जाह्नवी एंटरप्राइजेस (राहुल वडेरा) हैं। इनमें से पुलिस ने चार ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है। जबकि मो. सिद्दीकी फरार है। उसकी गिरफ्तारी पर उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी से नए खुलासे होने की संभावना है।

30 साल से अकाउंट डिपार्टमेंट में राजकुमार, वही पास कराता था चेक

गिरफ्तार सब इंजीनियर उदय सिसौदिया, कम्प्यूटर ऑपरेटर चेतन भदौरिया और क्लर्क राजकुमार साल्वी की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं। आरोपी उदय सिसौदिया की भूमिका फर्जी बिल बनवाने में रही है। जबकि राजकुमार और चेतन की भूमिका चेक बनवाने की रही है। राजकुमार करीब 30 सालों से अकाउंट विभाग में है। उसके खिलाफ पहले भी गड़बड़ी की शिकायतें हो चुकी है। इन तीनों सहित सातों आरोपी 4 मई तक के पुलिस रिमांड पर हैं।

नगर निगम में फर्जी बिल घोटाले के मास्टर माइंड अभय राठौर पर 10 हजार का इनाम

नगर निगम में फर्जी बिलों से हुए 107 करोड़ के घोटाले में फरार मुख्य आरोपी ईई अभय राठौर पर 10 हजार का इनाम घोषित हुआ है। पुलिस अब उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई करेगी। वहीं फर्जी बिल व फोटोकॉपी की गई फाइलों के माध्यम से निगम के खातों से निकाले गए करोड़ों रुपयों के ट्रांजेक्शन को लेकर आरोपियों के खातों को भी पुलिस खंगाल रही है। कुछ आरोपियों के सीए से भी अफसरों ने पूछताछ की है।

कैशियर साल्वी ने पत्नी-बेटों के नाम बना रखी थी दो ठेकेदारी फर्म, साढ़े चार करोड़ का भुगतान भी लिया

नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस ने जिस कैशियर राजकुमार साल्वी को गिरफ्तार किया था, उसने पत्नी और बेटे के नाम पर दो फर्म (श्री गुरुकृपा और निशान क्रिएशन) बना रखी थीं, जो ठेकेदारी का काम कर रही थीं। इन फर्मों को साढ़े चार करोड़ रुपए के चार बिलों का भुगतान भी किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि आरोपी फर्मों से भी राशि का बड़ा हिस्सा इनमें बंटा है। ड्रेनेज विभाग से अब उनकी भी जांच करवाई जा रही है। साल्वी के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने भी कार्रवाई की थी। वर्ष 2021 उसके ठिकानों पर छापे में आय से अधिक संपत्ति मिली थी। इसके बाद निगमायुक्त ने उसे ट्रेंचिंग ग्राउंड अटैच कर दिया था।

वहीं घोटाले में जिन चार अधिकारी-कर्मचारियों के नाम आए हैं, उनमें से तीन भ्रष्टाचार के कारण निलंबित भी हो चुके हैं। इनकी विभागीय जांच भी हुई, लेकिन तत्कालीन निगमायुक्तों ने उन्हें दोबारा काम करने दिया। दूसरी ओर, जांच समिति को पता लगा है कि घोटाले में घिरी पांचों फर्म 10 वर्षों में 188 बिल लगा चुकी हैं। 168 बिलों का भुगतान भी हो चुका है।

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