
एसटीपी की लैब में रखा इनलेट और आउटलेट का सैंपल। इसमें स्लज भी ज्यादा आ रहा था।
इंदौर को वाटर प्लस सिटी बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर बनाए गए एसटीपी फैक्ट्रियों के दूषित वेस्ट को ट्रीट करने के लिए बने ईटीपी (इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) के बराबर भी काम नहीं कर पा रहे हैं। ईटीपी से ट्रीटमेंट के बाद सांवेर रोड की 350 फैक्ट्रियों का वेस्ट साफ पानी जैसा दिखाई देने लगता है, जबकि एसटीपी से मैला पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन एसटीपी के इंचार्ज भी केमिकल इंजीनियर के बजाय इलेक्ट्रिक इंजीनियर हैं, जो एक्सपर्ट को बेसिक चीजें भी नहीं बता पाए।
जब इस सातों एसटीपी के इंचार्ज से बात की तो पता चला वे सभी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, जबकि यहां रसायन शास्त्र (केमेस्ट्री) की डिग्री वाले लोग होने चाहिए। टीम ने इनका वर्किंग ऑडिट भी किया। इसमें खुलासा हुआ कि सभी एसटीपी पर प्रतिदिन पीएच (अम्लीय प्रवृत्ति), सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड), बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड), सहित सात से आठ टेस्ट किए जाते हैं।
सभी एसटीपी में इन टेस्ट के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इसके स्थान पर सेंसस-प्रोब्स नामक डिजिटल उपकरण बाजार में उपलब्ध हैं। सांवेर रोड पर स्थित सीईटीपी प्लांट (सेंट्रल इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) में इसी से टेस्टिंग की जा रही है। प्लांट संचालक शाश्वत गुप्ता ने बताया, जब प्लांट शुरू हुआ था तब इसे लगभग सवा लाख रुपए में खरीदा गया था अब कीमत 15-20 हजार रु. हो चुकी है।

350 फैक्ट्रियों के वेस्ट को ईटीपी से इतना ट्रीट कर रहे हैं कि साफ पानी जैसा दिखने लगता है
इंचार्ज बोले- ज्यादा स्लज यानी अच्छा, एक्सपर्ट ने कहा- गलत
सीपी शेखरनगर स्थित एसटीपी में विशाल मौर्य ने बताया, हमारा प्लांट सबसे अच्छा काम कर रहा है क्योंकि यहां सबसे ज्यादा स्लज निकल रहा है। इस पर प्रो. स्नेहल दोंदे ने बताया, ज्यादा स्लज निकलना गलत है। इसका अर्थ है कि यहां बायोडिग्रेडेशन अच्छे से नहीं हो रही है।
उन्होंने बैकग्राउंड पूछा तो विशाल ने बताया कि वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। एक्सपर्ट ने बताया, यहां एमएससी केमेस्ट्री बैकग्राउंड वाले व्यक्ति को होना चाहिए ताकि वे प्रोसेस को समझ पाते और गड़बड़ी को ठीक कर पाते। सात एसटीपी के इंचार्ज इलेक्ट्रिकल इंजीनियर निकले।
सुरक्षा किट के बगैर काम करते मिले कर्मचारी
सांवेर रोड पर 4 एमएलडी क्षमता वाले सीईटीपी पर किसी भी कर्मचारी ने मास्क और ग्लव नहीं पहन रखे थे। यहां 350 फैक्टरियों का दूषित पानी ट्रीटमेंट के लिए आता है। एक्सपर्ट्स ने प्लांट इंचार्ज शाश्वत गुप्ता को बताया कि कर्मचारियों का सुरक्षा किट नहीं पहनना घातक हो सकता है।