
प्रदेश का धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व संचालनालय जल्द भोपाल से उज्जैन शिफ्ट होने जा रहा है। इसके लिए सिंहस्थ मेला कार्यालय का एक फ्लोर तय किया जा रहा है। चूंकि उज्जैन जिले में शासन नियंत्रित मंदिरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा महाकालेश्वर व सिंहस्थ यहां होने से उज्जैन को धार्मिक राजधानी माना जाने लगा है। इसीलिए तय किया गया है कि धर्मस्व का मुख्यालय भी यहीं से संचालित हो।
सबसे बड़ी बात यह कि उज्जैन जिले में सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों की संख्या ढाई हजार से ज्यादा है। इतना ही नहीं इन मंदिरों के पास 7000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि है। मंदिरों में सुविधाओं का अभाव है। मंदिर की भूमि का ठीक से रखरखाव भी नहीं किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन करने के बाद वहीं से घोषणा की थी कि प्रदेश के सभी मंदिर रोजगार के बड़े केंद्र हो सकते हैं। भगवान के वस्त्र-आभूषण, शृंगार सामग्री, धातु व पत्थर की मूर्तियां, पूजा सामग्री आदि के निर्माण करने वालों को कुटीर उद्योग के तहत प्राेत्साहित किया जाएगा। स्व सहायता समूहों के माध्यम से मंदिरों में स्टाॅल लगाए जाएंगे। इसके बाद कैबिनेट ने फैसला लिया कि प्रदेशभर के सरकारी नियंत्रित मंदिरों की पूरी व्यवस्था सुचारू करने के लिए धर्मस्व विभाग उज्जैन शिफ्ट किया जाए।
यह भी तय हुआ कि धर्मस्व, राजस्व, संस्कृति ग्रामीण विकास और नगरीय विकास व आवास विभागों के मंत्रालयों की उपसमिति बनाकर मंदिरों से जुड़े रोजगार के कामों को बढ़ाया जाए। चूंकि पूरा डायरेक्टोरेट उज्जैन शिफ्ट होना है। इसके लिए जगह की तलाश की जा रही थी। हाल ही में मेला कार्यालय के एक पूरा फ्लोर इसके लिए तैयार कर लिया गया है। आचार संहिता खत्म होते ही डायरेक्टोरेट शिफ्ट होगा।
उद्देश्य- देवस्थानाें में व्यवस्था बेहतर हाे
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व संचालनालय के डायरेक्टर ई. रमेश कुमार का कहना है कि शासन का निर्णय है कि धर्मस्व संचालनालय उज्जैन शिफ्ट किया जाए। आचार संहिता खत्म होने के बाद हम उज्जैन शिफ्ट कर लेंगे। उद्देश्य यही है कि शासन संधारित देवस्थानों में व्यवस्था और बेहतर कैसे की जा सकती है।