IISC ने देसी तकनीक, मैटीरियल से तैयार की RT-PCR किट

भारतीय विज्ञान संस्थान यानी आईआईएससी की देख रेख में कोविड-19 के संक्रमण का पता लगाने वाली RTPCR किट तैयार की गई है. जो पूरी तरह से देसी तकनीक और देसी मैटेरियल से तैयार की गई है ताकि विदेशों पर निर्भरता खत्म हो सके. जिस वैज्ञानिक ने इसे विकसित किया है उनका दावा है कि यह 100 फीसदी सटीक और 2 घंटे से भी कम वक्त में रिपोर्ट देती है. बाज़ार में जो RTPCR किट इस्तेमाल की जा रही है वो रिपोर्ट देने में 3 से चार घंटे का वक़्त लेती है और महंगी है.

ग्लोबल टी एम डायग्नोस्टिक किट IISC बेंगलुरु की देखरेख में तैयार देसी किट है. जिससे ये पता चलेगा कि कौन कोविड 19 से संक्रमित है और कौन नही. जिसे विकसित करने वाले वैज्ञानिक प्रोफेसर उतपल टाटू का दावा है कि इससे किए गए RT-PCR टेस्ट 100 फीसदी सही नतीजे देंगे.

 

प्रोफेसर उतपल टाटू ,डिपार्टमेंट ऑफ बायो केमिस्ट्री, IISC बेंगलुरू ने कहा कि ये 100 फीसदी सही रिपोर्ट देगी. इसमे ग़लती की संभावना नहीं है. कोविड और इस जैसे दूसरे संक्रमण की वजहों और समाधान के रिसर्च पर प्रोफेसर टाटू का 2 दशक से भी ज्यादा का अनुभव है. इस टेस्ट किट से रिपोर्ट 2 घण्टे से कम में आ जाएगी. सवाल दावों की प्रामाणिकता का है.

प्रोफेसर उतपल टाटू ने कहा कि हमारी बनाई किट को IMCR की मान्यता मिल गई है. बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन होने पर ये किट 25 से 30 फीसदी मौजूदा किट से सस्ती होगी. एंटीजन की तुलना में RT पीसीआर टेस्ट की प्रामाणिकता ज्यादा है लेकिन सवाल इसपर भी उठते रहे हैं. नई RTPCR किट IISC जैसी जानी मानी संस्था की देखरेख में विकसित की गई है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि ये बेहतर होगी और सस्ती भी.

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