
रायसेन का आयुष गौर (बाएं) अपने दोस्त समंदर और देवेंद्र के साथ एक हॉस्टल में रह रहा है।
’17 मई की रात को किर्गिस्तान के लोग और छात्रों ने हॉस्टल में घुसकर तोड़फोड़ कर दी। वे हर किसी को पीट रहे थे। ये सब किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुआ। हम लोग बिश्केक से 20 किमी दूर कांत में रहते हैं। यहां हिंसा की आग तो नहीं पहुंची, मगर एहतियात के तौर पर हमें हॉस्टल से बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है।’
ये कहना है आयुष का जो एमपी के रायसेन का रहने वाला है। वह किर्गिस्तान के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस थर्ड ईयर का स्टूडेंट है। आयुष जिस हॉस्टल में रहता है वहां 300 और छात्र रहते हैं। हालांकि किर्गिस्तान में फैली हिंसा के बाद ज्यादातर छात्र यहां से जा चुके हैं। आयुष और उसके दोस्त भी जल्द ही यहां से निकलने वाले हैं।
किर्गिस्तान में एमपी के 1200 बच्चे फंसे हैं। मप्र सरकार ने उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकालने का भरोसा दिया है। लेकिन, यहां रह रहे छात्र इस बात से नाराज है कि सरकार ने उन्हें वापस लाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए।
वे ये भी कहते हैं कि पाकिस्तान अपने छात्रों को यहां से निकाल चुका है और भारत सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। आयुष और उसके दोस्तों के साथ यहां फंसे बाकी छात्रों से बात कर वहां के हालातों को समझा।

किर्गिस्तान में 17 मई से भड़की हिंसा के बाद सड़क पर उपद्रवी।
जो लोग फ्लैट में रह रहे, उन्हें भूखे रहना पड़ रहा
आयुष ने कहा कि वे हॉस्टल में रहते हैं, इसलिए खाने-पीने की ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन जो बच्चे फ्लैट में रह रहे हैं, वे वहां से बाहर ही निकल नहीं पा रहे हैं। उनके पास जितने दिन का खाने-पीने का सामान बचा है उसका उन्होंने इस्तेमाल किया।
अब जिनके पास सामान नहीं बचा है, उन्हें तो भूखे ही रहना पड़ रहा है, क्योंकि बाहर निकलने के साथ ही छात्रों के साथ मारपीट हो रही है। आयुष का कहना है कि लोकल लोगों ने स्टूडेंट्स के साथ लड़कियों से भी मारपीट की है। उनके साथ छेड़छाड़ की है। ये लोग अपने साथ चाकू और अन्य नुकीली चीजें रखते हैं
पाकिस्तान ने अपने स्टूडेंट को निकाला, भारत सरकार ने फ्लाइट नहीं भेजी
आयुष के दोस्त समंदर कहते हैं कि किर्गिस्तान से अपने स्टूडेंट्स को निकालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने फ्री ऑफ कास्ट फ्लाइट भेजी है। मेरे पाकिस्तान के रहने वाले दोस्त ने बताया कि हम लोगों को अच्छे से ले जाया जा रहा है। ऐसे में हमारे मन में थोड़ा गिल्ट होता है कि हमारे देश का स्टेटस पूरी दुनिया में बहुत अच्छा है, फिर भी हम यहां पर फंसे पड़े है। हमारे लिए कोई फ्लाइट नहीं भेजी गई।
समंदर बताते हैं कि पहले इंडियन स्टूडेंट्स की वापसी का टिकट करीब 15-20 हजार रुपए में हो जाता था, लेकिन जब से हालात बिगड़े हैं यहां लूट-खसोट जैसी स्थिति है। अभी 50 हजार रुपए में फ्लाइट का टिकट हो रहा है। हर कोई इतना पैसा अफोर्ड नहीं कर पा रहा है।
समंदर कहते हैं कि किर्गिस्तान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स ने भारत सरकार, इंडियन एंबेसी और विदेश मंत्री को सोशल मीडिया पर टैग किया है। उनसे गुहार लगाई कि हमें यहां से बाहर निकालें, लेकिन उनका कुछ रिस्पॉन्स नही आया है। वो लोग कह रहे हैं कि यहां सिचुऐशन नॉर्मल है, लेकिन ग्रांउड लेवल पर कुछ ठीक नहीं है।

मकान मालिक सभी लोगों से घर खाली करवा रहे
आयुष का कहना है कि बिश्केक में जो लोग फ्लैट लेकर रह रहे हैं, उनके बारे में स्थानीय लोग जानते हैं। ऐसे में मकान मालिक सबसे पहले उन्हें घर से बाहर निकाल रहे हैं। वो बाहर जा रहे हैं तो स्थानीय लोगों के हमले का शिकार हो रहे हैं।
आयुष का कहना है कि कुछ ऐसी खबरें भी हैं कि लड़कियों के साथ गलत बर्ताव किया जा रहा है। आयुष के साथ ही हॉस्टल में रहने वाले देवेंद्र ने बताया कि हमें भी मीडिया रिपोर्ट से ही पता चला कि 13 मई को स्थानीय छात्रों ने इजिप्ट की एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की थी।
इसके बाद इजिप्ट के छात्रों ने इसका विरोध किया और हिंसा भड़क गई। इसके बाद स्थानीय छात्रों ने बाहर से आए छात्रों पर हमले करना शुरू कर दिया।

जो छात्र फ्लैट में रह रहे हैं। उनके घर में कुछ इस तरह से तोड़फोड़ की गई।
उज्जैन के विवेक ने कहा- यहां की सरकार कुछ नहीं कर पा रही है
उज्जैन का रहने वाला विवेक किर्गिस्तान से बाहर निकल चुका है। दरअसल, जब हिंसा फैली तो विवेक ने एमपी सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। 21 मई को सीएम डॉ. मोहन यादव ने विवेक के साथ रवि सराठे और रोहित पांचाल से बात की थी।
विवेक का कहना है कि उस समय यूनिवर्सिटी ऑनलाइन परीक्षाओं के तैयार नहीं थी, लेकिन बाद में यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन परीक्षा लेने का फैसला किया। विवेक अपने साथी रवि सराठे के साथ अब कजाकिस्तान आ चुका है। विवेक ने बताया कि शुरुआत में तो केवल 50-100 लोगों ने विरोध शुरू किया था, लेकिन किर्गिस्तान की पुलिस इसे भी कंट्रोल नहीं कर पाई।
जब लोगों ने देखा कि पुलिस की संख्या बहुत कम है तो स्थानीय लोगों में कुछ लीडर टाइप युवकों ने बाकी लोगों को भड़काना शुरू कर दिया कि किर्गिस्तान की सरकार विरोध करने वालों का कुछ नहीं कर पाएगी, हमें ही एक्शन लेना पड़ेगा। तब स्थानीय लोगों ने हिंसा करना शुरू कर दी।

छात्र अपने खर्च पर भारत लौटने की तैयारी कर रहे
विवेक का कहना है कि जब एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव से बात हुई, तब उन्होंने कहा कि आप लोग पढ़ाई न छोड़ें, एग्जाम दें। उसके बाद हम आपको वहां से निकालेंगे, लेकिन घरवाले हमारी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, इसलिए जैसे ही स्थिति थोड़ी सामान्य हुई है मैं और रोहित बस से कजाकिस्तान आ गए ।
भास्कर ने जब रवि और विवेक से पूछा कि उनके बाहर निकलने और फ्लाइट के टिकट करने में सरकार की तरफ से कोई मदद मिली तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई मदद नहीं मिली है। जब गर्दन पर तलवार हो तो कोई इंतजार नहीं करेगा कि कोई हमें बचाएं।
हमने इंडियन एंबेसी से भी बाहर निकालने की मांग की थी, लेकिन एंबेसी भी कुछ नहीं कर रही है, क्योंकि भारतीय छात्रों के साथ कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है। हम इंतजार नहीं कर सकते कि हमारे दो चार लोग जख्मी हों और हमें यहां से निकाला जाए। हमें सरकार से यही कहना है कि यहां से बाकी लोगों को भी निकाल लिया जाएं।
