बहन के ब्लैकमेलर को जलाया जिंदा – हुलिया बदलकर बन गया था ‘बाबा’ – MP के मोस्ट वांटेड कुख्यात किस्सू की दास्तान – देखे VIDEO

31 दिसंबर 1986 की सर्द रात को कटनी के एक बदमाश राजेंद्र उर्फ डेऊ का उसी के घर से अपहरण हो गया। बदमाश उसे लेकर ढाबे पर पहुंचे। यहां उन्होंने उसे खाना खिलाया। उसके बाद उसकी जमकर पिटाई की।

इसके बाद बदमाश, राजेंद्र को लेकर 10 किमी दूर झुकेही के जंगल पहुंचे। यहां एक चूने की भट्टी में उसे जिंदा जला दिया। 38 साल पहले हुई इस जघन्य वारदात को किसी और ने नहीं बल्कि उस वक्त के कुख्यात बदमाश किस्सू तिवारी ने अंजाम दिया था।

कोर्ट 38 साल बाद इस मामले में सजा सुनाने वाली है। मुख्य आरोपी किस्सू तिवारी सजा के डर से पिछले तीन साल से फरार चल रहा था। पुलिस से बचने वह साधु का वेष बनाकर हरिद्वार और अयोध्या में फरारी काट रहा था।

पुलिस कोर्ट के सामने उसे पेश ही नहीं कर पा रही थी। ये मामला जब हाईकोर्ट के संज्ञान में आया तो कोर्ट ने पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। पुलिस ने 12 घंटे में उसे दबोच लिया। पढ़िए एमपी के मोस्ट वांटेड किस्सू तिवारी का पूरा किस्सा…

16 साल की उम्र में लिखा जुर्म की किताब का पहला पन्ना

किस्सू उर्फ किशोर तिवारी ने जुर्म की किताब का पहला पन्ना 16 साल की उम्र में 1978 में लिखा। तब वह प्रदेश की राजधानी से 350 किमी दूर कटनी में एक डॉक्टर के यहां कंपाउंडर हुआ करता था। किस्सू का पहला विवाद कटनी के भीम सिंधी से हुआ।

इस विवाद में उसने भीम सिंधी पर चाकुओं से वार कर उसे घायल कर दिया था। कटनी के कोतवाली थाने में ये उसके खिलाफ दूसरी एफआईआर थी। इससे पहले एक मारपीट का मामला इसी थाने में दर्ज हो चुका था।

चाकूबाजी की इस वारदात में उसे जेल जाना पड़ा। 1979 में जमानत पर रिहा हुआ तो एक साल में उसके खिलाफ 7 मामले दर्ज हुए। सभी मारपीट धमकी से जुड़े केस थे। 1980 – 81 में भी मारपीट व धमकी की दो एफआईआर दर्ज हुई।

अब वो दो मामले जिनमें किस्सू को कोर्ट सजा सुनाने वाला है…

चचेरी बहन को छेड़ने और ब्लैकमेल करने वाले को चूने की भट्‌टी में जिंदा जलाया

किस्सू ने 1985 में हत्या की पहली वारदात को अंजाम दिया। इस वारदात को उसने इतने खौफनाक तरीके से अंजाम दिया था कि जबलपुर और कटनी में लोगों के बीच किस्सू,आतंक का पर्याय माने जाने लगा था।

किस्सू के अपराधों को नजदीक से कवर करने वाले कटनी के वरिष्ठ पत्रकार सत्यदेव चतुर्वेदी बताते हैं- किस्सू के एक रिश्तेदार की बेटी, जो जबलपुर में पढ़ती थी। ये रिश्ते में किस्सू की चचेरी बहन लगती थी। जबलपुर कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला राजेश सर्राफ उसके साथ छेड़छाड़ करने के साथ उसे ब्लैकमेल करने लगा था।

परिवार वालों ने इसका जिक्र किस्सू से किया। किस्सू अपने साथियों के साथ कार से जबलपुर पहुंचा। कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले राजेश उर्फ राजू सोनी को उठा लिया। उसे झुकेही के जंगल ले जाकर चूने की भट्टी में जिंदा जला दिया।

पुलिस को राजेश उर्फ राजू सोनी की लाश की राख व कुछ हडि्डयों के साथ एक अंगूठी ही मिली। ये अंगूठी इस केस में अहम सबूत है। इस मामले में अन्य अभियुक्तों को सजा हो चुकी है। किस्सू को सजा सुनाई जानी है, लेकिन वह तीन साल से फरार चल रहा था।

इसी मामले में एसपी जबलपुर को कोर्ट की अवमानना के चलते 48 घंटे का अल्टीमेटम मिला था। पुलिस को उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार का इनाम मिला था।

जीजा के चचेरे भाई के घर बमबाजी करने वाले को जिंदा जलाया

जबलपुर के राजू सोनी की हत्या मामले में किस्सू को जेल जाना पड़ा। जब वह जेल में था, उसी दौरान उसके जीजा के रिश्ते में चचेरे भाई एवं कांग्रेस नेता रमाकांत पाठक से कटनी के बदमाश राजेंद्र उर्फ डेऊ का विवाद हुआ।

राजेंद्र ने तब रमाकांत पाठक के घर बम फेंक दिया था। किस्सू जेल से जमानत पर छूटा, जब उसे इस घटना की जानकारी मिली तो 31 दिसंबर 1986 को उसने राजेंद्र को जबरन घर से उठाया।

अब जानिए किस्सू के बाकी अपराध के किस्से…

चुनौती देने वाले दो बदमाशों की कलाई काटी

दो हत्याओं के चलते किस्सू का पूरे कटनी क्षेत्र में दबदबा बन गया था। वह रेलवे यार्ड से बहाए जाने वाले खराब डीजल को कलेक्ट कर बेचने लगा था। कटनी के दो बदमाश मोहन यादव और बाबू खटीक ने इस धंधे में उसे चुनौती देने की कोशिश की।

जनवरी 1992 में किस्सू ने दोनों को बातचीत के लिए बुलाया और उनकी कलाई काट दी। इसके बाद दोनों को खुद ही अस्पताल भी ले गया। वहां डॉक्टर को धमकाते हुए बोला कि दोनों जिंदा रहने चाहिए। इसकी एफआईआर माधवनगर थाने में हुई थी। हालांकि इस मामले में वह बरी हो चुका है।

वकील ने झूठे मामले में फंसाया तो उसे गोली मारी

वर्ष 1992 में ही माधवनगर क्षेत्र में रहने वाला बदमाश लाली खुद ही सुअरमार बम फटने से घायल हो गया। उसने कटनी के वकील ब्रिजेश चंद्र (बीसी) निगम के साथ एक झूठी कहानी रची। लाली ने माधवनगर थाने में किस्सू के खिलाफ बम फेंक कर हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज करा दिया।

इसमें वकील बीसी निगम की प्रमुख भूमिका थी। किस्सू को इस केस के बारे में कुछ नहीं पता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

बहन को आत्मदाह के लिए मजबूर करने वाले जीजा के भाई को गोली मारी

किस्सू की बड़ी बहन ज्योति तिवारी की शादी कटनी के रहने वाले सतीश दुबे के साथ हुई थी। सतीश के बड़े भाई प्रदीप बिल्डर थे। उन्होंने कटनी में दुबे कॉलोनी बनाई थी। किस्सू बहन को बेहद प्यार करता था और अक्सर बहन के घर फरारी काटता था।

1993 में ज्योति तिवारी की संदिग्ध हालत में जलकर मौत हो गई। बाद में पता चला कि पति और जेठ की प्रताड़ना की वजह से ही उसने आत्मदाह किया था। बहन की मौत का बदला लेने के लिए किस्सू ने 1993 में जीजा के बड़े भाई प्रदीप की गोली मारकर हत्या कर दी और फरार हो गया। इसके एक साल बाद जीजा को भी मार डाला।

आखिरी अपराध के बाद राजस्थान में फरारी काटी, शादी भी की

किस्सू की जिंदगी में एक तरह खून-खराबा और बदला था तो दूसरी ओर उसे जबलपुर की एक नर्स से प्यार भी हुआ। उसने इस नर्स से शादी भी की थी। उसकी मौत के बाद उसने अपनी साली से शादी की। वह जयपुर में रहती है।

1994 में अपने जीजा की हत्या के बाद उसने राजस्थान में ही पूरी फरारी काटी। वह वहां एक मार्बल की खदान में रहकर ऑटो चलाने लगा था और 21 साल तक फरार रहा। 2015 में कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस सक्रिय हुई। इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई।

किस्सू की गिरफ्तारी में कटनी के राजनीतिक रसूख रखने वाला एक शख्स रोड़ा बनता था। उस वक्त तत्कालीन एसपी गौरव राजपूत से इस शख्स का एक अघोषित समझौता हुआ। शर्त रखी गई कि किस्सू को हाजिर करवा देंगे, लेकिन गिरफ्तारी कोतवाली की बजाय किसी दूसरे थाने में होना चाहिए।

इसकी वजह ये थी कि उस समय के कोतवाली टीआई किस्सू की गिरफ्तारी के बाद शहर में उसका जुलूस निकालना चाहते थे। प्लान के तहत किस्सू को आर्म्स एक्ट के प्रकरण में एनकेजे थाने में गिरफ्तार किया गया।

जमानत मिलने के बाद विवादित प्रॉपर्टी खरीदने लगा

किस्सू तिवारी जमानत मिलने के बाद कटनी में ही रहकर प्रॉपर्टी के काम करने लगा। वह कटनी में खासकर माधव नगर में विवादित जमीन खरीदने लगा। वह पांच करोड़ की विवादित जमीन एक करोड़ में खरीद लेता था।

उसे राजनीतिक संरक्षण भी हासिल था। दबंगई के चलते कोई उसके खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं कर पाता था। साल 2021 तक उसने प्रॉपर्टी के कारोबार से करीब 50 करोड़ की संपत्ती बनाई। कोविड के बाद 2021 में जब उसे कटनी कोतवाली में दर्ज राजेंद्र उर्फ डेऊ की हत्या मामले में सजा सुनाई जाने वाली थी, तो वह फरार हो गया।

अब जानिए कैसे पकड़ा गया किस्सू…

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, इंदौर व यूपी टीम रवाना की गई

कटनी के अपर सत्र न्यायालय और जबलपुर में सोनी हत्याकांड के मामले में कोर्ट स्थायी वारंट जारी करती रही, लेकिन पुलिस उसे तलाश नहीं पाई थी। जबलपुर जिला न्यायालय ने भी मार्च 2022 में उसके खिलाफ गैर मियादी वारंट जारी किया था।

जब दोनों ही प्रकरण में उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जबलपुर हाईकोर्ट ने एसपी जबलपुर आदित्य प्रताप सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की सुनवाई करते हुए किस्सू को 48 घंटे में गिरफ्तार करने का आदेश दिया।

22 मई को सुनवाई की तारीख निर्धारित की। इसके बाद कटनी और जबलपुर जिले की पांच अलग-अलग टीमें गठित की गई। किस्सू की छोटी बहन भारती तिवारी नाहर तिनसुकिया जिला डिब्रूगढ़ असम रहती है। फरारी में वह वहां भी छिपता रहा है। इसी आस में एक टीम असम भी गई थी। हालांकि वह वहां नहीं मिला।

इसके बाद पुलिस की टीम ने हिमाचल प्रदेश, इंदौर, दिल्ली और उत्तराखंड में उसके संभावित ठिकाने पर दबिश दी, लेकिन वह यहां भी नहीं मिला।

हरिद्वार में दूसरी पत्नी के साथ साधु बनकर रह रहा था

दरअसल, किस्सू की एक पत्नी हरिद्वार में रहती है। उसके वहां होने की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस हरिद्वार पहुंची तो पता चला कि वह अयोध्या श्रीराम मंदिर का दर्शन करने गया है। कटनी पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि थाना प्रभारी को किस्सू तिवारी की फोटो भेजी और उसकी गिरफ्तारी में सहयोग मांगा।

अयोध्या की पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पहले उसने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की। इस पर उसकी फोटो कटनी पुलिस को भेजी गई। फोटो पुष्टि के बाद उसे हिरासत में लिया गया। यहां से कटनी पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आई।

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