भाजपा ने छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में डेंजर जोन में आई 10 लोकसभा सीटों पर बाजी पलट कर राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। सवाल है कि भाजपा ने मिशन-29 के लिए वो कौन सी रणनीति अपनाई, जिससे कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई?
पांच लोकसभा सीटों पर तो भाजपा सीधे-सीधे नुकसान में दिख रही थी, जबकि पांच ऐसी सीटें थीं, जहां थोड़ा सा जोर लगाने पर कांग्रेस अच्छे नतीजे की उम्मीद कर सकती थी।
छह महीने पहले विधानसभा चुनाव में लोकसभावार मिले भाजपा-कांग्रेस और अब लोकसभा में मिले विधानसभा वार सीटों का एनालिसिस किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पढ़िए ये रिपोर्ट…
विधानसभा चुनाव में बीजेपी 5 लोकसभा सीटों पर पिछड़ी थी

अब जानिए इन सीटों के बारे में…
छिंदवाड़ा लोकसभा : कांग्रेस को 97 हजार 646 वोटों की लीड मिली थी। सभी 7 विधानसभा में कांग्रेस जीती थी।
मुरैना लोकसभा : कांग्रेस को 6 हजार 376 वोटों की लीड मिली थी। 8 में 5 विधानसभा कांग्रेस ने जीती थी।
भिंड लोकसभा : कांग्रेस को 6 हजार 904 वोटों की लीड मिली थी। 8 में 4 विधानसभा कांग्रेस ने जीती थी।
ग्वालियर लोकसभा : कांग्रेस को 23 हजार 250 वोटों की लीड मिली थी। 8 में भाजपा-कांग्रेस को 4-4 विधानसभा सीटें मिली थी।
मंडला लोकसभा: कांग्रेस को 16 हजार 82 वोटों की लीड मिली थी। 8 में 5 विधानसभा कांग्रेस ने जीती थी।

भाजपा ने आक्रामक अंदाज में नकुल को घेरा
भाजपा ने यहां नकुलनाथ को निशाने पर रखा। विधानसभा चुनाव में भाजपा सभी 7 सीटें हार गई थीं। वोट शेयर बढ़ाने के लिए भाजपा ने कांग्रेस को तोड़ने की रणनीति बनाई। अमरवाड़ा के विधायक कमलेश शाह को इस्तीफा दिलाकर शामिल किया। इस रणनीति से भाजपा यहां से 15 हजार की लीड लेने में कामयाब हुई।
इसके बाद छिंदवाड़ा के पूर्व विधायक व कमलनाथ के करीबी दीपक सक्सेना को भाजपा ने शामिल किया। इससे भाजपा यहां 13 हजार की लीड ले सकी। पांढुर्णा में भाजपा ने नपा अध्यक्ष संदीप घाटोड़े सहित कई पार्षद और सरपंचों को शामिल किया। यहां भाजपा 23 हजार की बढ़त लेने में सफल रही।
इसी तरह चौरई के पूर्व विधायक गंभीर सिंह और यहां विधानसभा में कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े बंटी पटेल भी भाजपा में शामिल हो गए। इसका नतीजा ये रहा कि 9 हजार मतों से आगे रही। भाजपा ने आक्रामक प्रचार के जरिए यहां की सभी 7 विधानसभाओं में कांग्रेस को मात देने में कामयाब रही।

कांटे की टक्कर में फंसी मुरैना की जीत में दलबदल से फायदा
विधानसभा चुनाव में भाजपा इस लोकसभा की 8 में 5 विधानसभा सीटें हार गई थीं। भाजपा ने कांटे की टक्कर में फंसी इस सीट को जीतने के लिए कांग्रेस नेताओं को तोड़ने की रणनीति बनाई। चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने विजयपुर के विधायक रामनिवास रावत को पार्टी में शामिल कराया। इससे इस सीट पर भाजपा 35 हजार की लीड लेने में सफल रही।
इसके बाद भाजपा ने दिमनी के पूर्व विधायक बलवीर दंडौतिया, सुमावली के पूर्व विधायक अजब सिंह कुशवाहा, मुरैना महापौर शारदा सोलंकी और मुरैना के पूर्व विधायक राकेश मावई को शामिल किया था। दिमनी में भाजपा को 16 हजार, सुमावली में 15 हजार की लीड लेने में सफल रहे।
जबकि मुरैना में कांग्रेस को सिर्फ 1141 वोटों की ही लीड मिल पाई। विधानसभा में इस सीट को कांग्रेस 19 हजार के अंतर से जीती थी।

कांग्रेस, बसपा के दो नेताओं को तोड़कर भिंड में जीत की राह की आसान
भाजपा छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा की 4 सीटों पर हार गई थी। कांग्रेस को भाजपा पर लगभग 7 हजार वोटों की बढ़त मिली थी। कांग्रेस ने फूल सिंह बरैया के तौर पर एक आक्रामक नेता को प्रत्याशी बनाया था।
भाजपा ने जनवरी में भांडेर के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के महामंत्री रहे कमलापत आर्य को शामिल किया। इसका फायदा ये मिला कि भांडेर के विधायक एवं लोकसभा प्रत्याशी फूल सिंह बरैया खुद अपनी सीट पर 1465 वोटों से पिछड़ गए, जबकि विधानसभा में वे 29 हजार से अधिक वोटों से जीते थे।
भिंड के पूर्व सांसद बसपा नेता रामलखन सिंह को भी भाजपा वापस लेकर आई। रामलखन सिंह का भिंड लोकसभा की सभी 8 विधानसभाओं में मजबूत वोट बैंक है। इसकी वजह से भाजपा भांडेर सहित 6 विधानसभाओं में कांग्रेस पर बढ़त बनाने में सफल रही।

कांग्रेस के पूर्व विधायक लाखन को तोड़ने से ग्वालियर में मिला फायदा
छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से 4 पर हार गई थी। तब भाजपा को कांग्रेस की तुलना में 23 हजार कम वोट मिले थे। इस अंतर को पाटने के लिए भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान करैरा के पूर्व विधायक लाखन सिंह बघेल को कांग्रेस से तोड़ लिया।
इसका फायदा इस विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी भारत सिंह कुशवाहा को मिला। वे इस सीट पर 32 हजार की लीड लेने में सफल रहे। जबकि उनकी कुल जीत का अंतर ही 70 हजार है। वहीं, भाजपा ने 2020 के उपचुनाव में पोहरी से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके एवं जनपद अध्यक्ष पारम सिंह रावत को भाजपा में शामिल किया था। वे सिंधिया समर्थक माने जाते हैं।
इसका फायदा ये मिला कि भाजपा जिस पोहरी सीट को विधानसभा में हार गई थी, वहां से वह 12 हजार वोटों की लीड लेने में सफल रही। भाजपा इस बार इस लोकसभा की 8 विधानसभाओं में 5 पर बढ़त बनाने में सफल रही।

डिंडोरी में ही कांग्रेस प्रत्याशी को मात देकर जीता मंडला
छह महीने पहले हुए चुनाव में कांग्रेस ने विधानसभा की 5 सीटें जीती थीं। भाजपा के दिग्गज नेता और अब सांसद बने फग्गन सिंह कुलस्ते खुद निवास सीट से हार गए थे। कांग्रेस को भाजपा की तुलना में तीन हजार की लीड मिली थी।
कांग्रेस ने इस लोकसभा सीट से डिंडोरी के मौजूदा विधायक ओमकार सिंह मरकाम को प्रत्याशी बनाया था, जबकि भाजपा की ओर से फग्गन ही चेहरा थे। भाजपा ने मरकाम को उन्हीं की सीट पर पटखनी देने की रणनीति बनाई।
इसी साल फरवरी में विधानसभा में निर्दलीय चुनाव लड़े जिला पंचायत अध्यक्ष रुदेश परस्ते सहित जिला पंचायत उपाध्यक्ष अंजू, कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष वीरेंद्र बिहारी शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य सहित नगर परिषद डिंडोरी के चार पार्षदों को शामिल किया।
इससे भाजपा डिंडोरी में 3 हजार की बढ़त लेने में सफल रही। इसके अलावा भाजपा ने कांग्रेस की जीती केवलारी व निवास में बढ़त लेकर मरकाम को हरा दिया।
विधानसभा चुनाव में बीजेपी की 5 लोकसभा सीटों पर लीड कम थी

अब जानिए इन 5 लोकसभा सीटों के बारे में

3 विधानसभा हारने वाली भाजपा ने टीकमगढ़ में बढ़ाया जीत का अंतर
टीकमगढ़ लोकसभा से जीते डॉ. वीरेंद्र खटीक 8वीं बार संसद में पहुंचे हैं। छह महीने पहले हुए विधानसभा में भाजपा इस लोकसभा में आने वाली 3 विधानसभा सीटें हार गई थीं। भाजपा को सभी 8 विधानसभाओं में मिले वोट कांग्रेस को मिले कुल वोट से महज 75 हजार ही अधिक थे।
भाजपा ने इस लोकसभा में बड़ी जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति अपनाई। जतारा के पूर्व विधायक दिनेश अहिरवार को भाजपा वापस लाई। इस सीट पर खटीक ने 49 हजार वोटों की लीड ली।
इसी तरह खरगापुर के पूर्व विधायक अजय यादव को शामिल कर भाजपा ने इस सीट पर अपनी बढ़त 57 हजार कर ली, जबकि छतरपुर जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता चंद्रशेखर तिवारी को भाजपा में शामिल कराकर पार्टी ने इस सीट पर 61 हजार की लीड ले ली। इस बार सभी 8 सीटों पर भाजपा ने बढ़त हासिल की है।

सीटिंग सांसद का टिकट काटा, फिर कैसे भारती पारधी बनी पहली महिला सांसद
बालाघाट लोकसभा में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में भाजपा 4 पर हार गई थी। भाजपा इस लोकसभा सीट पर विधानसभा में मिले वोटों के आधार पर सिर्फ साढ़े तीन हजार की लीड ही ले पाई थी। यही वजह थी, कि भाजपा ने अपने सीटिंग सांसद ढाल सिंह बिसेन का टिकट काटकर यहां भारती पारधी के रूप में पहली महिला प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया।
इस सीट को साधने के लिए भाजपा ने कांग्रेस के कद्दावर नेता अनुराग चतुर मोहता, अजय मिश्रा, कैलाश जैन, बालाघाट जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा लिल्हारे सहित कई जिला पंचायत सदस्यों को तोड़ा। इसका फायदा ये मिला कि विधानसभा में बालाघाट सीट हारने वाली बीजेपी ने 15 हजार की लीड ली।
सिवनी शहर में भाजपा ने आप नेताओं को टारगेट पर रखा। यहां से भाजपा को 88 हजार की लीड मिली। मतलब भारती पारधी को आधी लीड सिवनी विधानसभा में ही मिल गई। भाजपा ने इस बार सभी 8 विधानसभाओं में कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया।

5 विधानसभा हारी भाजपा ने धार में दिखाया कमाल
धार लोकसभा में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में छह महीने पहले हुए चुनाव में भाजपा 5 पर हार गई थी। भाजपा ने अपने सीटिंग सांसद छतर सिंह दरबार का टिकट काटते हुए पूर्व सांसद सावित्री ठाकुर को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा ने इस लोकसभा को साधने के लिए पूर्व सांसद गजेंद्र राजूखेड़ी को शामिल कराया।
इसके साथ ही महू से छह महीने पहले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उतरे अंतर सिंह दरबार को भाजपा ने पार्टी में शामिल किया। इसके अलावा धार नगर परिषद अध्यक्ष सीमा पाटीदार व कांग्रेस नगर अध्यक्ष विष्णु पाटीदार भी भाजपा में शामिल हो गए।
इसका फायदा ये मिला कि महू विधानसभा सीट पर बीजेपी को 79 हजार वोटों की लीड मिली। वहीं, धार विधानसभा में भी सावित्री 79 हजार की बढ़त लेने में सफल रहीं। इन दो सीटों ने ही भाजपा को जीत के करीब ला दिया। बीजेपी इस बार 5 विधानसभा सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रही।

छह महीने पहले 5 विधानसभा में पिछड़ी भाजपा ने ऐसे जीता खरगोन
खरगोन लोकसभा क्षेत्र की 8 विधानसभा सीटों में से 5 सीटें भाजपा हार गई थी। अब लोकसभा में कांग्रेस को इन सीटों पर नुकसान हुआ। इस बाजी को पलटने के लिए भाजपा ने विधानसभा परिणाम आने के बाद ही अपनी कोशिश शुरू कर दी थी। उसने सबसे पहले पानसेमल की पूर्व विधायक चंद्रभागा किराड़े को शामिल किया।
हालांकि, उनके शामिल होने से फायदा तो नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस के खिलाफ एक माहौल बना। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस को बड़ा झटका बड़वानी में दिया। यहां से जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह दरबार को तोड़ लिया।
बड़वानी विधानसभा में भाजपा के गजेंद्र को 24 हजार वोटों की लीड मिली। जबकि विधानसभा में ये सीट भाजपा हार गई थी। भाजपा को महेश्वर, कसरावद व खरगोन में बड़ी बढ़त मिली।

कांग्रेस के दिग्गज कांतिलाल भूरिया को रतलाम में भाजपा ने हराया
रतलाम-झाबुआ लोकसभा की 8 सीटों में छह महीने पहले हुए विधानसभा में भाजपा 4 ही जीत पाई थी। 3 कांग्रेस को एक सीट सैलाना पर भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर डोडियार की जीत हुई थी। कांग्रेस ने अपने दिग्गज आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया पर दांव खेला था।
भाजपा ने सीटिंग सांसद गुमान सिंह डामोर की बजाय वन मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान को उतारा था। परिणाम आया तो अनीता सैलाना छोड़कर सभी 7 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को हराने में सफल रहीं।
भाजपा ने चुनाव के दौरान रतलाम कांग्रेस के अध्यक्ष कैलाश जी पटेल सहित कई नेताओं को शामिल कराया था। भाजपा को सबसे अधिक फायदा रतलाम की शहर व ग्रामीण सीटों पर ही मिला। यहां भाजपा को 1.06 लाख की लीड मिली।