मोहन-कैलाश की सोच और मध्यप्रदेश सरकार का यह फैसला अच्छा है…कौशल किशोर चतुर्वेदी

मोहन-कैलाश की सोच और मध्यप्रदेश सरकार का यह फैसला अच्छा है…

संघर्ष तो बहुत होते हैं, पर सरकार का दिल पसीजे यह जरूरी नहीं है। ऐसा ही एक संघर्ष था, 29000 पेड़ों को कटने से बचाने का। यह खबर बहुत ही परेशान करने वाली थी कि पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत मध्यप्रदेश की हरी-भरी राजधानी भोपाल के बीचों-बीच 29,000 पेड़ काटने का प्रस्ताव है। इसकी भनक आमजन को लगी, तब इसका विरोध शुरू हुआ था। पिछले एक सप्ताह से हर रोज हजारों लोग पेड़ों को कटने से बचने और सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। तुलसी नगर एवं शिवाजी नगर के 29000 पेड़ों को कटने से बचने के लिए भोपाल का हर नागरिक संघर्ष कर रहा था। और पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की बात कही थी, पर बाद में इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोच-विचार कर यह फैसला किया कि पेड़ों को काटने कीं इस योजना से सरकार तौबा कर रही है। और इसके साथ ही राजधानी के बीचों-बीच बसे 29000 पेड़ों को नई जिंदगी मिल गई। मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इसके लिए बधाई के पात्र हैं। प्रदेश सरकार का यह फैसला ग्रीन भोपाल और ग्रीन मध्यप्रदेश बनाए रखने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। खास तौर से तब जब बढ़ते तापमान ने आमजन का जीवन नरक बना दिया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रत्येक उस नागरिक के लिए यह अच्छी खबर है जो डॉ.मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बिना देर किए यह दिल जीतने वाला फैसला किया है।

मध्य प्रदेश सरकार ने राजधानी भोपाल में मंत्रियों और विधायकों के लिए नए बंगले बनाने हेतु तुलसी नगर एवं शिवाजी नगर के इलाके को चुना था, जहां पर लगभग 60 साल पुराने 29000 पेड़ मौजूद हैं। सरकारी बंगले बनाने के लिए इन पेड़ों को काटा जाना था। जब भोपाल के जागरूक नागरिकों ने विरोध करना शुरू किया तो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादन ने आश्वस्त किया कि पेड़ों को काटा नहीं जाएगा, बल्कि उनका ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा। भोपाल के नागरिकों को यह समाधान मंजूर नहीं थी, क्योंकि पेड़ों के कटने के दर्द ने उनका दिल छलनी कर दिया था। इसलिए प्रदर्शन निरंतर जारी रहे। यहां तक कि जब केंद्रीय मंत्री बने मध्य प्रदेश के नेता शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया का 16 जून को रोड शो निकल रहा था, तब भी लोगों ने उनके सामने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 17 जून 2024 को मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान जारी किया कि, नये भोपाल के पुनर्घनत्वीकरण योजना के पर्यावरण संरक्षण एवं क्षेत्र में विद्यमान वृक्षों को देखते हुए प्रस्तुत प्रस्ताव को संपूर्ण विचारोपरांत अस्वीकृत किया जाता है। और अन्य वैकल्पिक स्थानों के परीक्षण के निर्देश दिए गए। नवीन प्रस्ताव हेतु प्रारंभिक स्तर पर भी नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों से विचार विमर्श भी किया जाएगा।

तो यह हुई न बात, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में रियल हीरो का जज्बा रखने का भाव डॉ. मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय ने प्रकट किया है। उम्मीद यही है कि इस तरह की नीति पूरे मध्यप्रदेश के लिए बने, ताकि पहली बात यह कि मानव जीवन के लिए वरदान वृक्षों का जीवन बचा रह सके। दूसरी बात यह कि ग्रीन मध्यप्रदेश और क्लीन मध्यप्रदेश पूरी दुनिया में मिसाल पेश कर सके।मोहन-कैलाश की सोच और मध्यप्रदेश सरकार का यह फैसला वाकई बहुत अच्छा है और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उदाहरण है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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