मध्यप्रदेश। फौजी सुरेंद्र सिंह की लापता होने की मिस्ट्री, 14 साल बाद भी बेटे की तलाश जारी, पिता ने बेटे को ढूंढने के लिए बेची 9 बीघा जमीन – देखें VIDEO

मैं अपने बेटे के लिए हर सोमवार को पशुपतिनाथ का व्रत रखती हूं। मुझे पता है कि वो एक दिन सही सलामत मेरे पास लौट आएगा। बेटा मेरे सपने में आता है। वो मुझसे कहता है- मां, मैं उन्हें छोडूंगा नहीं।’

ये कहते हुए छाया सोलंकी रो पड़ती हैं। मंदसौर की रहने वाली छाया फौजी सुरेंद्र सिंह सोलंकी की मां हैं। सुरेंद्र सिंह पिछले 14 साल से लापता है। ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में है क्योंकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 27 मई 2024 को सुरेंद्र के परिजन को फैमिली पेंशन देने का फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘जब आर्मी का कोई सैनिक ड्यूटी से लापता हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है तो सेना का व्यवहार उसके परिजन के प्रति रूखा क्यों हो जाता है?’

दरअसल, सुरेंद्र के लापता होने के बाद उसके परिजन को 2012 से सिर्फ गुजारा भत्ता मिला। कुछ टाइम बाद नियमों के कारण इसमें भी रुकावट आने लगी। इसके बाद परिवार ने फैमिली पेंशन हासिल करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट का फैसला आने के बाद सुरेंद्र के परिजन से बात की तो पता चला कि 14 साल से वे उसकी तलाश कर रहे हैं जबकि आर्मी उसे मृत घोषित कर चुकी है।

परिजन को यकीन है कि सुरेंद्र जिंदा है। उसकी तलाश में पिता ने 9 बीघा जमीन तक बेच दी। आखिर सुरेंद्र कैसे लापता हुआ, आखिरी बार उसकी किससे बात हुई थी, परिजन ने उसे तलाश करने के लिए किस तरह के जतन किए..पढ़िए रिपोर्ट

20 साल की उम्र में सेना में भर्ती, 30 साल की उम्र में बने ट्रेनर

सुरेंद्र सिंह सोलंकी

2001 में 12वीं पास कर आर्ट्स कॉलेज में दाखिला

BA की डिग्री छोड़ 20 साल की उम्र में सेना में भर्ती

2002 में सिग्नल मैन के पद पर अमृतसर में जॉइनिंग

• 8 साल तक जम्मू-कश्मीर, पंजाब सहित कई राज्यों में ड्यूटी

जनवरी 2010 में गोवा में 5 महीने की स्पेशल ट्रेनिंग

ट्रेनिंग में टॉप किया, 3 महीने के लिए बने ट्रेनर

 

जानिए, सुरेंद्र सिंह कैसे और कब लापता हुआ

सुरेंद्र के बड़े भाई वीरेंद्र बताते हैं कि जनवरी 2010 में सुरेंद्र के साथ देशभर की आर्मी यूनिट के करीब 25 फौजियों को 5 महीने की स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चुना गया था। जब ट्रेनिंग खत्म हुई तो बाकी फौजी अपनी यूनिट में लौट गए, लेकिन सुरेंद्र को तीन महीने के वहां ट्रेनर की जिम्मेदारी दी।

इसके बाद वह 20 दिन की छुट्टी पर घर आया था। उसे फिर गोवा जाना था। 24 जुलाई 2010 को मैं और पिताजी उसे खंडवा स्टेशन पर छोड़ने गए थे। वास्कोडिगामा एक्सप्रेस से वह गोवा के लिए रवाना हुआ। उसे घर से विदा करते वक्त इस बात का इल्म नहीं था कि वह कभी वापस नहीं लौटेगा।

सुरेंद्र की मां छाया सोलंकी बताती है कि 25 जुलाई को बेटे का जन्मदिन था। सुबह 9 बजे उसने मुझे कॉल किया था। बताया था कि गोवा के मडगांव स्टेशन पहुंच गया है और अब आर्मी कैंप जा रहा है। पूरे परिवार ने उसे बर्थडे विश किया था।

वीरेंद्र कहते हैं कि तब हमें अंदाजा भी नहीं था की सुरेंद्र अचानक लापता हो जाएगा। तीन दिन बाद 28 जुलाई को सेना के अधिकारी ने हमसे पूछा कि सुरेंद्र क्यों नहीं पहुंचा, तो मैंने कहा कि वो तो पहुंच चुका है। मगर, अफसर ने कहा कि वह आर्मी कैंप पहुंचा ही नहीं।

 

जैसे ही अफसर ने हमें ये बात बताई, मैं और पिताजी उसे तलाश करने गोवा निकल गए। वहां पुलिस ने हमें बताया कि सुरेंद्र तो रास्ते में लापता हो गया था। जबकि हमें उसने बताया था कि वो गोवा पहुंच गया था।

– वीरेंद्र सोलंकी, सुरेंद्र के भाई

पुलिस ने सपोर्ट नहीं किया तो परिवार ने खुद निकाले सीसीटीवी फुटेज

सुरेंद्र के पिता गोवर्धन बताते हैं कि जब गोवा पुलिस ने किसी तरह की मदद नहीं की तो हमने स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज निकलवाए। सीसीटीवी फुटेज में सुरेंद्र मडगांव स्टेशन के ब्रिज पर आखिरी बार नजर आया था। जब हमने ये पुलिस को दिखाए तो उन्हें भरोसा हुआ कि वह गोवा में उतरा था।

इसके बाद उसके फोन की कॉल डिटेल भी निकाली, जिसमें आखिरी बार मडगांव स्टेशन पर ही उसका नेटवर्क मिला। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। इधर हम लोगों ने भी गोवा में उसे ढूंढने के लिए लोकल अखबार में इश्तिहार दिए। उसका पता बताने वाले के लिए इनाम भी घोषित किया।

 

मैं दो महीने तक गोवा में रहा, इस दौरान गोवा का हर कोना छान मारा, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। आर्मी और पुलिस से जैसा सपोर्ट मिलना चाहिए था, वैसा सपोर्ट नहीं मिला। थकहार कर मैं वापस लौट आया।

– गोवर्धन सिंह सोलंकी, सुरेंद्र के पिता

परिवार ने बेची 9 बीघा जमीन, दो राज्यों के सीएम से मिले

सुरेंद्र के पिता गोवर्धन सिंह कहते हैं कि बेटे की तलाश में देश का कोना कोना छान मारा, लेकिन वह नहीं मिला। एक शहर से दूसरे शहर में उसकी तलाश के लिए 9 बीघा जमीन भी बेच दी। अब हम शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं

टेंशन के चलते उसकी मां डायबिटीज की मरीज हो गई है और मुझे हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। गोवर्धन कहते हैं कि बेटे की तलाश करने के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर गोवा के तत्कालीन सीएम मनोहर पर्रीकर से भी मुलाकात की थी। सभी ने आश्वासन दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

उनसे पूछा कि क्या अब बेटे के वापस लौटने की उम्मीद है, तो बोले- हम तो उम्मीद छोड़ ही नहीं रहे, वो वापस आ जाए तो ये चमत्कार ही होगा। मेरे परिचित मुझे कहते हैं कि वह सीक्रेट मिशन पर होगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई सीक्रेट मिशन इतने सालों तक चलता है।

वे कहते हैं कि अगर वो बॉर्डर से गायब होता तो हम समझ सकते थे कि दुश्मन ने उसके साथ कुछ किया होगा। वह तो देश के अंदर ही लापता हो गया। अब हम क्या समझें हर तरह से सोच कर देख लिया पर कुछ समझ ही नहीं आया।

 

माता-पिता के लिए सुरेंद्र की पुरानी तस्वीरें ही सहारा हैं। उन्हें उम्मीद है कि बेटा लौट कर आएगा।

मां बोलीं- मुझे अभी भी उम्मीद, बेटा एक दिन वापस आएगा

सुरेंद्र की मां छाया सोलंकी को उम्मीद है कि उनका बेटा वापस लौटेगा। वो कहती हैं ‘मैं बेटे के लिए हर सोमवार को पशुपतिनाथ का व्रत रखती हूं। छाया कहती हैं कि जब वह लापता हुआ था तब डेढ़ महीने पहले ही उसकी सगाई हुई थी। वह अपनी पसंद की लड़की से शादी करने वाला था।

छाया कहती है उसकी तलाश में हमने जादू टोने का भी सहारा लिया। किसी ने हमसे 20 हजार रु. मांगे किसी ने 25 हजार। हमने पैसा खर्च करने में कोई कंजूसी नहीं की, कई बाबाओं के चक्कर भी काटे। जिसने जो उपाय बताया वो किया, मगर उसका कुछ पता नहीं चला।

वो कहती है कि सुरेंद्र के पापा की तबीयत खराब रहती है, जब बेटे का जिक्र आता है तो उनकी तबीयत और खराब हो जाती है। उनके सामने रो भी नहीं पाती, इसलिए अकेले में जाकर ही रोती हूं। बेटे को याद करती हूं।

 

मैं अब तक कई शहरों के रेलवे स्टेशन पर उसे ढूंढ चुकी हूं। जहां जाती हूं और वहां बैठे भिखारियों में अपने बेटे को तलाश करती हूं। मुझे लगता है कि किसी ने उसपर जादू टोना किया है। वो ऐसे कैसे गायब हो सकता है।

-छाया सोलंकी, सुरेंद्र की मां

भाई ने कहा- 2018 में सेना ने गुजारा भत्ता बंद करने का नोटिस दिया, डेथ सर्टिफिकेट भी गलत बना

सुरेंद्र के भाई वीरेंद्र कहते हैं कि भाई को तलाशने में किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली। दो साल तक हम उसे तलाश करते रहे। इसके बाद 2012 में सेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में उसे 25 जुलाई 2010 को मृत घोषित कर दिया।

तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी का इस संबंध में पत्र भी आया था, जिसमें लिखा था कि आपके भाई की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद हमें गुजारा भत्ता मिलना शुरू हुआ। वीरेंद्र कहते हैं कि 6 साल बाद 2018 में सेना की तरफ से एक नोटिस मिला कि सुरेंद्र का डेथ सर्टिफिकेट जमा करवाइए वर्ना सामान्य पेंशन बंद कर दी जाएगी।

वे कहते हैं कि हमें जानकारी नहीं थी कि डेथ सर्टिफिकेट कहां से बनेगा। दो साल तक भटकने के बाद 2020 में हमने मंदसौर सेशन कोर्ट में डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए दावा लगाया। वहां से जो डेथ सर्टिफिकेट बना उसमें वो तारीख दर्ज की गई जिस दिन कोर्ट में सुनवाई हुई थी। यानी सुरेंद्र की मौत के 10 साल बाद का डेथ सर्टिफिकेट बना।

इस सर्टिफिकेट को देखकर सेना ने नोटिस भेजा कि आपको आठ साल तक जो भत्ता दिया उसकी रिकवरी की जाएगी और फैमिली पेंशन 2020 से मिलेगी। इसे देखते हुए कोर्ट में फर्स्ट अपील की गई जिसमें कोर्ट ने लोअर कोर्ट के आदेश को यथावत रखा। इसके बा द दूसरी अपील की गई और कोर्ट ने परिवार को राहत दी।

दूसरी अपील में हाईकोर्ट ने सारे पक्ष को सुनते हुए फैसला सुनाया कि जिस दिन से सुरेंद्र लापता हुआ था उसी दिन से परिवार को फैमिली पेंशन दी जाए। कोर्ट ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाकर एक नजीर पेश की है।

– नितिन सिंह भाटी, एडवोकेट

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *