एक जुलाई से धारा 302,307 और 420 बन जाएगी इतिहास

अलीगढ़। 1860 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में भाजपा सरकार ने 16 दशक बाद 2023 में व्यापक बदलाव किया है। जिसमें सिर्फ धाराएं ही नहीं बदलीं बल्कि सजा और जुर्माने के प्रावधान में भारी भरकम बदलाव किया गया है। आने वाले समय में लोगों की जुबान पर रटने वाली 302 हत्या अब 103 (1), ठगी या धोखाधड़ी 420 अब 118 (4), चोरी 379 अब 303 (2) व दुष्कर्म 376 आईपीसी अब 64 बीएनएस कहलाएंगी। आने वाले समय में अब इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होगा। अधिवक्ता मुंतजिम किदवई ने बताया कि सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में करीब पांच 4 से पांच करोड़ केस लंबित हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं। ऐसे में नए कानून तहत नए नियमों का पालन होगा। कोर्ट में जज की संख्या का कम होना भी केस लंबित के होने का कारण है। बताया कि लगभग साढ़े चार से पांच हजार जज के पद खाली हैं।

124 (क) राजद्रोह खत्म अब देश द्रोह में जाएंगे जेल

अंग्रेजों के समय के कानून 124 (क) आईपीसी को नए कानून के तहत खत्म कर दिया गया है। उसकी जगह देशद्रोह कर दिया गया है। लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना कोई भी कर सकता है। मगर किसी ने सशस्त्र विरोध, बम धमाका करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, उसे आजाद रहने का हक नहीं, उसे जेल जाना ही पड़ेगा।

आईपीसी की 511 धारा अब बीएनएस में 356 धारा

अधिवक्ता प्रमोद कुलश्रेष्ठ ने बताया कि 1860 की आईपीसी आने वाले दिनों में गुजरे हुए जमाने की तरह हो जाएगी, क्यों कि एक जुलाई से सरकार बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू कर रही है। आईपीसी में 511 धारा थी, जबकि बीएनएस में 356 धारा है। 175 धाराएं बदल गई हैं। 8 नई जोड़ी गई हैं। 22 धाराएं खत्म हो गई हैं। इसी तरह सीआरपीसी में में 533 धाराएं हैं। इनमें 160 धाराएं बदली गई हैं। नौ नई धारा जोड़कर नौ को खत्म कर दिया गया है। इसमें पूछताछ से ट्रायल तक सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने का प्रावधान हो गया है।

 

अपराध   1860 आईपीसीधारा   बीएनएस 2023धारा
हत्या 302  103 (1)
जान से मारने का प्रयास  307      109
गैर इरादतन हत्या 304 (ए)  106
दहेज हत्या 304 (बी) 80
भ्रूण हत्या 313 89
आत्महत्या को उकसाना 306 108
अपहरण    363              137(2)
  लूट  302  309(ए)
अश्लील हरकत 354    79
अभद्रता व छेड़‌छाड़ 294    296

 

अचानक धाराओं में बदलाव करना सही नहीं

अलीगढ़ बार काउंसिल के अध्यक्ष ठाकुर दिनेश सिंह ने कहा कि नए नियमों के तहत धारा में बदलाव किया गया है। इससे अब नए सिरे से अधिवक्ताओं को पढ़ना पड़ेगा, जो आसान नहीं होगा। हम सालों से जो धारा पढ़ते आए है अचानक बदलाव करना सही नहीं है। हम इसका विरोध करेंगे

समय के साथ अपराध के तरीकों में भी बदलाव आया

अधिवक्ता मुंतजिम किदवई ने कहा कि समय के साथ अपराध के तरीकों में भी बदलाव आया है। ऐसे में आईपीसी में बदलाव सही है। बदलते हुए सामाजिक अपराधों, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध, हत्या तथा राष्ट्र के विरुद्ध अपराध को प्रमुखता दिया गया है।

दिक्कत तो होगी लेकिन यह संशोधन सही है

अधिवक्ता प्रमोद कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में कई अपराधों में सख्त से सख्त सजा का प्रावधान है। साथ ही सबसे बड़ी बात तो यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम तीन साल में देना होगा। दिक्कत तो होगी लेकिन यह संशोधन सही है।

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