
मैं वृंदावन की रहने वाली हूं। कृष्ण और राधा के बारे में बचपन से पढ़ा-सुना है। 84 कोस की परिक्रमा की है। पं. प्रदीप मिश्रा से मिलूंगी तो उनके राधा रानी पर दिए बयान के बारे में पूछूंगी।’
कृष्ण भगवान वृंदावन और राधा रानी बरसाना की ही हैं। यह बात कई ग्रंथों में लिखी है। आज से नहीं, जन्मों से कही-सुनी जा रही है।’
ये दोनों बयान सीहोर के पास पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में आए श्रद्धालुओं के हैं। वे भी पंडित मिश्रा के राधा रानी पर दिए बयान से नाराज हैं। कहते हैं, ‘पंडित जी से मिलेंगे तो उनसे जरूर पूछेंगे कि उन्होंने ऐसा क्यों बोला? कौन नहीं जानता कि राधाजी बरसाना की रहने वाली थीं। उनको माफी मांगनी चाहिए।’
मथुरा में भी संत समुदाय ने ऐलान कर दिया है कि यदि हफ्तेभर में पं. प्रदीप मिश्रा ने माफी नहीं मांगी तो वे उनका बहिष्कार करेंगे। इस ऐलान के बाद 25 जून को शाम 5 बजे पंडित मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। बताया गया कि इसमें वे अपने बयान पर खेद प्रकट करेंगे। वृंदावन के संतों से माफी भी मांगेंगे।
लेकिन पंडित मिश्रा जब पत्रकारों के सामने आए तो उन्होंने कहा कि वे सिर्फ कावड़ यात्रा पर बात करेंगे। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर वे कोई बातचीत नहीं करेंगे। पंडितजी के नजदीकी लोग भी उनके इस रुख से चौंक गए। इसका मतलब ये भी है कि पंडित प्रदीप मिश्रा माफी मांगने को तैयार नहीं हैं।
गोस्वामी तुलसीदास पर दिए बयान पर भी विवाद
कथावाचक पंडित मिश्रा का 18 जून को तुलसीदास जी को लेकर दिया बयान भी वायरल हो रहा है। इसमें वे खुद को स्वामी तुलसीदास की तरह ‘गंवार’ बता रहे हैं। इस पर उज्जैन पुलिस को शिकायत की गई है।
संतों ने कहा, ‘पंडित प्रदीप मिश्रा जब तक माफी नहीं मांगते, तब तक उज्जैन में उनकी कोई भी कथा संत समाज होने नहीं देगा।’ पढ़िए, सीहोर के कुबेरेश्वर धाम से लेकर उत्तर प्रदेश के ब्रज तक इस विवाद पर ये रिपोर्ट.

बरसाना में 24 जून को साधु-संत, धर्माचार्यों की महापंचायत हुई। इसमें 7 संगठनों ने हिस्सा लिया। उज्जैन में भी प्रदीप मिश्रा के खिलाफ 13 अखाड़ों के संतों ने प्रदर्शन किया।
धर्माचार्य बोले- बरसाना आकर माफी मांगें प्रदीप मिश्रा
बरसाना में पद्मश्री रमेश बाबा के गहवर वन क्षेत्र स्थित मान मंदिर में साधु-संत, धर्माचार्य और ब्रज के लोगों की महापंचायत हुई। इसमें कहा गया, ‘प्रदीप मिश्रा राधा रानी के चरणों में आकर नाक रगड़ें और माफी मांगें।’
महापंचायत में 7 संगठनों के सदस्य शामिल हुए। धर्माचार्यों ने पं. मिश्रा को शास्त्रार्थ करने की खुली चुनौती दी लेकिन वे नहीं आए। पद्मश्री रमेश बाबा ने कहा- राधा रानी श्रीकृष्ण की आत्मा हैं। महापंचायत में जो निर्णय लिया जाएगा, वही सर्वमान्य होगा। हम भी वही मानेंगे।
राधाकांत शास्त्री ने कहा- हमारे फॉलोअर्स पूरी दुनिया में हैं। अगर प्रदीप मिश्रा ने माफी नहीं मांगी तो उन्हें बता दिया जाएगा कि वो कितने सामान्य प्राणी हैं। प्रदीप मिश्रा ने बहुत खराब टिप्पणी की है। साधु-संतों और भक्तों का अपमान किया है। उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा।
धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा- प्रदीप मिश्रा ने अहम में आकर जो अमर्यादित टिप्पणी की थी, उसके लिए माफ नहीं करेंगे। हमने 7 दिन का समय दिया था लेकिन उन्होंने उल्टा ब्रजवासियों को धेनु का सुर कह डाला। तुलसीदास जी को लेकर भी गलत बयान दिया

अब जानिए, कुबेरेश्वर धाम में क्या चल रहा है…
हालांकि, कुबेरेश्वर धाम में भक्त अभी भी आ रहे हैं, लेकिन उनके चेहरों पर संशय के भाव दिखने लगे हैं। मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक पंडित मिश्रा के बयान पर चर्चा चल रही है। ज्यादातर भक्त कैमरे पर पंडित मिश्रा की आलोचना करने से परहेज करते हैं लेकिन ये जरूर कहते हैं कि इस बात से उन्हें ठेस पहुंची है।

भक्तों ने कहा- उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था
इंदौर से आए संजय राठौर कहते हैं- गुरु जी ने कहा था कि राधा रानी बरसाना की नहीं है। इससे भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। पंडित जी को ऐसा नहीं कहना चाहिए था।
उन्हीं के पड़ोस में बैठे हरियाणा से आए लोग बोले कि पंडितजी ने जो कहा, वो गलत है। उन्हें ऐसा बोलने से पहले सोचना चाहिए था कि वे क्या कह रहे हैं।

दुकानदार बोले- पंडित जी को ऐसी बातों से परहेज करना चाहिए
मंदिर परिसर के बाहर दुकानदारों का भी यही कहना है कि पंडित जी को ऐसी कोई भी बात कहने से परहेज करना चाहिए, जो सनातन को बांटती हो। वहीं, छत्तीसगढ़ के रायपुर से आए एक परिवार ने कहा कि ऐसा कोई विवाद है ही नहीं। ये तो सब मीडिया का बनाया हुआ बखेड़ा है। न तो पंडितजी ने ऐसा कहा, न ही प्रेमानंद महाराज ने। ये सब बातें काट छांटकर सनातन को बदनाम करने के लिए बनाई जा रही है।
उधर, पंडित मिश्रा के ट्रस्ट से जुड़े लोग कहते हैं कि पंडित जी अपने बयान पर खेद प्रकट करना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने विचार बदला। वे खुद जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। पंडित मिश्रा से उनके मोबाइल पर संदेश भेजकर उनसे संपर्क करने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

प्रदीप मिश्रा ने कहा था- राधा रावल की रहने वाली थीं
पं. प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में कहा था- राधा के पति का नाम अनय घोष, उनकी सास का नाम जटिला और ननद का नाम कुटिला था। राधा जी का विवाह छाता में हुआ था। राधा जी बरसाना की नहीं, रावल की रहने वाली थीं। बरसाना में तो राधा जी के पिता की कचहरी थी, जहां वह सालभर में एक बार आती थीं।
इस बयान पर प्रेमानंद महाराज ने पलटवार किया था।

मिश्रा ने कहा था- कुछ लोग शिव पुराण का विरोध करना चाहते हैं
पं. मिश्रा ने कहा था- कुछ लोग शिव पुराण का विरोध करना चाहते हैं। इस व्यास पीठ का विरोध करना चाहते हैं। प्रदीप मिश्रा का विरोध करना चाहते हैं। वो लोग राधा रानी की आड़ में मुझे बदनाम करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा था- ब्रजवासी इतना भोला है कि वो समझ नहीं पा रहा। जिस दिन आप कहो, राधा रानी के चरणों में आकर दंडवत कर लूं। आप बोलो, जितने दिन तक राधा रानी के चरणों में पड़ा रहूं। मेरी मां हैं वो। उनसे मेरा बैर नहीं है।

प्रेमानंद जी का प्रदीप मिश्रा को जवाब- तुम जानते ही क्या हो
प्रेमानंद जी महाराज ने 10 जून को प्रदीप मिश्रा को जवाब दिया। कहा- लाड़ली जी के बारे में तुम्हें पता ही क्या है? तुम जानते ही क्या हो? अगर तुम किसी संत के चरण रज का पान करके बात करते तो तुम्हारे मुख से कभी ऐसी वाणी नहीं निकलती।
जैसा वेद कहते हैं, राधा और श्रीकृष्ण अलग नहीं हैं। तुझे तो शर्म आनी चाहिए। जिसके यश का गान करके जीता है, जिसका यश खाता है, जिसका यश गाकर तुझे नमस्कार और प्रणाम मिलता है, उसकी मर्यादा को तू नहीं जानता।
