कोरोना की वैक्सीन को लेकर WHO प्रमुख का बड़ा एलान

दुनिया भर में लोगों की नज़रें कोरोना वैक्सीन पर टिकी हुई है. वहीं अब डब्लूएचओ ने उम्मीद करते हुए कहा कि इस साल के अंत तक कोरोना वैक्सीन बन कर  तैयार हो सकती है। उन्होंने वैक्सीन के उपलब्ध होने पर समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी नेताओं के बीच एकजुटता और राजनीतिक प्रतिबद्धता का आह्वान किया।

इस साल के अंत तक बन जाएगी वैक्सीन
टेड्रोस ने डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में कहा कि हमें वैक्सीन की जरूरत होगी और आशा है कि इस वर्ष के अंत तक हमारे पास एक वैक्सीन हो सकती है। हमें इसकी उम्मीद है। इस बैठक में डब्लूएचओ कोरोना वायरस महामारी की वैश्विक प्रतिक्रिया की जांच कर रहा है।

दुनिया की 10 फीसदी आबादी को कोरोना
कोरोना वायरस को लेकर सोमवार को हुई डब्लूएचओ के 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में डॉ माइकल रेयान ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया की बड़ी आबादी खतरे में है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में हर 10 में से एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है।

इस साल के अंत तक वैक्सीन बना लेगी फाइजर
दिग्‍गज दवा निर्माता कंपनी फाइजर कंपनी को उम्मीद है कि इस साल अक्टूबर की शुरूआत में उसे रेगुलेटरी से अप्रूवल मिल जाएगा और साल के अंत तक वह कोविड-19 वैक्सीन बाजार में उतार देगी। फाइजर अपने जर्मन साझेदार बायोएनटेक के सहयोग से वैक्सीन विकसित कर रही है। उसने 10 करोड़ डोज देने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ लगभग 2 अरब डॉलर का सौदा भी किया है।

 

ऑक्सफर्ड और एस्ट्राजेनेका भी पीछे नहीं
यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) ने गुरुवार को कहा कि उसने वास्तविक समय में एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के संभावित COVID-19 वैक्सीन के आंकड़ों की समीक्षा शुरू कर दी है, इस तरह के कदमों का उद्देश्य वैक्सीन के क्षेत्र में किसी भी अनुमति की प्रक्रिया को तेज करना है। इस बात से ब्रिटिश वैक्सीन की संभावना बढ़ जाती है, जिसे COVID-19 के खिलाफ एक सफल वैक्सीन की दौड़ के आगे निकलना माना जा रहा है। यह यूरोप में नये कोरोना वायरस बीमारी के इलाज के लिए अनुमति पाने वाली पहली वैक्सीन बनी है।

डब्लूएचओ के COVAX से जुड़े दुनिया के 168 देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवैक्स परियोजना से दुनिया के 168 देश जुड़ चुके हैं। लेकिन, अभी तक अमेरिका, रूस और चीन इस गठबंधन में शामिल नहीं हुए हैं। इसका मकसद वैक्सीन डिवेलपमेंट, प्रॉडक्शन और हर किसी तक इसकी पहुंच बनाने की है। इस कोलैबोरेशन का नेतृत्व Gavi की तरफ से किया जा रहा है। Gavi एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (CEPI) और WHO का गठजोड़ है

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