
बदल गया है फकीर…
पैरों में चप्पल, ढ़ीली शर्ट-पैंट और सिर के बालों पर फैली सफेदी… चंपई सोरेन की यही पहचान है…वे सादगी से जीवन जीते रहे हैं…उनका अंदाज फकीराना रहा है। पर अब यह फकीर …फकीर नहीं रहा। मान और अपमान में फर्क करने की उम्मीद शायद ही कोई फकीर से करे…पर राजनीति में अब तक फकीराना अंदाज में जिए चंपई सोरेन अब फकीर नहीं रहे। मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने वाली पार्टी से वह बेहद खफा होकर अब परिवारवाद और वंशवाद की विरोधी पार्टी में जाने को हैं। क्योंकि परिवारवाद की वजह से चंपई रंग बदलने को मजबूर हुए हैं। चंपई का मतलब पीला रंग होता है, तो अब चंपई ने केसरिया रंग में रंगने का मन बना लिया है। हालांकि चंपई को यह बात तब भी पता थी, जब वह मुख्यमंत्री बने थे…कि हेमंत सोरेन की वापसी पर पद से विमुख होना पड़ेगा। और उन्होंने पद छोड़कर सोरेन परिवार की उम्मीदों पर खरे भी उतरे। पर अब वह पद छोड़ने के दरमियान अपने संग हुए व्यवहार से बेहद खफा हैं। और अपमान ने फकीर के अंदाज को लगता है अमीरी में तब्दील कर दिया है। और अब वह जल्दी ही नए रंग में रंगे नजर आएंगे।
चंपई वैसे बहुत सरल स्वभाव के रहे हैं।कभी किसी को दिक़्क़त हुई, तो उन्हें टैग कर सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले सोरेन चंद मिनटों में उस समस्या का समाधान करवाने के लिए जाने जाते रहे हैं। हो सकता है उनका यह रूप अब नए दल में दिखे। हो सकता है वह फिर से मुख्यमंत्री के पद की तरफ मुख करते दिख जाएं। हो कुछ भी सकता है, पर फिलहाल उन्होंने अपने पार्टी छोड़ने की तर्कसंगतता को प्रमाणित कर दिया है। एक्स पर उनकी पीड़ा छलक गई है। चंपई सोरेन ने अपने तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जेएमएम को हटा दिया है। लिखा है, ‘पिछले तीन दिनों से हो रहे अपमानजनक व्यवहार से भावुक होकर मैं आंसुओं को संभालने में लगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ कुर्सी से मतलब था। मुझे ऐसा लगा, मानो उस पार्टी में मेरा कोई वजूद ही नहीं है, कोई अस्तित्व ही नहीं है, जिस पार्टी के लिए हम ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इस बीच, कई ऐसी अपमानजनक घटनाएं हुईं, जिसका जिक्र फिलहाल नहीं करना चाहता। इतने अपमान एवं तिरस्कार के बाद मैं वैकल्पिक राह तलाशने हेतु मजबूर हो गया।’
चंपई सोरेन ने एक्स पर एक पोस्ट की है, इसमें उन्होंने अपना दुख व्यक्त करते हुए
‘मेरे पास तीन विकल्प’
अपने पोस्ट में चंपई सोरेन ने आगे लिखा है, ‘कहने को तो विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है, लेकिन मुझे बैठक का एजेंडा तक नहीं बताया गया था। बैठक के दौरान मुझसे इस्तीफा मांगा गया। मैं आश्चर्यचकित था, लेकिन मुझे सत्ता का मोह नहीं था, इसलिए मैंने तुरंत इस्तीफा दे दिया, लेकिन आत्मसम्मान पर लगी चोट से दिल भावुक था।” उन्होंने कहा, “मैंने भारी मन से विधायक दल की उसी बैठक में कहा कि आज से मेरे जीवन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।” उन्होंने कहा, “इसमें मेरे पास तीन विकल्प थे। पहला- राजनीति से सन्यास लेना, दूसरा- अपना अलग संगठन खड़ा करना और तीसरा- इस राह में अगर कोई साथी मिले, तो उसके साथ आगे का सफर तय करना। उस दिन से लेकर आज तक और आगामी झारखंड विधानसभा चुनावों तक इस सफर में मेरे लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं।’
और अब यह खुले हुए विकल्प बंद होते देखे जा रहे हैं। चंपई अब झामुमो से मुक्त होकर कमल की तरह किसने की राह पर हैं। और ऐसे में झारखंड के ताज से झामुमो मुक्त हो सकता है। क्या होगा सब सामने आ ही जाएगा। फकीर अब बदल गया है और झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख शिबू सोरेन और उनके बेटे हेमंत सोरेन सोरेन दोनों के विश्वसनीय रहे ये 67 वर्षीय नेता अब नए विश्वास के साथ नजर आने वाले हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।