कोरोना वैक्सीन पर भारत और डब्ल्यूएचओ ने दी अच्छी खबर

कोरोना वायरस का संक्रमण देश और दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है। दुनियाभर के लोगों को कोरोना की एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है, जो टीकाकरण के लिए जल्द से जल्द उपलब्ध हो सके। रूस और चीन ने ट्रायल पूरा होने से पहले से ही लोगों को वैक्सीन देना शुरू कर दिया है। वहीं, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देश वैक्सीन पर सफलता के काफी करीब हैं। अमेरिका में कोरोना टीके की रेस में आगे चल रहे एक वैक्सीन कैंडिडेट के ट्रायल पर रोक लगा दी गई है। इससे अमेरिकी लोगों की उम्मीदों को एक तरह से झटका लगा है। हालांकि वैक्सीन पर उम्मीद जगातीं खबरें भी सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन को उम्मीद है कि साल के अंत तक कोरोना की एक सुरक्षित वैक्सीन का पंजीकरण हो जाएगा। वहीं, भारत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने उम्मीद जगाई है कि देश में अगले साल की शुरुआत में एक से अधिक वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का मानना है कि कोरोनो वायरस के खिलाफ एक वैक्सीन साल 2020 के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में पंजीकरण के लिए तैयार हो जाएगी। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि 40 वैक्सीन कैंडिडेट्स में से 10 ऐसे हैं, जो तीसरे यानी अंतिम चरण के ह्यूमन ट्रायल से गुजर रहे हैं। इनके प्रभावी और सुरक्षित होने की उम्मीद है। इसी साल दिसंबर तक या साल 2021 के शुरुआत में एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी।

देश में वैक्सीन पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
भारत में वैक्सीन के जल्द ही उपलब्ध होने की संभावना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान कहा, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में देश में एक से अधिक स्रोतों से वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। हमारे विशेषज्ञों का एक समूह देश में वैक्सीन के वितरण की योजना बनाने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।” पूर्व में भी वह कह चुके हैं कि साल 2021 की पहली तिमाही में देश में वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है।

अमेरिका में वैक्सीन का ट्रायल रुका
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने अपनी कोरोना वैक्सीन के ट्रायल पर रोक लगा दी है। ट्रायल में एक वॉलेंटियर को साइडइफेक्टर होने पर कंपनी ने फिलहाल अपना ट्रायल रोक दिया है। न्यू जर्सी कंपनी न्यू ब्रंसविक के एक प्रवक्ता जेक सरजेंट ने हेल्थ केयर न्यूज मुहैया कराने वाली एजेंसी STAT की रिपोर्ट को सही बताते हुए इसकी पुष्टि की है। बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन की एडी26-सीओवी2-एस वैक्सीन अमेरिका में चौथी ऐसी वैक्सीन है, जो क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम चरण में है। बता दें कि अमेरिका में मॉडर्ना कंपनी की वैक्सीन भी रेस में आगे चल रही है।

सामान्य जीवन लौटने में लगेगा समय
माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की चपेट में आने के बाद दुनिया सामान्य स्थिति में तभी आ पाएगी, जब कोरोना वैक्सीन की दूसरी पीढ़ी बाजार में उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि जब हमारे पास वैक्सीन का काफी प्रभावशाली वर्जन उपलब्ध होगा, तभी स्थिति सामान्य हो पाएगी।एक टीवी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीन की दूसरी पीढ़ी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होनी चाहिए। हमारे पास अभी इस वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी और टी-सेल्स प्रतिक्रिया की अवधि के लिए पर्याप्त डाटा नहीं है। अगले कुछ महीनों में ज्यादातर वैक्सीन कंपनियों के पास अपने टीके के असरदार होने का आंकड़ा होगा, जिसके बाद इन कठिन सवालों के जवाब मिलने आसान हो जाएंगे।

 

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