महाकाल मंदिर के लड्डू प्रसाद पैकेट से हटेगी ओम-शिखर की फोटो, हाईकोर्ट के आदेश के बाद महाकाल मंदिर प्रबंध समिति का फैसला – देखें VIDEO

मंदिर प्रबंध समिति रोजाना 50-60 क्विंटल लड्डू बनवाती है। बैठक में प्रसाद के पैकेट का कवर बदलने का फैसला लिया गया है।

उज्जैन के भगवान महाकाल मंदिर के लड्‌डू प्रसाद पैकेट पर मंदिर के शिखर और ओम की तस्वीर नहीं होगी। मंदिर प्रबंध समिति ने प्रसाद के पैकेट की डिजाइन करेक्शन के बाद नए पैकेट तैयार कराने का फैसला लिया है। वर्तमान प्रसाद पैकेट पर महाकाल मंदिर के शिखर का फोटो होने पर आपत्ति ली जा रही थी। रविवार को हुई मीटिंग में यह फैसला लिया गया।

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इसी साल 24 अप्रैल को अपने आदेश में महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को 90 दिन (3 महीने) में फोटो और ओम हटाने के आदेश दिए थे। जिस पर मंदिर समिति ने कोर्ट से मोहलत मांगी थी और निवेदन करते हुए कहा था कि पुराने पैकेट का स्टॉक खत्म हो जाने दीजिए, नए पैकेट से हटवा देंगे।

श्रद्धालुओं को महाकाल का लड्डू प्रसाद बेचा जाता है। इसकी डिमांड न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों में भी है।

प्रसादी पैकेट पर ओम छापना गलत, हाईकोर्ट में याचिका

19 अप्रैल 2024 को महंत सुखदेवानंद ब्रह्मचारी, गुरु श्रीमहंत योगानंद, ब्रह्मचारी श्री शंभु पंच अग्नि अखाड़ा इंदौर और पंडित शरद कुमार मिश्र, गुरु श्री स्वामी राधाकान्ताचार्य जी महाराज श्री दुर्गाशक्ति पीठ ने इंदौर बेंच में याचिका लगाई थी। इसमें महाकाल मंदिर के लड्डू प्रसादी पैकेट पर महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर और ओम छापने को गलत बताया गया। इसे हटवाने की मांग की गई थी।

महाकाल मंदिर के इसी पैकेट पर विवाद था। पैकेट पर छपे मंदिर के शिखर का फोटो और ऊँ पर आपत्ति थी।

याचिकाकर्ता बोले- लोग खाली पैकेट डस्टबीन में फेंक देते हैं

याचिकाकर्ता के वकील की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि महाकाल मंदिर प्रबंध समिति लड्‌डू प्रसाद वितरण करती है। इसके बॉक्स पर महाकाल मंदिर का शिखर, जिसमें ॐ और शिखर के बीच में नागचंद्रेश्वर मंदिर का फोटो लगा है। प्रसाद लेने के बाद लोग खाली पैकेट को डस्टबीन में फेंक देते हैं। अयोध्या में लाखों डिब्बे भेजे गए, जो बाद में कूड़ेदान में फेंक दिए गए। धर्म के हिसाब से यह अनुचित है।

 

कोर्ट में तर्क दिया गया कि माता वैष्णो देवी मंदिर और अमृतसर में गोल्डन टैम्पल के प्रसाद में भी कोई चित्र नहीं रहता है। मंदिर अधिनियम में भी कहीं नहीं लिखा कि डिब्बे को कैसे रिसाइकिल करेंगे।

लड्डू प्रसादी की देश भर में डिमांड

समिति की ओर से श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद (शुद्ध घी और बेसन से निर्मित) बेचा जाता है। इसकी डिमांड न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों में भी है। रोजाना 50 से 60 क्विंटल लड्डू मंदिर समिति बनवाती है। पर्व के दिनों में अलग से बनाकर रख लिया जाता है।

यह लड्डू प्रसाद 100 ग्राम, 200 ग्राम, 500 ग्राम और एक किलो के पैकेट में उपलब्ध रहता है। भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद 400 रुपए किलो मिलता है। महाकाल मंदिर समिति प्रति माह 12 हजार लड्डू प्रसादी के पैकेट प्रिंट करवाती है।

मंदिर में व्यवस्थाओं के लिए बनेगी अलग अलग विंग

श्री महाकाल लोक कंट्रोल रूम में बैठक के बाद कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कहा कि बैठक में मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने और मंदिर का विस्तारीकरण होने के कारण व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग विंग बनाने का फैसला लिया गया है।

इनमें सुरक्षा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक सेफ्टी, वित्त का विंग रहेगा। इसमें रिटायर्ड अधिकारियों को शामिल कर उनकी राय ली जाएगी। साथ ही मंदिर समिति की चिंतामन जवासिया में संचालित गोशाला को मंदिर समिति की ग्राम बामोरा स्थित 11 हेक्टेयर जमीन पर नई गोशाला का निर्माण करने के बाद शिफ्ट किया जाएगा। बामोरा की गोशाला को मॉडल रूप में सुविधायुक्त बनाया जाएगा।

दानदाताओं की होगी कॉन्फ्रेंस

कलेक्टर सिंह ने बताया कि नवंबर महीने में मंदिर समिति की ओर से दानदाताओं की कॉन्फ्रेंस की जाएगी। दानदाताओं को दान के अलग-अलग प्रकार बताए जाएंगे। साथ ही ये भी बताया जाएगा कि इससे किस तरह की सुविधाएं मिलेंगी। ताकि दानदाताओं के जरिए पूरी राशि मिलने के बाद निर्माण जल्द शुरू किया जा सके।

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