
दोनों नेताओं का कहना है कि वे ग्रुप के मेंबर हैं, इसलिए पार्टी में गए। वहीं, पार्टी का एक वीडियो भी सामने आया है।
इंदौर की किंग एडवर्ड मेडिकल स्कूल बिल्डिंग में हुई हैलोवीन पार्टी में बीजेपी नेता अक्षय कांति बम और स्वप्निल कोठारी भी शामिल हुए थे। अक्षय ने बातचीत में कहा, ‘मैं ग्रुप का मेंबर हूं। इन्विटेशन पर बिना गेटअप गया था। स्वप्निल भाई भी साथ थे। पहली बार इस तरह की थीम रखी गई। बाद में पार्टी से चला गया था।’
उन्होंने कहा, ‘मैं भी ग्रुप का मेंबर हूं। प्रोग्राम में जो डिनर था, उसमें गया था।’
हैलोवीन पार्टी ‘जैन सोशल ग्रुप एलिगेंट’ ने की थी। इस तरह की भूतिया पार्टी का विरोध जैन समाज के अंदर ही हो रहा है। समाज के सोशल मीडिया ग्रुप्स पर मैसेज वायरल हो रहे हैं। सुझाव दिए जा रहे हैं कि ‘जैन सोशल ग्रुप एलिगेंट’ के आगे से जैन शब्द हटा दिया जाए, ताकि समाज की बदनामी न हो।
पार्टी का वीडियो भी सामने आया है। इसे जैन सोशल ग्रुप एलिगेंट के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही अपलोड किया गया था।
किंग एडवर्ड मेडिकल स्कूल इंदौर की ऐतिहासिक बिल्डिंग में से एक है। पार्टी के लिए इसकी दीवारों पर इस तरह के डरावने मैसेज लिखे गए थे।
कांग्रेस से बीजेपी में आए बम और कोठारी
लोकसभा चुनाव में अक्षय बम कांग्रेस के उम्मीदवार थे, लेकिन उन्होंने चुनाव से पहले ही बीजेपी जॉइन कर ली। तब से वे बीजेपी में हैं। स्वप्निल कोठारी भी पहले कांग्रेसी थे, बाद में वे बीजेपी में आ गए।

दोनों बीजेपी नेता पहले कांग्रेस में थे।
इंस्टाग्राम पर पेज पब्लिक से प्राइवेट किया
इंस्टाग्राम पर ‘जैन सोशल ग्रुप एलिगेंट’ के नाम से एक पेज है। इसके 456 फॉलोअर्स हैं। हैलोवीन पार्टी के बाद इस पेज को प्राइवेट कर दिया गया है, जबकि एक दिन पहले तक ये पब्लिक था। मामले में ग्रुप से कनेक्टेड और आयोजक के तौर पर अभिषेक का नाम सामने आया। उनसे संपर्क नहीं हो सका है। सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप में समाज के संभ्रांत लोग जुड़े हैं।

कंकाल, कब्रों और लाल फव्वारों से सजाया था
जैन सोशल ग्रुप ने हैलोवीन पार्टी के लिए इस ऐतिहासिक इमारत को हॉरर थीम पार्क में बदल दिया था। कंकाल, कब्रों और खून जैसे दिखने वाले लाल रंग के केमिकल से भरे फव्वारे से सजावट की गई। ओ स्त्री कल आना, लास्ट डे ऑन अर्थ, आरआईपी, कब्रों में शांति से सोइए जैसे स्लोगन लिखे गए थे।
डीन बोले – हमारे हिसाब से तो पार्टी नहीं हुई
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित मामले में कह चुके हैं..
जैन सोशल ग्रुप के प्रतिनिधि हमारे पास आए थे। गांधी हॉल और कृष्णपुरा छत्री पर भी उन्होंने पहले आयोजन किया था। हमने उन्हें सिर्फ अंदर से विजिट करने की अनुमति दी थी। हमें जब पता लगा तो सख्ती के साथ मना कर दिया कि वे इस तरह की कोई भी पार्टी नहीं कर सकते। हमारी जानकारी के हिसाब से पार्टी नहीं हुई है।
क्या है हैलोवीन डे
ईसाई समुदाय में सेल्टिक कैलेंडर के आखिरी दिन यानी 31 अक्टूबर को हैलोवीन फेस्टिवल मनाया जाता है। अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपियन देशों के कई राज्यों में इसे नए साल की शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन लोग डरावने या यूं कहें कि भूतिया गेटअप के साथ सड़क पर निकलते हैं।
हैलोवीन फेस्टिवल सदियों से मनाया जा रहा है। अब धीरे- धीरे भारत में भी इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। हैलोवीन की शुरुआत सबसे पहले आयरलैंड और स्कॉटलैंड से हुई थी।

आत्माओं का दिन है हैलोवीन डे
ईसाई समुदाय के लोगों की ऐसी मान्यता रहती है कि हैलोवीन डे के दिन भूतों का गेटअप करने से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है। हैलोवीन के शाब्दिक अर्थ पर जाएं तो इसका मतलब होता है- आत्माओं का दिन।