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??जय श्री राम??
?? सुप्रभातम् ??
?««« आज का राशिफल एवं पञ्चांग »»»?
कलियुगाब्द…………………….5122
विक्रम संवत्……………………2077
शक संवत्………………………1942
मास…………………………….अश्विन
पक्ष………………………………शुक्ल
तिथी…………………………..द्वितीया
संध्या 05.36 पर्यंत पश्चात तृतीया
रवि…………………………दक्षिणायन
सूर्योदय…………प्रातः 06.25.34 पर
सूर्यास्त…………संध्या 05.59.47 पर
सूर्य राशि…………………………तुला
चन्द्र राशि………………………..तुला
गुरु राशि………………………….धनु
नक्षत्र…………………………..स्वाति
प्रातः 08.47 पर्यंत पश्चात अनुराधा
योग……………………………..प्रीती
संध्या 07.14 पर्यंत पश्चात आयुष्मान
करण………………………….बालव
प्रातः 07.16 पर्यंत पश्चात कौलव
ऋतु……………………………..शरद
दिन…………………………..रविवार
?? आंग्ल मतानुसार :-
18 अक्तूबर सन 2020 ईस्वी ।
? शारदीय नवरात्री – द्वितीय दिवस –
माँ ब्रह्मचारिणी पूजन :-
माँ ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया। मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं। पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।
☸ शुभ अंक…………………9
? शुभ रंग……………….लाल
⚜ अभिजीत मुहूर्त :-
दोप 11.48 से 12.34 तक ।
?? राहुकाल :-
संध्या 04.29 से 05.54 तक ।
? उदय लग्न मुहूर्त :-
तुला
06:22:22 08:42:14
वृश्चिक
08:42:14 11:01:11
धनु
11:01:11 13:05:33
मकर
13:05:33 14:48:09
कुम्भ
14:48:09 16:15:51
मीन
16:15:51 17:41:02
मेष
17:41:02 19:16:30
वृषभ
19:16:30 21:12:21
मिथुन
21:12:21 23:27:19
कर्क
23:27:19 25:48:02
सिंह
25:48:02 28:05:42
कन्या
28:05:42 30:22:22
? दिशाशूल :-
पश्चिमदिशा – यदि आवश्यक हो तो दलिया, घी या पान का सेवनकर यात्रा प्रारंभ करें ।
✡ चौघडिया :-
प्रात: 07.53 से 09.19 तक चंचल
प्रात: 09.19 से 10.45 तक लाभ
प्रात: 10.45 से 12.10 तक अमृत
दोप. 01.36 से 03.02 तक शुभ
सायं 05.54 से 07.28 तक शुभ
संध्या 07.28 से 09.02 तक अमृत
रात्रि 09.02 से 10.36 तक चंचल ।
? आज का मंत्रः
॥ ॐ ब्रह्मचारिन्ये नमः॥
॥ ध्यान मंत्र ॥
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
संस्कृत सुभाषितानि :-
आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महारिपुः ।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥
अर्थात :-
“आलस्य” इन्सान के शरीर में रहा हुआ बडा शत्रु है, और जो करने से नाश नहि होता उस “उद्यम” जैसा अन्य बंधु नहि ।
? आरोग्यं सलाह :-
नवदुर्गा के औषधि रूप :-
द्वितीय ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी) –
दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी को ब्राह्मी कहा है। ब्राह्मी आयु को बढ़ाने वाली स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों को नाश करने के साथ-साथ स्वर को मधुर करने वाली है। ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। क्योंकि यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है। यह वायु विकार और मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करना चाहिए ।
ब्राह्मी के औषधीय उपयोग :
कब्ज (Constipation):-
ब्राह्मी में पाये जाने वाले औषधीय गुण कब्ज की परेशानी को दूर करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से ब्राह्मी का सेवन करने से पुरानी से पुरानी कब्ज की परेशानी दूर हो जाती है। इसके अलावा ब्राह्मी में कई रक्तशोधक गुण भी होते हैं, जो पेट से संबंधित समस्या से बचाव करते हैं।
अनिद्रा (Insomnia):-
जो व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या से परेशान हैं, उन्हें ब्राह्मी इस्तेमाल करना चाहिए। रोजाना सोने से एक घंटा पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच ब्राह्मी चूर्ण मिलाकर पीने से व्यक्ति तनावमुक्त होता है और नींद अच्छी आती है।
उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure):-
ब्राह्मी में मौजूद औषधीय गुण रक्तचाप को संतुलित रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति उच्च रक्तचाप की वजह से परेशान है तो उसे ब्राह्मी की ताजी पत्तियों का रस शहद में मिलाकर पीना चाहिए। ऐसा करने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।
खांसी और बुखार (Cold and Fever):-
ब्राह्मी, शंखपुष्पी, बादाम, छोटी या सफ़ेद इलायची- चूर्ण एक समान मात्रा में लेकर पानी में घोलकर छान लें। इस पानी में मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह- शाम आधा- आधा गिलास पीएं। इससे खांसी, जुकाम, बुखार आदि से राहत मिलती है।
⚜ आज का राशिफल :-
? राशि फलादेश मेष :-
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
विद्यार्थी वर्ग शोध कार्य व शैक्षणिक गतिविधियों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। नौकरी मे कोई नया विचार क्रियान्वित हो सकता है। कार्य की प्रशंसा होगी।
? राशि फलादेश वृष :-
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
कार्य की सफलता के लिए प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। गलतफहमी से विवाद हो सकता है। भावनाओं पर अंकुश आवश्यक है। हितशत्रुओं से सावधान रहें। यात्रा में जल्दबाजी न करें। मन में दुविधा व संशय रहेंगे। कारोबार ठीक चलेगा। आय होगी। चिंता बनी रहेगी।
?? राशि फलादेश मिथुन :-
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। कोई बड़ा कार्य प्रारंभ करने का मन बनेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। निवेश शुभ फल देगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। भरपूर प्रयास करें।
? राशि फलादेश कर्क :-
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय में वृद्धि होगी। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। किदूर से अतिथियों का आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। सी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। व्यस्तता रहेगी। प्रमाद न करें।
? राशि फलादेश सिंह :-
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। सट्टे, जुए व लॉटरी से दूर रहें। रोजगार में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। भाग्य का सहारा रहेगा। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। चोट व रोग से बचें। किसी बड़ी समस्या से निजात मिल सकती है।
??♀️ राशि फलादेश कन्या :-
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
किसी व्यक्ति के उकसावे में नहीं आएं। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। खर्च की मद में इजाफा होगा। बजट बिगड़ेगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। आय बनी रहेगी।
⚖ राशि फलादेश तुला :-
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
चोट व रोग से हानि की आशंका है, लापरवाही न करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। परिवार के छोटे सदस्यों की बाहर से शिकायत आ सकती है, ध्यान दें। पुरानी लेनदारी वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। जल्दबाजी न करें।
? राशि फलादेश वृश्चिक :-
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
कोई शारीरिक पीड़ा हो सकती है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। शत्रुओं का पराभव होगा। आर्थिक नीति में बदलाव हो सकता है। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
? राशि फलादेश धनु :-
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
अनहोनी की आशंका रह सकती है। कोर्ट-कचहरी तथा सरकारी मामलों की बाधा दूर होकर स्थिति अनुकूल रहेगी। किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत हो सकती है, लापरवाही न करें। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पूजा-पाठ आदि पर व्यय होगा।
? राशि फलादेश मकर :-
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
स्वाभिमान को चोट लग सकती है। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। वाहन व मशीनरी आदि के प्रयोग में लापरवाही न करें। किसी अपने ही व्यक्ति से विवाद हो सकता है। कारोबार ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।
? राशि फलादेश कुंभ :-
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
दांपत्य जीवन में आनंद का वातावरण रहेगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति लाभदायक बनेगी। आय में वृद्धि होगी। किसी भी प्रकार के विवाद में न पड़ें। हल्की हंसी-मजाक से बचें। चोट व रोग से परेशानी संभव है। नौकरी में मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। लाभ होगा।
??♀️ राशि फलादेश मीन :-
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। लंबी यात्रा की योजना बन सकती है। स्थायी संपत्ति में वृद्धि के योग हैं। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। विशेष सम्मान हो सकता है। विवेक का प्रयोग करें। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। जल्दबाजी में कोई व्यवहार न करें।
☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।
।। ? शुभम भवतु ? ।।
???? भारत माता की जय ??

।। सुप्रभातम् ।।
।। संस्था जय हो ।।
।। दैनिक राशि – फल ।।
आज दिनांक 18 अक्टूबर 2020 रविवार संवत् 2077 मास द्वितीय आश्विन ( शुद्ध ) शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात्रि 09:11 बजे तक रहेगी पश्चात् तृतीया तिथि लगेगी । आज सूर्योदय प्रातःकाल 06:28 बजे एवं सूर्यास्त सायं 05:55 बजे होगा । स्वाती नक्षत्र प्रातः 07:51 बजे तक रहेगा पश्चात् विशाखा नक्षत्र आरंभ होगा । आज का चंद्रमा तुला राशि मे मध्य रात्रि 12:48 बजे तक भ्रमण करते हुए वृश्चिक राशि मे प्रवेश करेंगे । आज का राहुकाल सायं 04:58 से 06:28 बजे तक रहेगा । अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:52 से 13:38 बजे तक रहेगा । दिशाशूल पश्चिम दिशा मे रहेगा यदि आवश्यक हो तो दलिया का सेवन कर यात्रा आरंभ करे । जय हो ।
ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार, एम. पी.
मो. नं. 9425491351
आज का राशिफल
मेष :~ आज आपको सामाजिक तथा सार्वजनिक क्षेत्र में प्रशंसा मिलेगी । धन लाभ है । आज आप बौद्धिक चर्चा में हिस्सा लेंगे , परंतु अपनी वाणी पर संयम रखे । वैचारिक आवेश रह सकता है । समाधानकारी व्यवहार से अधिक लाभ हो सकता है ।
वृषभ :~ आपका दिन आनंद पूर्वक बीतेगा । मानसिक स्वस्थ रहेंगे । आपके कार्य योजना के अनुसार पूर्ण होंगे । आर्थिक लाभ है । अधूरे कार्य पूर्ण होंगे । व्याधिग्रस्तों के स्वास्थ्य में सुधार होगा । सहकर्मियों से लाभ मिलेगा ।
मिथुन :~ किसी भी प्रकार के वाद – विवाद या बौद्धिक चर्चा से दूर रहे । अपमान न हो इसका ध्यान रखे । मित्रों के पीछे खर्च होगा । पेट की बीमारियों से परेशान हो सकते है । नए कार्य आरंभ नही करे । प्रवास पर नही जाए ।
कर्क :~ ग्लानि से आज आप व्यथित रहेंगे । परिवारजनों के साथ तकरार हो सकता है । धन खर्च होगा तथा अपयश मिल सकता है । समयानुसार भोजन नहीं मिलेगा । अनिद्रा सताएगी । छाती में विकार हो सकता है ।
सिंह :~ आज का दिन सुख – शांति से बीतेगा । अपने सहोदर के साथ सम्बंधों में निकटता रहेगी । उनका सहयोग मिलेगा । सम्बंधो की गहराई को आप समझ सकेंगे । मानसिक चिंता से मुक्त रहेंगे । कार्य – सफलता हैं ।
कन्या :~ परिवार में आनंद का वातावरण रहेगा । वाक्माधुर्य से आप निर्धारित कार्य कर सकेंगे । स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । बौद्धिक चर्चा में न उतरे । भोजन में मिष्टान्न मिल सकता है । प्रवास की संभावना है । व्यर्थ के खर्च से बचे । विद्यार्थियों के लिए कठिन समय है ।
तुला :~ आप व्यवस्थितरुप से आर्थिक योजना बनाएंगे । आज श्रेष्ठ सृजनात्मक प्रवृत्ति होगी। शारीरिक और मानसिक स्वस्थता रहेगी । दृढ़ विचारों के साथ आप कार्य पूर्ण करेंगे । आत्मविश्वास में वृद्धि होगी ।
वृश्चिक :~ स्वभाव में उग्रता और वाणी पर संयम रखे । शारीरिक शिथिलता और मानसिक चिंता से मन व्यग्र रहेगा । वाहन चलाते समय अकस्मात न हो इसका ध्यान रखे । आपरेशन को आज टाले । स्नहीजनों और परिवार मे वाद – विवाद हो सकता है । कोर्ट – कचहरी के कार्यों में सावधानी बरते ।
धनु :~ पारिवार में लाभ हो सकता है । मित्रों और परिवारजनों के साथ पर्यटन स्थल पर जा सकते है । व्यापार में भी लाभदायी है । परिवार में सुख – शांति रहेगी ।
मकर :~ व्यापार में धन की उगाही के लिए बाहर जाना पडेगा जो लाभप्रद रहेगा । व्यवसायिक क्षेत्र में धन तथा मान – प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी । उच्च अधिकारियो की प्रसन्नता रहेगी । व्यवसाय में भी पदोन्नति मिल सकती है । अकस्मात से बचे ।
कुंभ :~ शारीरिक अस्वस्थता रहेगी । शिथिलता और आलस्य रहेगा । फिर भी मानसिकरुप से प्रसन्नता रहेगी । व्यवसाय में उच्च अधिकारी के साथ कार्य करते समय संभलकर रहें । आनंद – प्रमोद मै खर्च हो सकता है । संतानो की चिंता रहेगी । विदेश से समाचार मिलेंगे ।
मीन :~ क्रोध और वाणी पर संयम रखे । स्वास्थ्य में सावधानी रखे । सरकार – विरोधी प्रवृत्तियों से दूर रहे । रोगों के पीछे खर्च हो सकता है । मानसिक अस्वस्थता रहेंगी । परिवार में नकारात्मकता न हो इसका ध्यान रखे । ( डाँ. अशोक शास्त्री )
।। शुभम् भवतु ।। जय सियाराम ।।
।। जय श्री कृष्ण ।। जय गुरुदेव ।।