इस बार नवरात्र में सब कुछ होगा अद्वितीय-पंडित दिनेश गुरूजी

       

इस बार नवरात्र में सब कुछ होगा अद्वितीय

– पंडित दिनेश गुरूजी ज्योतिष वास्तु इंदौर

2020 में वह सब कुछ ऐसे हो रहा है, जो कभी किसी सदी में आजतक नहीं हुआ। नवरात्र पूरे एक महीने लेट आ रहे हैं। महामारी के कारण मंदिरों में दूरी बनाई रखनी पड़ेगी। रामलीला और रावण दहन का उत्साह फीका होगा।दीवाली के गीफट और शुभकामनाओं का आदान प्रदान ,मोबाइल पर ही अधिक रहेगा। पर्यावरण दूषित न हो, संक्रमण न हो, इस लिए ,  मिठाई  , मेवे, दीवाली की फुलझड़ियां, पटाके आदि व्हाट्स ऐप या टी वी पर ही देखे जा सकेंगे। अर्थात हर त्योहार मद्धम मद्धम ,फीका फीका।
अधिकमास समाप्त होने के बाद नवरात्र 17 अक्टूबर को शुरू हो जाएगा. विजय दशमी 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस बार नौ दिनों में ही दस दिनों के पर्व पूरा हो जाएगा. इसका कारण तिथियों का उतार चढ़ाव है. 24 अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक अष्टमी है और उसके बाद नवमी लग जाएगी. दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही है,
इसलिए अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन होगी. जबकि नवमी के दिन सुबह 7 बजकर 41 मिनट के बाद दशमी तिथि लग जाएगी. इस कारण दशहरा पर्व और अपराजिता पूजन एक ही दिन आयोजित होंगे. कुल मिलाकर 17 से 25 अक्टूबर के बीच नौ दिनों में दस पर्व संपन्न हो रहे हैं.
मां दुर्गा के वाहन का पड़ेगा प्रभाव &किसान आंदोलन
इस बार शारदीय नवरात्र का आरंभ शनिवार के दिन हो रहा है. ऐसे में देवीभाग्वत पुराण के कहे श्लोक के अनुसार माता का वाहन अश्व होगा. घोड़े पर आयेंगी मां, भैंस पर होंगी विदा,  अश्व पर माता का आगमन छत्र भंग, पड़ोसी देशों से युद्ध, आंधी तूफान लाने वाला होता है. ऐसे में आने वाले साल में कुछ राज्यों में सत्ता में उथल-पुथल हो सकता है. सरकार को किसी बात से जन विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है. कृषि के मामले में आने वाल साल सामान्य रहेगा. देश के कई भागों में कम वर्षा होने से कृषि का हानि और किसानों को परेशानी होगी. इस बार मां भैंसे पर विदा हो रही है और इसे भी शुभ नहीं माना जाता है.
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त:
प्रतिपदा तिथि 17 अक्टूबर की रात 1 बजे से प्रारंभ होगी. वहीं, प्रतिपदा तिथि 17 अक्टूबर की रात 09 बजकर 08 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. इसके बाद आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि, यानी 17 अक्टूबर को घट स्थापना मुहूर्त का समय सुबह 06 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक का है. अभिजित मुहूर्त प्रात:काल 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की होती है पूजा
नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है. मां पार्वती माता शैलपुत्री का ही रूप हैं और हिमालय राज की पुत्री हैं. माता नंदी की सवारी करती हैं. इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का फूल है. नवरात्रि के पहले दिन लाल रंग का महत्व होता है. यह रंग साहस, शक्ति और कर्म का प्रतीक है. नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना पूजा का भी विधान है.
अक्टूबर के व्रत और त्योहार:
13 अक्टूबर, दिन: मंगलवार:
एकादसी
14 अक्टूबर, दिन: बुधवार: प्रदोष व्रत।
15 अक्टूबर, दिन: गुरुवार: मासिक शिवरात्रि।
16 अक्टूबर, दिन: शुक्रवार: आश्विन अधिक अमावस्या।
17 अक्टूबर, दिन: शनिवार: नवरात्रि प्रारंभ, घट स्थापना ,दुर्गपूजा महाराजा अग्रसेन जयंती
18 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर- मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर- मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर- षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर- मां कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर- मां महागौरी दुर्गा पूजा,  शनिवार: दुर्गा अष्टमी और महानवमी।
25 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा,  रविवार: दशहरा, विजयादशमी, नवरात्रि पारण।
26 अक्टूबर, दिन: सोमवार: दुर्गा विसर्जन।
27 अक्टूबर, दिन: मंगलवार: पापांकुशा एकादशी
28 अक्टूबर, दिन: बुधवार: प्रदोष व्रत, ईद ए मिलाद।
30 अक्टूबर, दिन: शुक्रवार: शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूजा।

31 अक्टूबर, दिन: शनिवार: वाल्मीकि जयंती।
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माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसन्धान संस्थान इंदौर
पंडित दिनेश गुरुजी ज्योतिष वास्तु,पितृदोष विशेषज्ञ
9977794111

 

महिलाओ के लिए विशेष

यदि बार-बार अनावश्यक डाक्टर के पास दौडने से बचना चाहती है तो अवश्य पढ़ें
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यदि आप कमर दर्द ,रक्त विकार ,स्नायु विकार ,असमय बुढ़ापा ,झुर्रियो ,त्वचा के रूखापन ,मानसिक तनाव ,संतान हीनता ,गर्भाशय-योनी विकार ,मानसिक व्याधि ,भुत प्रेत भय वायव्य बाधा ,उत्साह हीनता ,ऊर्जा की कमी ,संवेदन हीनता ,ओज-तेज-प्रभावशालिता में कमी ,आदि का सामना कर रही है तो सीधा सा अर्थ है की आप में ऋणात्मक ऊर्जा अर्थात पृथ्वी की उर्जा अर्थात काली की उर्जा अर्थात मूलाधार की उर्जा की कमी हो रही है जो आप में नैसर्गिक रूप से पाया जाता है अधिक मात्रा में ,जो आपकी मूल प्रकृति है ,,ध्यान दे आप प्रकृति की नैसर्गिक ऋणात्मक प्रतिकृति है ,आपका शरीर ,मानसिक संरचना ,उर्जा प्रणाली इस प्रकार की बनी होती है की आपमें ऋणात्मक ऊर्जा [प्रकृति की ]अधिक होती है ,अधिक अवशोषित होती है फलतः आपको अधिक जरुरत भी होती है ,,ऐसा नैसर्गिक रूप से है इसे आप चाहकर भी नहीं बदल सकती ,|,भावनाओं की अधिकता ,कोमलता ,सौंदर्य प्रियता ,बच्चो के पोषण – उत्पत्ति की क्षमता ,मासिक अवस्था केवल आपमें ही होती है पुरुष में नहीं ,क्योकि पुरुष धनात्मक उर्जा का प्रतिनिधित्व करता है ,उसमे धनात्मक ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है आपमें ऋणात्मक की ,जिनका एक निश्चित संतुलन होता है ,संतुलन बिगड़ने से दोनों में समस्याए उत्पन्न होती है ,,आपके समस्त गुण और प्रतिक्रियाये -क्रियाए इन्ही पृथ्वी तत्वीय ऊर्जा से प्रभावित होती है ,,इनकी कमी से उपरोक्त समस्याओं के साथ ही आपकी सम्पूर्ण कार्यप्रणाली अव्यवस्थित हो जाती है ,जिससे कमशः समस्याए उत्पन्न होने लगती है ,,अतः आपको अपने मूल उर्जा को बनाए रखना चाहिए ,इससे आप उपरोक्त समस्याओं से बच सकती है ,कम तो यह अवश्य ही हो सकती है ,इससे आपको डाक्टरों का चक्कर भी कम लगाना पड़ेगा भविष्य में ,इसके लिए आप निम्न उपाय कर सकती है ,,

[१]अपने बाल बढाकर रखे ,उन्हें संवार कर रखे ,,बाल वातावरणीय तरंगों के ग्रहण करता है यह तरंग अवशोषित करते है जो संवेदन शीलता और दूसरों को परखने की क्षमता बढाने के साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि करते है ,सौंदर्य तो यह बढाते ही है।

[२]पावों में चांदी के पायल जरुर पहने [अन्य धातु के नहीं ],यह आपमें पृथ्वी से ऊर्जा ग्रहण की मात्रा बढाते है ,फलतः संतुलन बनता है।

[३]सुबह -शाम कच्ची मिटटी की जमीन पर कुछ देर नंगे पाँव अवश्य चले ,यह पृथ्वी से तरंगे ग्रहण करने के लिए उपयोगी है जो अनेक रोगों, मानसिक तनाव -विकार को दूर करता है ,सौंदर्य -तेज-उत्साह बढता है ,यदि यह संभव नहीं है टी काली मिटटी घर में लाकर उसे पावो से १० मिनट पानी डालकर आट की तरह गुथे ,यह भी संभव नहीं है तो उस मिटटी का पेस्ट बनाकर पावो में लगाकर सूखने दे ,फिर धो डाले।

[४]कमर में कला धागा पहने ,यह रक्षा के साथ उर्जा संतुलन में भी कारगर होता है ,कमर की समस्याओं में भी लाभप्रद है।

[५]पृथ्वी अथवा काली की उर्जा से परिपूर्ण रसायनों-वनस्पतियों का पेस्ट बनाकर मूलाधार पर गोल टीका लगाए ,,यह संभव नहीं है तो निम्न उपाय करे।

[६]काली माँ की पूजा करे ,साधना करे ,यह संभव न हो तो भोजपत्र पर बना अभिमंत्रित -प्राण प्रतिष्ठित काली यन्त्र चांदी के ताबीज में [यन्य धातु में नहीं ]गले में धारण करे जो किसी वास्तविक काली साधक द्वारा बनाया और अभिमंत्रित किया गया हो ..

उपरोक्त उपाय पर ,विवरण पर यदि ध्यान दे तो आपकी बहुत सी समस्याए कम हो जायेगी और आपके स्वस्थ रहने -निरोगी रहने की मात्रा बढ़ जायेगी ,उत्साह-जीवनी उर्जा बढ़ जाने से आप सुखी हो सकती है।
माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसन्धान संस्थान इंदौर
पंडित दिनेश गुरुजी ज्योतिष वास्तु,पितृदोष विशेषज्ञ
9977794111

 

 

 

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