
केंद्र सरकार एयर इंडिया(Air India) के विनिवेश (Disinvestment) के लिए समयसीमा बढ़ाकर 15 दिसंबर तक कर सकती है साथ ही संभावित खरीदारों को आकर्षित करने के लिए सरकार असेट वैल्यूएशन के नियमों को आसान कर सकती है। सरकार इसे इंटरप्राइज वैल्यू पर बोली लगा सकती है। सूत्र ने कहा कि बोली लगाने वालों को पूरी कंपनी के लिए पेशकश करने के लिए कहा जाएगा। इसकी 85 फीसदी राशि कर्ज चुकाने में चली जाएगी और शेष राशि सरकार को मिलेगी।
एअर इंडिया पर 60 हजार करोड़ का कर्ज
बता दें कि घाटे में चल रही कंपनी को सरकार लंबे समय से बेचने की तैयारी कर रही है। बोली लगाने की मौजूदा समय सीमा 30 अक्टूबर को खत्म हो रही है। विनिवेश की तारीख बढ़ी तो यह पांचवां विस्तार होगा। एयरलाइन पर करीब 70 हजार करोड़ का भारी कर्ज है।
20 सालों से बिक रही है एअर इंडिया
एअर इंडिया को पिछले 20 सालों से बेचने की कोशिश की जा रही है। पर यह महाराजा टैग वाली कंपनी अभी तक बिक नहीं पाई है। 27 मई 2000 में सरकार ने एअर इंडिया में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी थी। हालांकि उस समय भी बात नहीं बन पाई थी। तब से यह बेचने का सिलसिला चल रहा है।
जब नीति आयोग ने मई 2017 में सीपीएसई के विनिवेश की सिफारिश की थी उस समय भी एअर इंडिया का नाम था। 12 दिसंबर 2019 को हरदीप सिंह पुरी ने संसद में एअर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की जबकि इससे पहले 2018 में इसमें 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा हुई थी।