
इंदौर की महिला को धमकाकर 46 लाख ठगने के मामले में गिरफ्तार आरोपी।
इंदौर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए महिला से 46 लाख रुपए ठगने के मामले में गिरफ्तार पिता-पुत्र से पूछताछ में बड़े खुलासे हुए हैं। क्राइम ब्रांच को नासिक और चेन्नई में हुई डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं के भी सुराग मिले हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में क्राइम ब्रांच की टीमें सक्रिय हैं और आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं।
50% कमीशन के लालच में खुलवाया खाता
इस मामले में ग्राम सतौरा, कन्नौज (उत्तर प्रदेश) के अली अहमद खान (69) और असद अहमद खान (36) को गिरफ्तार किया गया है। क्राइम ब्रांच के एडी.डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि असद ने 2 सितंबर 2024 को 50% कमीशन के लालच में बैंक खाता खुलवाया था, जिसे 14 सितंबर को फ्रीज कर दिया गया।
जांच में सामने आया कि यह खाता साइबर फ्रॉड के लिए खोला गया था। खाते के दस्तावेज मदरसा समिति के पदाधिकारियों के नाम पर थे। आरोपी ने स्वीकार किया कि उन्हें खाते में आने वाले पैसे का 50% कमीशन मिलता। यह खाता खोलने के लिए उन्हें मलेशिया से एक +60 नंबर से कॉल आया था। जांच में पता चला कि यह VIN जनरेटेड कॉल थी।
18 खातों में हुआ पैसा ट्रांसफर
दंडोतिया ने बताया कि इंदौर की बुजुर्ग महिला के खाते से 46 लाख रुपए मदरसा समिति के खाते में ट्रांसफर हुए, जो बाद में 18 अलग-अलग खातों में देशभर में भेजे गए।
इस पर क्राइम ब्रांच की टीम देश के कई राज्यों में सक्रिय है और अलग-अलग जगह दबिश दे रही हैं।

शंघाई का मिला आईपी एड्रेस
टीम को जांच में जो ट्रांजेक्शन आईडी मिला, जिसमें पैसा ट्रांसफर है, उसमें चीन के शंघाई का आईपी एड्रेस सामने आया है। आरोपियों के मोबाइल को साइबर फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग ऐप Sender पाई गई, जिसके जरिए संभवत: आरोपी खातों को मॉनिटर करते थे।
नासिक और चैन्नई की भी घटना में लगा सुराग
पकड़ाए आरोपियों के खात में कुछ ही दिनों में डेढ़ करोड़ रुपए आए है। इसमें इंदौर सहित तीन वारदातों के पैसे आए है। नासिक और चैन्नई में भी इस तरह की घटना का पता चला है। वहां कि पुलिस से भी जानकारी ली जा रही है। संभवत: वहां की पुलिस भी इनसे पूछताछ करने आ सकती है। इधर, पूछताछ में आरोपियों ने ये भी बताया कि उन्हें ये पैसा नहीं मिला है।
महिला को 5 दिन तक डराया-धमकाया था
बदमाशों ने महिला को ट्राई (टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी बनकर धमकाया। कहा कि आपके फोन नंबर का गलत इस्तेमाल हुआ है। सीबीआई और क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर उन्हें 5 दिन तक डराते रहे।
घटना 11 सितंबर की है। इस दिन सुबह महिला को वॉट्सऐप पर कॉल आया। ट्राई के दिल्ली हैड ऑफिस से इंक्वायरी ऑफिसर बताकर कहा कि आपके नाम से एक सिम रजिस्टर्ड है। इससे इल्लिगल एडवरटाइजिंग और हैरेसमेंट का अपराध किया गया है। आपके खिलाफ एफआईआर की गई है।
थोड़ी देर बाद दूसरे मोबाइल नंबर से कॉल आया। इस बदमाश ने बोला कि वह सीबीआई ऑफिसर बोल रहा है। आपके आधार कार्ड से दर्ज एक पार्सल कम्बोडिया भेजा गया है, जो कस्टम विभाग में है और इस पर इंक्वायरी चल रही है। आपके नाम की एक पासबुक भी निकली है। इसमें ड्रग्स, आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करोड़ों रुपए के ट्रांजैक्शन मिले हैं। हमने आपका वारंट निकाला है।
जानिए डिजिटल ठगी का A टू Z…


